बिहार नक्सलवाद मुक्त घोषित, अंतिम माओवादी के आत्मसमर्पण से ऐतिहासिक मोड़
बिहार को आधिकारिक रूप से नक्सल गतिविधियों से मुक्त घोषित कर दिया गया है। मुंगेर जिले में अंतिम सशस्त्र माओवादी सुरेश कोड़ा के आत्मसमर्पण के साथ राज्य के लंबे संघर्ष का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पहले प्रभावित रहे सभी 23 जिलों में अब कोई भी संगठित सशस्त्र नक्सली दस्ता सक्रिय नहीं है। मुंगेर रेंज के उप महानिरीक्षक राकेश कुमार ने पुष्टि की कि राज्य में सशस्त्र उपस्थिति पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।
सशस्त्र माओवादी गतिविधियों का अंत
सुरेश कोड़ा का आत्मसमर्पण बिहार में सक्रिय सशस्त्र माओवादी अभियानों के अंत का प्रतीक माना जा रहा है। मुंगेर के जिलाधिकारी निखिल धनराज निपाणिकर के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादी को केंद्र सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के अंतर्गत लाभ प्रदान किए जाएंगे।
इस नीति के तहत आर्थिक सहायता, व्यावसायिक प्रशिक्षण और मुख्यधारा में पुनर्वास के लिए सहायता दी जाती है। आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादी के परिवारजनों ने भी राहत व्यक्त की, जिससे यह स्पष्ट होता है कि संघर्ष से शांति की ओर यह संक्रमण सामाजिक स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।
बिहार में नक्सलवाद का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
बिहार में नक्सलवाद का प्रभाव 1970 के दशक से देखा गया, जब राज्य के मध्यवर्ती जिलों में उग्रवादी गतिविधियां बढ़ीं। वर्ष 2012 तक राज्य के 23 जिलों को आधिकारिक रूप से वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित घोषित किया गया था।
केंद्र और राज्य एजेंसियों द्वारा संचालित सतत सुरक्षा अभियानों, विकास कार्यक्रमों और समन्वित रणनीति के परिणामस्वरूप हिंसा की घटनाओं में क्रमिक कमी आई। सशस्त्र नेटवर्क को ध्वस्त करने और स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं को लागू करने से हालात में सुधार हुआ।
घटनाओं और गिरफ्तारियों में कमी
अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2025 में बिहार में एक भी नक्सली घटना दर्ज नहीं की गई। उसी वर्ष 220 नक्सलियों की गिरफ्तारी हुई, जो खुफिया समन्वय और सख्त प्रवर्तन प्रयासों को दर्शाती है। यह आंकड़े राज्य की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में आए सुधार को रेखांकित करते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- नक्सलवाद वामपंथी उग्रवाद का एक रूप है, जो माओवादी विचारधारा से प्रेरित है।
- इस आंदोलन की शुरुआत 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी विद्रोह से हुई थी।
- गृह मंत्रालय वामपंथी उग्रवाद की निगरानी एक विशेष प्रभाग के माध्यम से करता है।
- आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीतियां उग्रवादियों को मुख्यधारा में पुनः शामिल करने के उद्देश्य से बनाई जाती हैं।
बिहार का नक्सलवाद मुक्त घोषित होना राज्य की आंतरिक सुरक्षा और विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे पूर्व प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने का मार्ग प्रशस्त होगा। हालांकि, प्रशासन ने सतर्कता बनाए रखने पर जोर दिया है, ताकि शांति और स्थिरता दीर्घकाल तक कायम रह सके।