बांग्लादेश में ‘जुलाई राष्ट्रीय चार्टर 2025’ को जनमत संग्रह में मिली मंजूरी

बांग्लादेश में ‘जुलाई राष्ट्रीय चार्टर 2025’ को जनमत संग्रह में मिली मंजूरी

बांग्लादेश में आम चुनावों के साथ आयोजित राष्ट्रीय जनमत संग्रह में लगभग 70 प्रतिशत मतदाताओं ने ‘जुलाई राष्ट्रीय चार्टर 2025’ को मंजूरी दे दी है। चुनाव आयोग के अनुसार कुल 60.26 प्रतिशत मतदान हुआ, जिसमें लगभग 4.8 करोड़ मत सुधारों के पक्ष में और 2.25 करोड़ मत विरोध में पड़े। यह जनमत संग्रह बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन की व्यापक चुनावी जीत के साथ संपन्न हुआ, जिससे तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त हुआ।

यह चार्टर बांग्लादेश की शासन व्यवस्था में व्यापक संवैधानिक और संस्थागत सुधारों का प्रस्ताव रखता है, जिसका उद्देश्य राजनीतिक स्थिरता और लोकतांत्रिक संतुलन को मजबूत करना है।

जुलाई चार्टर का मसौदा जुलाई 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले जनआंदोलन के बाद तैयार किया गया, जिसने तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को पद से हटाने में भूमिका निभाई। यह बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में तीसरा प्रमुख सुधार चार्टर माना जा रहा है।

चार्टर में कुल 84 सुधार बिंदु शामिल हैं। इनमें से 47 के लिए संवैधानिक संशोधन आवश्यक होंगे, जबकि 37 सुधारों को विधायी या कार्यकारी आदेशों के माध्यम से लागू किया जा सकता है। प्रस्तावित परिवर्तनों को लागू करने के लिए एक संवैधानिक सुधार परिषद गठित की जाएगी, जिसे 270 कार्य दिवसों के भीतर कार्य पूरा करना होगा।

चार्टर का मुख्य उद्देश्य कार्यपालिका की अत्यधिक शक्ति-संकेन्द्रण को रोकना और अधिनायकवादी प्रवृत्तियों की पुनरावृत्ति से बचना है। इसके तहत प्रधानमंत्री के लिए सख्त कार्यकाल सीमा निर्धारित करने का प्रस्ताव है, ताकि लंबे समय तक सत्ता में बने रहने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाया जा सके।

साथ ही, एक द्विसदनीय संसद की स्थापना का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें 100 सीटों वाला उच्च सदन बनाया जाएगा। इस उच्च सदन की सीटें राजनीतिक दलों के राष्ट्रीय मत प्रतिशत के आधार पर आनुपातिक रूप से आवंटित की जाएंगी, जिससे व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।

चार्टर में राष्ट्रपति के अधिकारों को भी सुदृढ़ करने का प्रस्ताव है, जिससे प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रभुत्व को संतुलित किया जा सके।

चार्टर न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता को मजबूत करने पर जोर देता है, ताकि उन्हें राजनीतिक हस्तक्षेप से सुरक्षित रखा जा सके। इसमें विपक्ष के नेताओं को प्रमुख संसदीय समितियों की अध्यक्षता और उपाध्यक्ष पद पर औपचारिक भूमिका देने का प्रस्ताव है।

इसके अतिरिक्त, संसद में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने और 2024 के आंदोलन में शामिल प्रतिभागियों, जिन्हें “जुलाई फाइटर्स” कहा गया है, को कानूनी संरक्षण देने का भी प्रावधान किया गया है।

  • बांग्लादेश वर्तमान में एकसदनीय संसदीय प्रणाली का पालन करता है।
  • संवैधानिक संशोधन के लिए संसद की स्वीकृति आवश्यक होती है।
  • द्विसदनीय विधायिका में दो सदन होते हैं—आमतौर पर निचला और उच्च सदन।
  • जनमत संग्रह प्रत्यक्ष लोकतंत्र का माध्यम है, जिसमें मतदाता किसी विशेष प्रस्ताव पर निर्णय देते हैं।

जुलाई राष्ट्रीय चार्टर 2025 की स्वीकृति राजनीतिक उथल-पुथल के बाद व्यापक सुधारों के प्रति जन समर्थन को दर्शाती है। यदि प्रस्तावित परिवर्तन प्रभावी ढंग से लागू होते हैं, तो वे बांग्लादेश की संवैधानिक संरचना को पुनर्परिभाषित कर सकते हैं और कार्यपालिका एवं विधायिका के बीच संतुलन स्थापित कर लोकतांत्रिक जवाबदेही को सुदृढ़ बना सकते हैं।

Originally written on February 14, 2026 and last modified on February 14, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *