बर्फ पर चलने की चुनौती: ज़ांस्कर नदी पर चादर ट्रेक की शुरुआत स्थगित, जलवायु परिवर्तन पर चिंता

बर्फ पर चलने की चुनौती: ज़ांस्कर नदी पर चादर ट्रेक की शुरुआत स्थगित, जलवायु परिवर्तन पर चिंता

लद्दाख की प्रतिष्ठित चादर ट्रेक को लेकर साहसिक पर्यटन प्रेमियों को इस बार निराशा का सामना करना पड़ा है। ज़ांस्कर नदी की सतह पर पर्याप्त रूप से बर्फ न जमने के कारण 10 जनवरी 2026 से शुरू होने वाली यह ट्रेक अस्थगित कर दी गई है। यह ट्रेक भारत की सबसे चुनौतीपूर्ण सर्दियों की ट्रेकिंग रूटों में गिनी जाती है, जो हर साल बड़ी संख्या में देश-विदेश के साहसिक पर्यटकों को आकर्षित करती है।

सुरक्षा कारणों से स्थगन

लेह के अतिरिक्त उपायुक्त गुलाम मोहम्मद के अनुसार, ज़ांस्कर नदी पर बर्फ की मोटाई कई अहम हिस्सों में सुरक्षित मानक से कम पाई गई। इसके चलते प्रशासन ने एक मौके पर निरीक्षण दल भेजा, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर नई तारीख तय की जाएगी।

संभावना है कि यदि मौसम ने साथ दिया तो 15 जनवरी के आसपास ट्रेक को अनुमति दी जा सकती है

बचाव और चिकित्सा व्यवस्था की मजबूती

बर्फ की अस्थिरता के जोखिम को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (NDRF) के अतिरिक्त जवानों को तैनात करने का निर्णय लिया है।

इसके अलावा, निरीक्षण दल ट्रेक मार्ग पर कैम्प साइट, चिकित्सा सहायता केंद्र, बचाव सुविधा और पुलिस बल की तैनाती के लिए स्थानों की पहचान कर रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ट्रेकर्स को किसी आपात स्थिति में शीघ्र सहायता मिल सके।

परिचालन चुनौतियाँ और जलवायु संकट

ऑल लद्दाख होटल एंड गेस्ट हाउस एसोसिएशन की अध्यक्ष रिगज़िन वांगमो लाचिक ने बताया कि इस बार ट्रेक में देरी का मुख्य कारण ज़ांस्कर नदी पर बर्फ का अधूरा जमाव है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सप्ताह के अंत तक ट्रेक शुरू हो सकती है।

ध्यान देने योग्य है कि पिछले वर्षों में भी यह ट्रेक बार-बार बाधित होती रही है:

  • 2024 में, सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा निमू–पदम–दारचा मार्ग के निर्माण कार्य के कारण ट्रेक रूट को छोटा करना पड़ा था।
  • वैज्ञानिक और स्थानीय विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय क्षेत्र में बर्फ जमने के पारंपरिक पैटर्न में गंभीर परिवर्तन आ रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • चादर ट्रेक लद्दाख की ज़ांस्कर नदी के जमी हुई सतह पर किया जाता है।
  • यह ट्रेक जनवरी–फरवरी की चरम सर्दियों में आयोजित होती है।
  • लद्दाख को ठंडा मरुस्थल (Cold Desert) माना जाता है, जहाँ जलवायु अत्यंत कठोर होती है।
  • जलवायु परिवर्तन हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी और नदियों के जमने के स्वरूप को प्रभावित कर रहा है।

प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद पर्यटन को बढ़ावा

Climate Change over Leh (Ladakh)” नामक शोध अध्ययन में बताया गया है कि क्षेत्र में तापमान वृद्धि और मौसमी वर्षा में गिरावट के कारण अब गंभीर सर्दी वाले दिनों की संख्या कम होती जा रही है, जिससे स्थिर बर्फ जमना मुश्किल हो रहा है।

इन चुनौतियों के बावजूद लद्दाख के उपराज्यपाल कवींद्र गुप्ता ने सर्दियों के पर्यटन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया है। सुरक्षा और मौसम संबंधी व्यवधानों के कारण लद्दाख में पर्यटन हाल के वर्षों में प्रभावित हुआ है, ऐसे में सर्दी में साहसिक पर्यटन गतिविधियों की बहाली प्रशासन के लिए प्रमुख प्राथमिकता बनी हुई है।

चादर ट्रेक की यह स्थिति न केवल साहसिक पर्यटकों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि यह हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु संकट के गहराते प्रभाव का स्पष्ट संकेत भी है।

Originally written on January 15, 2026 and last modified on January 15, 2026.

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