ब्राज़ील में डायनासोर की जीवाश्मित उल्टी से मिला उड़ने वाले सरीसृप का नया जीवाश्म
वैज्ञानिकों ने लगभग 10 करोड़ वर्ष पुराने एक दुर्लभ जीवाश्मित अवशेष का अध्ययन करते हुए उड़ने वाले सरीसृप की एक नई प्रजाति की खोज की है। यह जीवाश्म ब्राज़ील के अरारीपे बेसिन स्थित रोमुअल्डो संरचना से प्राप्त हुआ, जिसे सामान्य भाषा में “डायनासोर की जीवाश्मित उल्टी” कहा जाता है। नई प्रजाति का नाम “बाकिरिबु वारिड्जा” रखा गया है। यह विज्ञान के इतिहास में पहला ऐसा विलुप्त जीव है जिसे पूरी तरह जीवाश्मित उल्टी से प्राप्त अवशेषों के आधार पर वैज्ञानिक रूप से वर्णित किया गया है।
ब्राज़ील में दुर्लभ जीवाश्म की खोज
यह खोज ब्राज़ील के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में स्थित सैंटाना समूह की भूवैज्ञानिक संरचना में की गई। यह क्षेत्र अपने समृद्ध जीवाश्म भंडार के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है क्योंकि यहां प्राचीन जीवों के अवशेष असाधारण रूप से सुरक्षित अवस्था में मिलते हैं। वैज्ञानिकों को जीवाश्मित सामग्री में नई प्टेरोसौर प्रजाति के दो अलग-अलग व्यक्तियों की हड्डियां और चार मछलियों के जीवाश्म भी मिले। इस शोध के परिणाम अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका “साइंटिफिक रिपोर्ट्स” में प्रकाशित किए गए, जिसमें इस असामान्य संरक्षण प्रक्रिया का विस्तृत विवरण दिया गया है।
जीवाश्मित उल्टी में कैसे सुरक्षित रहे अवशेष
सामान्यतः जीवाश्म अवसादी चट्टानों में सुरक्षित मिलते हैं, लेकिन “बाकिरिबु वारिड्जा” के अवशेष एक शिकारी द्वारा उगली गई सामग्री में पाए गए। वैज्ञानिकों का मानना है कि शिकारी के पाचन तंत्र ने शिकार को आंशिक रूप से पचा लिया था, लेकिन हड्डियों को पूरी तरह नष्ट नहीं कर पाया। इसके कारण ये नाजुक कंकालीय अवशेष सुरक्षित रह गए और लाखों वर्षों तक संरक्षित बने रहे। इस प्रकार के जीवाश्मित अवशेषों को “रेगर्जिटालाइट्स” कहा जाता है, जो प्राचीन खाद्य श्रृंखलाओं को समझने में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।
संभावित शिकारी और प्राचीन भोजन व्यवहार
शोधकर्ताओं का अनुमान है कि किसी बड़े स्पाइनोसॉरिड डायनासोर ने इस उड़ने वाले सरीसृप को खाया होगा और बाद में इसके अवशेषों को उगल दिया होगा। जीवाश्म में चार मछलियां भी सिर की दिशा में एक ही क्रम में पाई गईं, जो आधुनिक मछली खाने वाले पक्षियों के भोजन व्यवहार से मिलती-जुलती है। इस प्रकार की व्यवस्था से शिकारी जीव मछलियों को आसानी से निगल सकते हैं और पंखों के कारण घुटन का खतरा कम हो जाता है। इस खोज से वैज्ञानिकों को प्रागैतिहासिक शिकार और भोजन व्यवहार की अनोखी झलक मिलती है।
प्टेरोसौर की विशेष भोजन प्रणाली
नई प्रजाति के प्टेरोसौर के मुंह में कंघी जैसी संरचना और सैकड़ों पतले सुईनुमा दांत पाए गए। यह विशेष संरचना उसे उथले पानी में भोजन छानकर खाने में मदद करती थी, जो आधुनिक फ्लेमिंगो पक्षियों की भोजन प्रणाली से मिलती-जुलती है। पानी से छोटे जीवों को छानकर खाने की इस क्षमता के कारण यह बड़े शिकारी जीवों से प्रतिस्पर्धा से बच सकता था। यह प्रजाति क्रेटेशियस काल के दौरान प्राचीन ब्राज़ील के गर्म उष्णकटिबंधीय पारिस्थितिकी तंत्र में पनपती थी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- प्टेरोसौर उड़ने वाले सरीसृप थे जो डायनासोर के समय में रहते थे, लेकिन स्वयं डायनासोर नहीं थे।
- ब्राज़ील का अरारीपे बेसिन क्रेटेशियस काल के जीवाश्मों के लिए विश्व के सबसे समृद्ध स्थलों में से एक माना जाता है।
- क्रेटेशियस काल लगभग 145 मिलियन वर्ष पहले शुरू हुआ और 66 मिलियन वर्ष पहले समाप्त हुआ।
- स्पाइनोसॉरिड डायनासोर बड़े मांसाहारी जीव थे जो मुख्य रूप से मछलियां खाने के लिए अनुकूलित थे।
इस अनोखी खोज ने प्रागैतिहासिक जीवों के अध्ययन में एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। जीवाश्मित उल्टी में संरक्षित अवशेष यह दर्शाते हैं कि प्राकृतिक प्रक्रियाएं किस प्रकार लाखों वर्षों तक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारी को सुरक्षित रख सकती हैं।