बायोफाख 2026 में मेघालय की वैश्विक ऑर्गेनिक पहचान
मेघालय ने जर्मनी के नूर्नबर्ग में आयोजित बायोफाख 2026 में पहली बार भाग लेकर स्वयं को पूर्वोत्तर भारत के एक सशक्त, संस्थागत समर्थन प्राप्त ऑर्गेनिक स्रोत के रूप में प्रस्तुत किया। यह वैश्विक व्यापार मेला जैविक खाद्य और कृषि के क्षेत्र में दुनिया का प्रमुख मंच माना जाता है, जिसमें 90 से अधिक देशों ने भाग लिया। इस वर्ष भारत को ‘कंट्री ऑफ द ईयर’ का दर्जा भी प्राप्त हुआ। मेघालय ने इस अवसर का उपयोग अपने समेकित ऑर्गेनिक इकोसिस्टम—प्रमाणीकरण प्रणाली, किसान समूहों का संगठन, ब्रांडिंग और निर्यातोन्मुख मूल्य शृंखला—को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने के लिए किया।
राज्य प्रतिनिधिमंडल और रणनीतिक दृष्टिकोण
मेघालय के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राज्य सरकार के आयुक्त एवं सचिव तथा मेघालय नेचुरल एंड ऑर्गेनिक फार्मिंग सोसाइटी फॉर लाइवलीहुड एंड इनोवेशन इन एग्रीकल्चर (मेग्नोलिया) के अध्यक्ष विजय कुमार डी ने किया। उन्होंने राज्य की ऑर्गेनिक विकास रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह मॉडल सामुदायिक भागीदारी, पारिस्थितिक संतुलन और संस्थागत समर्थन पर आधारित है।
राज्य सरकार ने किसानों को वैश्विक जैविक मानकों, ट्रेसबिलिटी आवश्यकताओं और टिकाऊ उत्पादन मानकों के अनुरूप तैयार करने के लिए नीति समर्थन और प्रमाणन ढांचे को मजबूत किया है। इससे मेघालय के उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बन रहे हैं। किसान उत्पादक समूहों और सहकारी समितियों के माध्यम से उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग और निर्यात-तैयारी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
किसानों की भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय संवाद
मेघालय की भागीदारी की एक विशेषता यह रही कि इसमें किसान प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया। जैंतिया हिल्स की लाकाडोंग हल्दी उत्पादक ट्रिनिटी सायो और गारो हिल्स के काली मिर्च किसान रिंगनांग कोंगकल संगमा ने अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और प्रमाणन एजेंसियों से सीधे संवाद किया।
इस दौरान जैविक व्यापारियों, विकास संस्थानों और खरीद साझेदारों के साथ दीर्घकालिक निर्यात सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। किसानों ने माना कि वैश्विक गुणवत्ता मानकों और मूल्य संवर्धन तकनीकों की समझ से उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और मजबूत होगी। यह अनुभव स्थानीय उत्पादन को अंतरराष्ट्रीय मांग के अनुरूप ढालने में सहायक सिद्ध होगा।
स्टेट ऑर्गेनिक मिशन 2028 की रूपरेखा
मेघालय में जैविक खेती के विस्तार को ‘स्टेट ऑर्गेनिक मिशन 2028’ के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। इस मिशन का लक्ष्य एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र को प्रमाणित जैविक खेती के अंतर्गत लाना है। इसके लिए संस्थागत सुदृढ़ीकरण, किसानों का प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने की रणनीति पर कार्य किया जा रहा है।
राज्य पहले ही लाकाडोंग हल्दी, अनानास, अदरक, खासी मंदारिन और काली मिर्च जैसे प्रीमियम उत्पादों के लिए निर्यात बाजार स्थापित कर चुका है। इन उत्पादों की उच्च गुणवत्ता और विशिष्ट स्वाद ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान बनाई है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
* बायोफाख विश्व का प्रमुख जैविक व्यापार मेला है, जो प्रतिवर्ष जर्मनी में आयोजित होता है।
* मेघालय पूर्वोत्तर भारत का राज्य है, जो उच्च जैव विविधता और पारंपरिक कृषि पद्धतियों के लिए जाना जाता है।
* जैविक प्रमाणन वैश्विक स्तर पर गुणवत्ता, स्थिरता और ट्रेसबिलिटी मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करता है।
* स्टेट ऑर्गेनिक मिशन 2028 का लक्ष्य एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र को प्रमाणित जैविक खेती के अंतर्गत लाना है।
बायोफाख 2026 में अपनी पहली भागीदारी के माध्यम से मेघालय ने अंतरराष्ट्रीय जैविक बाजार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। किसान-केंद्रित मॉडल, मजबूत संस्थागत ढांचा और निर्यात-उन्मुख रणनीति के सहारे राज्य स्वयं को उच्च गुणवत्ता वाले जैविक उत्पादों के विश्वसनीय वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है।