बाकू में संपन्न विश्व दूरसंचार विकास सम्मेलन 2025 में भारत की अग्रणी भूमिका
विश्व दूरसंचार विकास सम्मेलन (World Telecommunication Development Conference – WTDC) 2025 का समापन 28 नवंबर को बाकू में हुआ। हर चार वर्ष में आयोजित होने वाला यह वैश्विक सम्मेलन दूरसंचार विकास की रणनीतिक रूपरेखा तय करता है। इस वर्ष इसमें विश्वभर से 2,300 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें मंत्री, नीति-निर्माता और उद्योग जगत के अग्रणी शामिल थे।
भारत की रणनीतिक भूमिका और उच्च-स्तरीय भागीदारी
भारत ने इस सम्मेलन में संचार और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री के नेतृत्व में भाग लिया। मंत्री ने “सार्वभौमिक कनेक्टिविटी और सतत डिजिटल परिवर्तन” पर भारत की दृष्टि प्रस्तुत की। भारत को सम्मेलन का उपाध्यक्ष (Vice-Chair) चुना गया और उसने कई समन्वय एवं नवाचार समूहों में प्रमुख भूमिका निभाई। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने द्विपक्षीय बैठकों और मंत्री-स्तरीय संवादों के माध्यम से वैश्विक डिजिटल साझेदारी को सशक्त किया।
डिजिटल नवाचार और समावेशन को बढ़ावा
भारत ने उन प्रमुख प्रस्तावों में सक्रिय योगदान दिया जिनका उद्देश्य डिजिटल समावेशन का विस्तार करना था। प्रस्ताव संख्या 85 के अंतर्गत “स्मार्ट सस्टेनेबल सिटी” अवधारणा को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने की दिशा तय की गई। वहीं, प्रस्ताव 89 और 90 के माध्यम से नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने, स्थानीय नवोन्मेषकों को प्रोत्साहन देने और सार्वजनिक-निजी सहयोग के माध्यम से सार्थक कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया।
आईसीटी सुरक्षा और नियामक ढांचे को सुदृढ़ करना
भारत ने साइबर सुरक्षा से संबंधित प्रस्तावों में सुधार का नेतृत्व किया, जिनमें सेवा दुरुपयोग, मोबाइल डिवाइस छेड़छाड़ और लघु-मध्यम उद्यमों (SMEs) की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके अलावा नीति और नियामक ढांचों पर भी चर्चा हुई, जिसमें अगली पीढ़ी की तकनीकों के लिए लचीले नियम, विकासशील देशों हेतु स्पेक्ट्रम प्रबंधन उपकरण, और विद्युत चुंबकीय क्षेत्र (EMF) से संबंधित जन-जागरूकता कार्यक्रमों पर प्रस्ताव 09 और 62 के अंतर्गत विचार किया गया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- WTDC-25 का आयोजन बाकू में हुआ और इसका समापन 28 नवंबर 2025 को हुआ।
- सम्मेलन में 2,300 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
- भारत सम्मेलन का उपाध्यक्ष रहा और कई समन्वय समूहों का नेतृत्व किया।
- भारत ने नवाचार, साइबर सुरक्षा और 6G तैयारी से जुड़े प्रमुख प्रस्तावों में योगदान दिया।
- “स्मार्ट विलेज” और आपदा संचार तकनीक जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल रहे।
वैश्विक सहयोग और सतत विकास की दिशा में
भारत ने आपदा प्रबंधन, जलवायु-अनुकूल आईसीटी प्रथाओं और डिजिटल समावेशन से जुड़े प्रस्तावों को आकार देने में केंद्रीय भूमिका निभाई। इन पहलों ने प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, परिपत्र अर्थव्यवस्था आधारित आईसीटी रणनीतियों और वरिष्ठ नागरिकों एवं कमजोर वर्गों की डिजिटल पहुंच को सशक्त किया। अपने कूटनीतिक नेतृत्व, तकनीकी विशेषज्ञता और रणनीतिक योगदान के माध्यम से भारत ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि वह वैश्विक दूरसंचार विकास में अग्रणी भूमिका निभाने वाला राष्ट्र है।