ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक 2026: भारत की कूटनीतिक भूमिका मजबूत
भारत मई 2026 में नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करने जा रहा है, जो उसकी मौजूदा अध्यक्षता के तहत एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पड़ाव माना जा रहा है। यह बैठक 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले आयोजित होगी और ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक स्तर पर राजनीतिक अनिश्चितता और इस समूह के विस्तार ने नई चुनौतियां और अवसर दोनों पैदा किए हैं।
वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत की नेतृत्व भूमिका
भारत ने इस वर्ष की अध्यक्षता के लिए “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास” को केंद्रीय विषय बनाया है। इस दृष्टिकोण के माध्यम से भारत खुद को विकसित और विकासशील देशों के बीच एक सेतु के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने “मानवता-प्रथम” नीति पर जोर देते हुए कहा है कि आज के दौर में आर्थिक अस्थिरता, जलवायु परिवर्तन और तकनीकी चुनौतियों जैसे मुद्दों पर सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
डिजिटल सहयोग और विकास पर विशेष ध्यान
इस बैठक में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रमुख मुद्दा रहेगा। भारत अपने सफल मॉडल जैसे आधार और यूपीआई को अन्य सदस्य देशों के साथ साझा करने और अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। इसके साथ ही जलवायु वित्त पर भी चर्चा होगी, जिसमें यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी कि विकासशील देशों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाले बिना हरित परिवर्तन को बढ़ावा दिया जाए। भारत वैश्विक संस्थानों में सुधार, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बदलाव की मांग को भी प्रमुखता से उठाएगा।
विस्तारित ब्रिक्स में नई चुनौतियां
हाल ही में ब्रिक्स समूह का विस्तार हुआ है, जिसमें ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र, इथियोपिया और इंडोनेशिया जैसे देशों को शामिल किया गया है। इस विस्तार से जहां समूह की वैश्विक पहुंच बढ़ी है, वहीं सदस्य देशों के बीच मतभेदों को संतुलित करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव जैसे मुद्दे इस बैठक में चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं, जिससे समूह की एकजुटता की परीक्षा होगी।
रणनीतिक एजेंडा और प्रमुख भागीदारी
इस बैठक में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की भागीदारी संभावित है, जो इसकी वैश्विक महत्ता को दर्शाती है। चर्चा के दौरान स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने, डॉलर पर निर्भरता कम करने, जल सुरक्षा और वायुमंडलीय तकनीकों जैसे नए विषयों पर भी विचार किया जाएगा। इस बैठक के निष्कर्ष आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के एजेंडा और अंतिम घोषणाओं को आकार देंगे।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ब्रिक्स की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के समूह के रूप में हुई थी।
- हाल के विस्तार में कई पश्चिम एशियाई और अफ्रीकी देशों को शामिल किया गया है।
- डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में आधार और यूपीआई जैसे भारतीय मॉडल शामिल हैं।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार उभरती अर्थव्यवस्थाओं की प्रमुख मांग रही है।
अंततः, यह बैठक भारत के लिए वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक क्षमता दिखाने और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इसके माध्यम से भारत न केवल अपने नेतृत्व को सुदृढ़ करेगा, बल्कि वैश्विक चुनौतियों के समाधान में भी अहम भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ेगा।