ब्रह्मपुत्र के नीचे बनेगा भारत का पहला रेल-सह-सड़क अंडरवाटर टनल

ब्रह्मपुत्र के नीचे बनेगा भारत का पहला रेल-सह-सड़क अंडरवाटर टनल

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे भारत के पहले रेल-सह-सड़क अंडरवाटर टनल परियोजना को मंजूरी दे दी है। लगभग 33.7 किलोमीटर लंबे इस ग्रीनफील्ड कॉरिडोर की अनुमानित लागत 18,662 करोड़ रुपये है। यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग-15 के गोहपुर को राष्ट्रीय राजमार्ग-715 के नुमालीगढ़ से जोड़ेगी। इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मोड के तहत क्रियान्वित होने वाली यह परियोजना पूर्वोत्तर भारत में संपर्क और परिवहन ढांचे को नई दिशा देगी।

परियोजना की संरचना और प्रमुख विशेषताएँ

इस कॉरिडोर का मुख्य आकर्षण 15.79 किलोमीटर लंबी दोहरी ट्यूब (ट्विन-ट्यूब) सुरंग होगी, जो ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे से गुजरेगी। एक ट्यूब में रेल लाइन का प्रावधान होगा, जबकि दूसरी ट्यूब चार लेन वाले नियंत्रित प्रवेश राजमार्ग के रूप में कार्य करेगी। इसके अतिरिक्त 1.26 किलोमीटर का सड़क ‘कट-एंड-कवर’ खंड और 4 किलोमीटर का रेल ‘कट-एंड-कवर’ हिस्सा भी शामिल है।

यह भारत की पहली अंडरवाटर रेल-सह-सड़क सुरंग होगी और वैश्विक स्तर पर इस प्रकार की दूसरी संरचना मानी जा रही है। वर्तमान में गोहपुर से नुमालीगढ़ तक की दूरी कालीाभोमरा पुल मार्ग से लगभग 240 किलोमीटर है, जिसे तय करने में करीब छह घंटे लगते हैं। नई सुरंग के माध्यम से यात्रा समय और दूरी दोनों में उल्लेखनीय कमी आएगी।

मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को बढ़ावा

यह परियोजना दो प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों—एनएच-15 और एनएच-715—को जोड़ती है तथा रेल नेटवर्क के दो खंडों को भी एकीकृत करती है। गोहपुर की ओर रंगिया–मुकोंगसेलेक रेल लाइन और नुमालीगढ़ के निकट फुर्केटिंग–मरियानी लूप लाइन इससे जुड़ेंगी।

कॉरिडोर 11 आर्थिक नोड, तीन सामाजिक नोड, दो पर्यटन नोड और आठ लॉजिस्टिक नोड को आपस में जोड़ेगा। इसके माध्यम से चार प्रमुख रेलवे स्टेशनों, दो हवाई अड्डों और दो अंतर्देशीय जलमार्ग टर्मिनलों तक बेहतर पहुंच संभव होगी। इससे माल परिवहन सुगम होगा और लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी, जिससे असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और आसपास के राज्यों को लाभ मिलेगा।

सामरिक और आर्थिक महत्व

सरकार ने इस परियोजना को पूर्वोत्तर क्षेत्र में सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया है। यह संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र में सैनिकों और आवश्यक वस्तुओं की तेज आवाजाही सुनिश्चित करेगी। साथ ही व्यापार विस्तार, औद्योगिक विकास और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।

ग्रीनफील्ड परियोजना होने के कारण इसे पूरी तरह नए सिरे से विकसित किया जा रहा है, जिससे आधुनिक तकनीक और सुरक्षा मानकों का समावेश सुनिश्चित होगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ब्रह्मपुत्र एशिया की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय नदियों में से एक है, जो तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नाम से उत्पन्न होती है।
  • ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) मॉडल में संपूर्ण कार्यान्वयन की जिम्मेदारी एक ही ठेकेदार की होती है।
  • ग्रीनफील्ड परियोजना का अर्थ है नई आधारभूत संरचना का शून्य से निर्माण।
  • मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी सड़क, रेल और जलमार्ग के समन्वित उपयोग को दर्शाती है।

इस परियोजना से लगभग 80 लाख मानव-दिवस के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है। यह नुमालीगढ़, तेजपुर, गोहपुर, डिब्रूगढ़ और ईटानगर जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ते हुए काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच को भी बेहतर बनाएगी। ब्रह्मपुत्र के नीचे बनने वाली यह ऐतिहासिक सुरंग पूर्वोत्तर भारत की परिवहन दक्षता को नया आयाम देगी और दीर्घकालिक क्षेत्रीय विकास का आधार बनेगी।

Originally written on February 16, 2026 and last modified on February 16, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *