बेंगलुरु में वैज्ञानिकों ने विकसित किया Disobind टूल: रोग अनुसंधान और औषधि विकास में नई क्रांति

बेंगलुरु में वैज्ञानिकों ने विकसित किया Disobind टूल: रोग अनुसंधान और औषधि विकास में नई क्रांति

बेंगलुरु स्थित टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान (TIFR) के अधीन नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज़ (NCBS) के वैज्ञानिकों ने एक नवीन डीप-लर्निंग टूल ‘Disobind’ विकसित किया है, जो इंट्रिंसिकली डिसऑर्डर्ड प्रोटीन (IDPs) की बाइंडिंग प्रवृत्तियों की भविष्यवाणी कर सकता है। यह उपलब्धि आणविक जीवविज्ञान की एक जटिल समस्या को हल करने की दिशा में एक बड़ी सफलता है और इसके माध्यम से रोग-निदान और दवा-विकास में क्रांतिकारी बदलाव की संभावना बन रही है।

इंट्रिंसिकली डिसऑर्डर्ड प्रोटीन का महत्व

अधिकांश प्रोटीन जहाँ एक स्थिर त्रि-आयामी संरचना (3D structure) में फोल्ड होते हैं, वहीं इंट्रिंसिकली डिसऑर्डर्ड प्रोटीन (IDPs) में यह स्थिरता नहीं होती। ये लचीले प्रोटीन कोशिकीय जीवन की जटिल प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जैसे:

  • सिग्नलिंग नेटवर्क का नियंत्रण
  • जीन अभिव्यक्ति का नियमन
  • प्रोटीन फोल्डिंग और गुणवत्ता नियंत्रण
  • सेलुलर कंडेन्सेट्स (condensates) का निर्माण

हालाँकि इनकी लचीलापन बायोलॉजिकल दृष्टि से फायदेमंद है, लेकिन पारंपरिक संरचनात्मक तकनीकों से इनका अध्ययन करना अत्यंत कठिन रहा है।

Disobind: डीप लर्निंग आधारित भविष्यवाणी उपकरण

NCBS की टीम द्वारा विकसित Disobind एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित टूल है जो प्रोटीन अनुक्रमों (sequences) का विश्लेषण करके यह पूर्वानुमान लगाता है कि किसी IDP का कौन-सा भाग किस बाइंडिंग पार्टनर के साथ अंतःक्रिया करेगा। यह टूल protein language models का उपयोग करता है, जो लाखों ज्ञात प्रोटीन अनुक्रमों पर प्रशिक्षित AI मॉडल होते हैं। Disobind की विशेषता यह है कि:

  • इसे प्रोटीन की संरचना या अनुक्रम संरेखण (sequence alignment) की पूर्व जानकारी की आवश्यकता नहीं होती।
  • यह बाइंडिंग पार्टनर की भूमिका को स्पष्ट रूप से शामिल करता है, जो IDP अंतःक्रियाओं के लिए अत्यंत आवश्यक है।

प्रदर्शन और तुलनात्मक विश्लेषण

कार्तिक मजीला के नेतृत्व में रिसर्च टीम ने Disobind को AlphaFold-Multimer और AlphaFold3 जैसे उन्नत टूल्स के साथ तुलना करते हुए टेस्ट किया। Disobind ने विशेषकर उन प्रोटीन पेयर पर बेहतर सटीकता दिखाई, जो पूर्व में इन टूल्स से नहीं देखे गए थे। जब इसे AlphaFold-Multimer के साथ संयोजन में उपयोग किया गया, तो इसकी भविष्यवाणी क्षमता और बेहतर हो गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि Disobind संरचना-आधारित विधियों का पूरक बन सकता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • इंट्रिंसिकली डिसऑर्डर्ड प्रोटीन (IDPs) में स्थिर 3D संरचना नहीं होती है।
  • Protein language models ऐसे AI सिस्टम होते हैं जो बड़े प्रोटीन अनुक्रम डेटासेट पर प्रशिक्षित होते हैं।
  • NCBS, TIFR के अधीन एक प्रमुख जीवन विज्ञान अनुसंधान संस्थान है।
  • AlphaFold टूल्स प्रोटीन संरचना की भविष्यवाणी में प्रयुक्त होते हैं।

रोग और औषधि अनुसंधान में संभावनाएँ

NCBS की Shruthi Viswanath के अनुसार, Disobind से उन प्रोटीन अंतःक्रिया क्षेत्रों की पहचान की जा सकती है जो रोगों से जुड़े होते हैं, जिससे उपचार के लिए नए लक्ष्य बिंदु खोजे जा सकते हैं। इस टूल को इम्यून सिग्नलिंग, कैंसर और न्यूरोडीजेनेरेशन जैसी बीमारियों से संबंधित प्रणालियों में सफलतापूर्वक आज़माया गया है।

सबसे अहम बात यह है कि Disobind को ओपन-सोर्स सॉफ़्टवेयर के रूप में जारी किया गया है, जिससे यह विश्वभर के वैज्ञानिकों के लिए निःशुल्क उपलब्ध है।

निष्कर्ष

Disobind का विकास केवल तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि बायोलॉजिकल विज्ञान में एक नई समझ और संभावनाओं का द्वार है। यह टूल उन जटिल प्रोटीनों की व्याख्या करने में मदद करेगा जिन्हें पहले अपारदर्शी माना जाता था, और इसके माध्यम से दवा विकास और रोग निदान में नए रास्ते खुल सकते हैं। भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान की यह उपलब्धि वैश्विक स्तर पर देश की नवाचार क्षमता को सशक्त करती है।

Originally written on January 20, 2026 and last modified on January 20, 2026.

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