भारतीय औषधि मानक में ऐतिहासिक प्रगति: इंडियन फार्माकोपिया 2026 जारी, WHO रैंकिंग में भारत आठवें स्थान पर
भारत ने वैश्विक औषधि सुरक्षा निगरानी (Pharmacovigilance) में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सूची में 8वाँ स्थान प्राप्त किया है। एक दशक पहले तक 123वें स्थान पर रहने वाले भारत का यह उभार दवा नियमन, रिपोर्टिंग प्रणाली और गुणवत्ता मानकों में निरंतर सुधार का परिणाम है। इस उपलब्धि की घोषणा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने इंडियन फार्माकोपिया 2026 के विमोचन के अवसर पर की।
इंडियन फार्माकोपिया 2026: गुणवत्ता का राष्ट्रीय संदर्श
इंडियन फार्माकोपिया भारत की औषधियों की गुणवत्ता, शुद्धता और शक्ति के लिए अधिकृत मानक ग्रंथ है। इसका 10वाँ संस्करण, जो वर्ष 2026 के लिए प्रकाशित हुआ है, भारत में निर्मित और उपभोग की जाने वाली दवाओं के नियमन हेतु प्रमुख संदर्भ दस्तावेज है। यह न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए भी एक आधारभूत दस्तावेज है।
औषधि मानकों में विस्तार और नवाचार
नवीन संस्करण में:
- 121 नए मोनोग्राफ जोड़े गए हैं,
- जिससे कुल संख्या 3,340 हो गई है।
- प्रमुख उपलब्धि: 20 रक्त घटक मोनोग्राफ पहली बार शामिल किए गए हैं।
इससे रक्त संक्रमण सेवा, थैलेसीमिया, हीमोफीलिया और एनीमिया जैसे क्षेत्रों में वैज्ञानिक अध्ययन और नैदानिक अनुसंधान को बल मिलेगा। भारत ऐसा करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है जिसने अपने फार्माकोपिया में रक्त घटकों को औपचारिक रूप से शामिल किया है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को समर्थन
स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, नए मोनोग्राफ सीधे राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP), एनीमिया मुक्त भारत और सर्वजन टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) जैसे प्रमुख जन स्वास्थ्य अभियानों को लाभ पहुँचाएंगे।
नए दवा और जैविक मानक उपचार की सुरक्षा, प्रभावकारिता और एकरूपता को सशक्त बनाएंगे।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत ने WHO की फार्माकोविजिलेंस योगदान सूची में 8वाँ स्थान प्राप्त किया है।
- इंडियन फार्माकोपिया 2026 इसका 10वाँ संस्करण है।
- कुल 3,340 मोनोग्राफ इसमें सम्मिलित हैं।
- भारत दुनिया का पहला देश है जिसने रक्त घटकों को फार्माकोपिया में शामिल किया है।
वैश्विक मान्यता और फार्मास्यूटिकल नेतृत्व
इंडियन फार्माकोपिया को अब 19 वैश्विक दक्षिण देशों द्वारा आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त है। यह भारत की औषधि नियामक विश्वसनीयता और गुणवत्ता युक्त दवाओं के विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में भूमिका को मज़बूत करता है।
भारत अब अंतरराष्ट्रीय दवा मानकों के निर्माण में विशेषकर विकासशील देशों के लिए नेतृत्व करता हुआ दिखाई दे रहा है।
यह प्रगति न केवल भारत की वैज्ञानिक शक्ति और नीति निर्माण की क्षमता को दर्शाती है, बल्कि यह भारत को वैश्विक स्वास्थ्य नीति और सार्वजनिक दवा वितरण के केंद्र में स्थापित करने की दिशा में एक ठोस कदम भी है।