ब्रह्मपुत्र नदी पर अंतर्देशीय जलमार्ग परियोजनाओं का शुभारंभ

ब्रह्मपुत्र नदी पर अंतर्देशीय जलमार्ग परियोजनाओं का शुभारंभ

केंद्रीय बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने असम में राष्ट्रीय जलमार्ग-2 (ब्रह्मपुत्र नदी) पर तीन महत्वपूर्ण अंतर्देशीय जलमार्ग अवसंरचना परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इन परियोजनाओं का शुभारंभ डिब्रूगढ़ में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में किया गया। इन पहलों का उद्देश्य नदी आधारित संपर्क और व्यापार को बढ़ावा देना, लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार करना तथा क्षेत्र की नदी संस्कृति और विरासत को संरक्षित करना है।

बोगीबील में कस्टम्स और इमिग्रेशन कॉम्प्लेक्स

बोगीबील में विकसित कस्टम्स और इमिग्रेशन कॉम्प्लेक्स को आधुनिक पर्यटन और कार्गो टर्मिनल के रूप में तैयार किया गया है। इस परिसर में कस्टम्स, इमिग्रेशन और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के प्रशासनिक कार्यों को एक ही स्थान पर एकीकृत किया गया है।

इस कॉम्प्लेक्स में आगमन और प्रस्थान हॉल, कार्गो भंडारण क्षेत्र, प्रशासनिक कार्यालय, कर्मचारियों के लिए सुविधाएं और एकीकृत सुरक्षा प्रणाली उपलब्ध कराई गई है। यह सुविधा भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्गों के अंतर्गत संचालन को अधिक सुगम बनाएगी और कार्गो परिवहन को तेज करेगी। इससे प्रक्रियागत देरी कम होने की उम्मीद है, जिससे ब्रह्मपुत्र नदी व्यापारिक गलियारे के रूप में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेगी।

धुबरी में सीमा-पार व्यापार को बढ़ावा

धुबरी में बनाए गए कस्टम्स और इमिग्रेशन कॉम्प्लेक्स का उद्देश्य पश्चिमी असम में निर्यात-आयात गतिविधियों को बढ़ाना और नियामकीय निगरानी को मजबूत करना है। बांग्लादेश सीमा के निकट स्थित होने के कारण धुबरी को क्षेत्रीय व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार के रूप में विकसित किया जा रहा है।

इस नई अवसंरचना से लॉजिस्टिक्स लागत कम होने और व्यापार प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ने की संभावना है। यह पहल अंतर्देशीय जल परिवहन के माध्यम से क्षेत्रीय व्यापार को प्रोत्साहित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

डिब्रूगढ़ में विरासत भवन का नवीनीकरण

डिब्रूगढ़ में भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के विरासत भवन का नवीनीकरण भी इस परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें ऐतिहासिक वास्तुकला को संरक्षित रखते हुए आधुनिक सुविधाओं को जोड़ा गया है।

यह भवन प्रशासनिक गतिविधियों को समर्थन देने के साथ-साथ नदी पर्यटन को भी प्रोत्साहित करेगा। यह पहल विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के संतुलन को दर्शाती है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां नदियां सामाजिक और आर्थिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • राष्ट्रीय जलमार्ग-2 ब्रह्मपुत्र नदी को संदर्भित करता है, जिसे राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम 2016 के तहत घोषित किया गया है।
  • भारत-बांग्लादेश अंतर्देशीय जल परिवहन और व्यापार प्रोटोकॉल दोनों देशों के बीच कार्गो परिवहन को सक्षम बनाता है।
  • राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम 2016 के तहत पूर्वोत्तर क्षेत्र की 20 नदियों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया गया है।
  • ब्रह्मपुत्र (NW-2), बराक (NW-16), धानसिरी (NW-31) और कोपिली (NW-57) पूर्वोत्तर के प्रमुख विकसित हो रहे जलमार्ग हैं।

इन परियोजनाओं के माध्यम से सरकार पूर्वोत्तर क्षेत्र की आर्थिक क्षमता को अंतर्देशीय जल परिवहन के जरिए विकसित करना चाहती है। मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने और टर्मिनल अवसंरचना को मजबूत करने से ब्रह्मपुत्र नदी को एक टिकाऊ आर्थिक गलियारे के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है। यह पहल माल ढुलाई की लागत कम करने, क्षेत्रीय एकीकरण बढ़ाने और भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Originally written on March 4, 2026 and last modified on March 4, 2026.

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