बांग्लादेश में गहराया राजनीतिक संकट: शेख हसीना को मानवता के विरुद्ध अपराधों में मृत्युदंड

बांग्लादेश में गहराया राजनीतिक संकट: शेख हसीना को मानवता के विरुद्ध अपराधों में मृत्युदंड

बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता एक नए चरम पर पहुंच गई है, जब ढाका की अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के विरुद्ध अपराधों के आरोप में मृत्युदंड सुनाया। यह फैसला पिछले वर्ष हुए छात्र-नेतृत्व वाले हिंसक प्रदर्शनों से जुड़ा है, जिनमें भारी जनहानि हुई थी। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दिए गए इस निर्णय ने देश की राजनीति में तीव्र उथल-पुथल मचा दी है, खासकर तब जब आगामी वर्ष की शुरुआत में राष्ट्रीय चुनाव प्रस्तावित हैं।

न्यायाधिकरण ने शेख हसीना को माना हिंसक दमन की जिम्मेदार

अदालत ने माना कि अगस्त 2024 में उनकी सरकार को गिराने वाले प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की घातक कार्रवाई के पीछे हसीना की भूमिका थी। यह भी कहा गया कि उन्होंने हिंसा रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यह कार्यवाही उनकी अनुपस्थिति में हुई, क्योंकि इस्तीफे के बाद से वह भारत में निर्वासन जीवन बिता रही हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के अनुसार, उस विद्रोह में लगभग 1,400 लोगों की मौत हुई, जिनमें अधिकांश छात्र और प्रदर्शनकारी थे। अभियोजन पक्ष ने हसीना को इस हिंसा की “मुख्य योजनाकार” बताया।

सह-अभियुक्तों को भी सज़ा और संपत्ति जब्त करने के आदेश

न्यायाधिकरण ने पूर्व गृह मंत्री असदुज्ज़मान खान कमाल को भी मृत्युदंड और पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून को कारावास की सज़ा सुनाई। अदालत ने शेख हसीना और कमाल दोनों की संपत्तियों को जब्त करने का आदेश दिया है। फैसले में कहा गया कि सरकार के शीर्ष नेतृत्व की नीतिगत चूक और जानबूझकर निष्क्रियता ने अनेक प्रदर्शन स्थलों पर नरसंहार जैसी स्थिति पैदा की।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और ‘कंगारू कोर्ट’ के आरोप

शेख हसीना ने इस निर्णय को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया और कहा कि यह मुकदमा “निर्वाचित सरकार को समाप्त करने की साजिश” है। उन्होंने इस फैसले को “कंगारू कोर्ट” का परिणाम बताते हुए अंतरराष्ट्रीय अदालत में चुनौती देने की घोषणा की। इस फैसले के बाद देशभर में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है, जबकि कई शहरों में विरोध प्रदर्शन और छिटपुट धमाकों से तनाव का माहौल बन गया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • शेख हसीना को 2024 के छात्र आंदोलनों से जुड़े मानवता-विरोधी अपराधों में मृत्युदंड सुनाया गया।
  • संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इन प्रदर्शनों में लगभग 1,400 लोगों की मौत हुई।
  • पूर्व गृह मंत्री असदुज्ज़मान खान कमाल को भी मृत्युदंड और संपत्ति जब्ती का आदेश मिला।
  • शेख हसीना भारत में निर्वासन में रह रही हैं और उन्हें अनुपस्थित रहते हुए दोषी ठहराया गया।

कूटनीतिक दबाव और भविष्य की राजनीतिक दिशा

इस फैसले ने भारत पर भी कूटनीतिक दबाव बढ़ा दिया है, क्योंकि ढाका प्रशासन शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर सकता है। हालांकि क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए ऐसा कदम फिलहाल असंभव प्रतीत होता है। बांग्लादेश में विपक्षी दलों ने इस फैसले के समर्थन में रैलियाँ की हैं, जबकि अंतरिम सरकार ने हिंसा की आशंका के चलते देशभर में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए हैं।

Originally written on November 18, 2025 and last modified on November 18, 2025.

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