बिहार दिवस 2026: गौरव, संस्कृति और विकास का भव्य उत्सव
बिहार ने 22 से 24 मार्च तक अपने 114वें स्थापना दिवस को भव्य रूप से मनाया। यह अवसर 1912 में बंगाल प्रेसीडेंसी से अलग होकर बिहार राज्य के गठन की याद में हर वर्ष मनाया जाता है। इस बार मुख्य कार्यक्रम पटना के गांधी मैदान में आयोजित किए गए, जबकि समानांतर आयोजन एस. के. मेमोरियल हॉल और रवींद्र भवन में भी हुए। “उन्नत बिहार, उज्ज्वल बिहार” थीम के साथ इस वर्ष का उत्सव राज्य के विकास और समावेशी प्रगति की दिशा को दर्शाता है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम और कलात्मक प्रस्तुतियां
बिहार दिवस के इस आयोजन में सांस्कृतिक विविधता की झलक साफ दिखाई दी। प्रसिद्ध गायक सोना मोहपात्रा, शान और पापोन ने अपने संगीत से माहौल को जीवंत बनाया। इसके साथ ही ध्रुपद और विभिन्न घरानों की शास्त्रीय प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। लोक संस्कृति को बढ़ावा देते हुए भिखारी ठाकुर के लोक नाटक, पारंपरिक नृत्य और हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। दर्शकों के लिए लेजर लाइट शो ने उत्सव को और भी आकर्षक बना दिया।
प्रदर्शनी और जन-जागरूकता अभियान
इस आयोजन में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा जंगल-थीम पर आधारित विशेष प्रदर्शनी लगाई गई। इसमें पहाड़ों के मॉडल और विभिन्न जानकारियों के माध्यम से जल-जीवन-हरियाली मिशन, वायु प्रदूषण नियंत्रण और प्लास्टिक प्रतिबंध जैसे विषयों पर जागरूकता फैलायी गई। इसके साथ ही नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और सतत जीवनशैली का संदेश दिया गया।
फूड फेस्ट, पुस्तक मेला और विकास पवेलियन
बिहार दिवस के दौरान आयोजित फूड फेस्ट में राज्य के पारंपरिक व्यंजनों की विविधता देखने को मिली। साथ ही पुस्तक मेले और विभिन्न विकास पवेलियनों में सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया। इन स्टॉल्स के माध्यम से लोगों को राज्य में चल रही कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी दी गई, जिससे नागरिकों की भागीदारी भी बढ़ी।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियां
कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए प्रशासन द्वारा व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई। कुल 94 मजिस्ट्रेट तैनात किए गए और 128 सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी की गई। 24 घंटे का कंट्रोल रूम, मेडिकल टीम और अग्निशमन सेवाएं भी उपलब्ध कराई गईं। भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष प्रवेश और पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित की गई, जिससे आयोजन सुरक्षित और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सका।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- बिहार का गठन 22 मार्च 1912 को बंगाल प्रेसीडेंसी से अलग होकर हुआ था।
- जल-जीवन-हरियाली मिशन जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा पर केंद्रित है।
- भिखारी ठाकुर को “भोजपुरी का शेक्सपियर” कहा जाता है।
- ध्रुपद हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की सबसे प्राचीन शैलियों में से एक है।
बिहार दिवस 2026 न केवल राज्य के गौरवशाली इतिहास का उत्सव है, बल्कि यह आधुनिक विकास, सांस्कृतिक धरोहर और जनभागीदारी का संगम भी प्रस्तुत करता है। यह आयोजन बिहार की प्रगति और उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम है।