भारतीय तटरक्षक बल को मिलेंगे 8 नए डोर्नियर 228 विमान

भारतीय तटरक्षक बल को मिलेंगे 8 नए डोर्नियर 228 विमान

भारत की समुद्री सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए रक्षा मंत्रालय ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ 2,312 करोड़ रुपये का अनुबंध किया है। इस समझौते के तहत भारतीय तटरक्षक बल के लिए आठ डोर्नियर 228 विमान खरीदे जाएंगे। यह अनुबंध रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में अंतिम रूप दिया गया, जो देश की समुद्री निगरानी क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम पहल है।

तटरक्षक बल की क्षमता में होगा इजाफा

इस अनुबंध के अंतर्गत आठ डोर्नियर 228 विमानों के साथ-साथ विशेष परिचालन उपकरण भी प्रदान किए जाएंगे, जिन्हें भारतीय तटरक्षक बल की आवश्यकताओं के अनुसार तैयार किया जाएगा। ये विमान भारत की विस्तृत तटीय सीमा और विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में निगरानी, समुद्री टोही और खोज एवं बचाव अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

डोर्नियर 228 एक बहुउद्देश्यीय, कम दूरी में उड़ान भरने और उतरने में सक्षम ट्विन-टर्बोप्रॉप विमान है। इसका उपयोग समुद्री गश्त, तटीय निगरानी और उपयोगिता कार्यों के लिए व्यापक रूप से किया जाता है। इन विमानों के शामिल होने से तटरक्षक बल की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और निगरानी दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया को बढ़ावा

यह खरीद “बाय (इंडियन)” श्रेणी के अंतर्गत की गई है, जो घरेलू निर्माताओं को प्राथमिकता देती है। यह कदम आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसी पहलों के अनुरूप है, जिनका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में विदेशी आयात पर निर्भरता कम करना है।

एचएएल, जो एक प्रमुख सरकारी एयरोस्पेस कंपनी है, इस परियोजना को अपने घरेलू उत्पादन तंत्र के माध्यम से पूरा करेगी। इस सौदे से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होने की संभावना है। साथ ही, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) तथा सहायक उद्योगों को भी मजबूती मिलेगी, जिससे रक्षा उत्पादन की आपूर्ति श्रृंखला और सुदृढ़ होगी।

समुद्री सुरक्षा ढांचे को मिलेगी मजबूती

भारतीय तटरक्षक बल देश की समुद्री सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह बल तस्करी-रोधी अभियानों, पर्यावरण संरक्षण, आपदा राहत कार्यों और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। अतिरिक्त डोर्नियर विमानों के शामिल होने से समुद्री क्षेत्र की निगरानी प्रणाली और प्रभावी बनेगी।

भारत का विशेष आर्थिक क्षेत्र संसाधनों और व्यापारिक गतिविधियों के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में समुद्री क्षेत्र की जागरूकता और निगरानी को मजबूत करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती सामरिक चुनौतियों को देखते हुए यह निवेश रणनीतिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

* डोर्नियर 228 एक ट्विन-टर्बोप्रॉप उपयोगिता और समुद्री गश्ती विमान है, जिसका निर्माण भारत में एचएएल द्वारा किया जाता है।
* “बाय (इंडियन)” श्रेणी के तहत रक्षा खरीद में घरेलू निर्माताओं को प्राथमिकता दी जाती है।
* भारतीय तटरक्षक बल रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
* विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) समुद्र में वह क्षेत्र है जहां तक किसी देश को संसाधनों के दोहन और आर्थिक गतिविधियों का विशेष अधिकार प्राप्त होता है।

इस सौदे के माध्यम से सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि समुद्री सुरक्षा और रक्षा आत्मनिर्भरता दोनों उसकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं। स्वदेशी विमानों के जरिए तटरक्षक बल की हवाई क्षमता में विस्तार न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा, बल्कि देश के रक्षा उत्पादन क्षेत्र को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

Originally written on February 13, 2026 and last modified on February 13, 2026.

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