बजट 2026 में ₹80,000 करोड़ के विनिवेश और परिसंपत्ति मुद्रीकरण लक्ष्य की घोषणा: राजकोषीय मजबूती की दिशा में निर्णायक कदम
केंद्रीय बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026–27 (FY27) के लिए ₹80,000 करोड़ के विनिवेश और परिसंपत्ति मुद्रीकरण (Asset Monetisation) लक्ष्य की घोषणा की है। यह सरकार की गैर-कर राजस्व (non-tax revenue) को सशक्त करने की दिशा में एक नई गति और आशावाद को दर्शाता है, खासकर जब राजकोषीय समेकन (fiscal consolidation) एक प्राथमिक लक्ष्य बना हुआ है।
पूंजीगत प्राप्तियों में तीव्र वृद्धि
- यह राशि “मिश्रित पूंजी प्राप्तियाँ (Miscellaneous Capital Receipts)” के अंतर्गत बजट की गई है।
- FY27 के ₹80,000 करोड़ का लक्ष्य, FY26 के संशोधित अनुमान ₹34,000 करोड़ से कहीं अधिक है।
- FY25 में सरकार को वास्तव में केवल ₹20,214 करोड़ की प्राप्ति हुई थी, जिससे पता चलता है कि विनिवेश लक्ष्य हासिल करना लगातार चुनौतीपूर्ण रहा है।
विनिवेश और परिसंपत्ति मुद्रीकरण का स्वरूप
- यह लक्ष्य सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री (equity stake sales) और सार्वजनिक परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण दोनों को सम्मिलित करता है।
- FY24 से सरकार ने विनिवेश के लिए अलग लक्ष्य घोषित करना बंद कर दिया है, और अब उसे परिसंपत्ति मुद्रीकरण के साथ जोड़ा जा रहा है।
- इसमें सड़क, रेलवे, बिजली अवसंरचना आदि की संपत्तियों का इंवेस्टमेंट ट्रस्ट जैसे ढांचों के ज़रिए मुद्रीकरण शामिल है।
FY26 में मुख्य गतिविधि अल्पांश हिस्सेदारी बिक्री (minority stake sales) तक सीमित रही, जैसे:
- मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स में ₹5,000 करोड़ की हिस्सेदारी बिक्री,
- जबकि कई रणनीतिक बिक्री को स्थगित कर दिया गया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- विनिवेश से प्राप्त राशि को बजट में Miscellaneous Capital Receipts के रूप में दर्शाया जाता है।
- Asset Monetisation में सड़क, रेलवे और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी परिसंपत्तियाँ शामिल होती हैं।
- Minority stake sale में सरकार नियंत्रण नहीं छोड़ती; जबकि Strategic disinvestment में नियंत्रण का हस्तांतरण होता है।
- आर्थिक सर्वेक्षण का प्रभाव मध्यावधि वित्तीय नीति निर्माण पर होता है।
आर्थिक सर्वेक्षण और नीति दिशा
आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 में सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों की पुनर्परिभाषा की बात की गई है ताकि सरकार को सूचीबद्ध कंपनियों में लचीले ढंग से हिस्सेदारी घटाने की सुविधा मिले, साथ ही जहाँ आवश्यक हो वहाँ रणनीतिक नियंत्रण बनाए रखा जा सके।
सरकार का मानना है कि:
- FY27 का उच्च लक्ष्य बेहतर बाजार स्थितियों और मजबूत डील पाइपलाइन पर आधारित है।
- सुधरता मैक्रोइकोनॉमिक वातावरण इस प्रक्रिया को सहारा देगा।
बाज़ार दृष्टिकोण और निष्पादन संबंधी जोखिम
वित्तीय बाजारों में इस लक्ष्य को एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है कि सरकार गैर-कर आय मजबूत करने और राजकोषीय घाटा नियंत्रण की दिशा में गंभीर है।
हालाँकि विश्लेषकों का कहना है:
- विगत वर्षों में लक्ष्य की प्राप्ति में लगातार कमी दर्शाती है कि समयबद्ध निष्पादन, स्पष्ट नियमन, और बाज़ार की अनुकूलता अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
- हेडलाइन लक्ष्य से अधिक महत्वपूर्ण होगा कि सरकार सौदों को दक्षता से पूर्ण करने में कितनी सफल रहती है।
निष्कर्ष
₹80,000 करोड़ का यह लक्ष्य सरकार की राजकोषीय उत्तरदायित्व, परिसंपत्ति प्रबंधन और आर्थिक रणनीति में संतुलन स्थापित करने की मंशा को दर्शाता है। यह न केवल राजस्व सृजन बल्कि नीतिगत पारदर्शिता और निष्पादन क्षमता के लिए भी एक परीक्षा होगी। यदि इसे समयबद्ध और सटीक रूप से लागू किया गया, तो यह भारत की वित्तीय स्थिरता और सार्वजनिक क्षेत्र सुधार की दिशा में एक दृढ़ कदम सिद्ध हो सकता है।