बुरा चापोरी के पास नया आरक्षित वन: असम में जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा

बुरा चापोरी के पास नया आरक्षित वन: असम में जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा

असम सरकार ने सोनितपुर जिले में बुरा चापोरी वन्यजीव अभयारण्य के पास एक नए आरक्षित वन के निर्माण का प्रस्ताव रखा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य आवास (हैबिटेट) की निरंतरता को बढ़ाना और ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे स्थित इस महत्वपूर्ण पारिस्थितिक क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करना है। यह कदम जैव विविधता संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

स्थान और पारिस्थितिक महत्व

बुरा चापोरी वन्यजीव अभयारण्य असम में ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी तट पर स्थित है। यह लाओखोवा–बुरा चापोरी पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है, जो एक महत्वपूर्ण बाढ़ मैदान क्षेत्र है। यह अभयारण्य पूर्व में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और पश्चिम में ओरांग राष्ट्रीय उद्यान के बीच स्थित है, जबकि दक्षिण में लाओखोवा वन्यजीव अभयारण्य है। इस प्रकार यह क्षेत्र वन्यजीवों के लिए एक महत्वपूर्ण गलियारा (कॉरिडोर) बनाता है।

जलवायु और वनस्पति

यह क्षेत्र उप-उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु के अंतर्गत आता है, जहां भारी वर्षा और मौसमी बाढ़ सामान्य हैं। यहां की वनस्पति में जलोढ़ घासभूमि, नदी किनारे के वन और अर्ध-सदाबहार वन शामिल हैं। इसके अलावा, यहां आर्द्रभूमि और नदी की धाराएं भी पाई जाती हैं, जो विविध प्रजातियों के लिए अनुकूल आवास प्रदान करती हैं। घासभूमि में होलोंग, मेकाई, धूना, उदियाम, नाहर और समकोठल जैसे महत्वपूर्ण पौधे पाए जाते हैं।

समृद्ध वन्यजीव विविधता

बुरा चापोरी अभयारण्य अपनी समृद्ध वन्यजीव विविधता के लिए जाना जाता है। यहां एक सींग वाले गैंडे, बाघ, तेंदुआ, जंगली भैंस, हॉग डियर, जंगली सूअर और हाथी जैसे प्रमुख जीव पाए जाते हैं। यह क्षेत्र पक्षियों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जहां संकटग्रस्त बंगाल फ्लोरिकन और ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क के साथ-साथ प्रवासी पक्षी जैसे मल्लार्ड, टील और व्हिस्लिंग डक भी देखे जाते हैं।

प्रस्तावित आरक्षित वन का महत्व

नया आरक्षित वन इस क्षेत्र में आवासीय निरंतरता को बढ़ाने और पारिस्थितिक तंत्र में होने वाले विखंडन को कम करने में सहायक होगा। इससे विभिन्न संरक्षित क्षेत्रों के बीच वन्यजीवों की आवाजाही सुगम होगी और संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण को बल मिलेगा। ब्रह्मपुत्र के बाढ़ मैदान क्षेत्र में बढ़ते मानवीय दबाव और पर्यावरणीय परिवर्तनों के बीच यह कदम अत्यंत आवश्यक है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • बुरा चापोरी वन्यजीव अभयारण्य असम में ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी तट पर स्थित है।
  • यह लाओखोवा–बुरा चापोरी पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है।
  • यह काजीरंगा और ओरांग राष्ट्रीय उद्यानों के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण वन्यजीव कॉरिडोर है।
  • यहां जलोढ़ घासभूमि, आर्द्रभूमि और नदी किनारे के वन पाए जाते हैं।

अंततः, यह प्रस्तावित आरक्षित वन असम की समृद्ध जैव विविधता को संरक्षित करने और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित एवं निरंतर आवास सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करेगा, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने में भी मदद करेगा।

Originally written on March 25, 2026 and last modified on March 25, 2026.

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