बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का निधन: दक्षिण एशियाई राजनीति के एक युग का अंत
बांग्लादेश ने मंगलवार को अपनी सबसे प्रभावशाली राजनेताओं में से एक खालिदा जिया को खो दिया। 80 वर्ष की आयु में उनका ढाका में निधन हो गया, जिससे देश की स्वतंत्रता-उत्तर राजनीति का एक निर्णायक अध्याय समाप्त हो गया। वे बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की चेयरपर्सन थीं और दशकों तक शेख हसीना की मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहीं।
लंबी बीमारी और अंतिम क्षण
खालिदा जिया की मृत्यु ढाका के एवरकेयर अस्पताल में हुई, जहां वे लंबे समय से गंभीर अवस्था में ICU में भर्ती थीं। वे हृदय रोग, गुर्दा और यकृत की समस्याओं, मधुमेह, सांस की बीमारी, गठिया और नेत्र संबंधी विकारों से जूझ रही थीं। उनके पास स्थायी पेसमेकर था और उन्हें पहले कार्डियक स्टेंट भी लगाया गया था। लंदन से इलाज के बाद मई में लौटने के बाद से उनकी हालत लगातार नाज़ुक बनी रही।
राजनीतिक सफर और सत्ता तक का उदय
1945 में जन्मी खालिदा जिया ने राजनीति में कदम उस समय रखा जब 1981 में उनके पति और तत्कालीन राष्ट्रपति जियाउर रहमान की हत्या कर दी गई। 1984 में उन्होंने BNP की बागडोर संभाली और जल्द ही एक दृढ़ विपक्षी नेता के रूप में उभरीं।
1991 में उन्होंने BNP को जीत दिलाई और बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। उन्होंने 1991–1996 और 2001–2006 तक दो बार प्रधानमंत्री पद संभाला। उनके कार्यकाल के दौरान बांग्लादेश में संसदीय लोकतंत्र और आर्थिक नीतियों का नया ढांचा तैयार हुआ।
देश–विदेश से शोक संदेश
अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने उनकी मृत्यु को राष्ट्रीय क्षति बताते हुए शोक व्यक्त किया। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक संदेश भेजा और 2015 में ढाका में हुई मुलाकात को याद करते हुए उनके भारत–बांग्लादेश संबंधों में योगदान की सराहना की।
उनकी मृत्यु ऐसे समय हुई है जब बांग्लादेश में 2026 की शुरुआत में चुनाव संभावित हैं और उनका बेटा तारीक रहमान लंबा निर्वासन खत्म कर हाल ही में लौटे हैं। वहीं प्रधानमंत्री शेख हसीना, 2024 की अशांति के बाद निर्वासन में हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- खालिदा जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं।
- उन्होंने 1984 से 2025 तक BNP का नेतृत्व किया।
- वे 1991–1996 और 2001–2006 में दो बार प्रधानमंत्री रहीं।
- उनका राजनीतिक करियर शेख हसीना के साथ तीन दशकों तक प्रतिस्पर्धात्मक शासन में रहा।
स्थायी राजनीतिक विरासत
खालिदा जिया का राजनीतिक जीवन बांग्लादेश के द्विदलीय लोकतांत्रिक ढांचे की पहचान बन गया। उन्होंने शीर्ष स्तर पर महिला नेतृत्व को सामान्य बनाया और लंबे समय तक BNP की वैचारिक पहचान बनी रहीं।
स्वास्थ्य समस्याओं और कानूनी चुनौतियों के बावजूद वे अपनी पार्टी और समर्थकों की प्रेरणा बनी रहीं। उनके निधन के साथ बांग्लादेश की राजनीति में नेतृत्व का एक बड़ा शून्य उत्पन्न हुआ है, खासकर ऐसे समय में जब देश एक और निर्णायक चुनावी दौर में प्रवेश कर रहा है।