फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता ढांकर ने रचा इतिहास: गणतंत्र दिवस पर महिला सैन्य नेतृत्व की नई मिसाल

फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता ढांकर ने रचा इतिहास: गणतंत्र दिवस पर महिला सैन्य नेतृत्व की नई मिसाल

77वें गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता ढांकर ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराकर इतिहास रच दिया। यह सम्मान भारतीय वायुसेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और सैन्य नेतृत्व में उनकी सशक्त भागीदारी का प्रतीक बन गया है।

प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि

अक्षिता ढांकर हरियाणा के कासनी गांव से आती हैं और उनका परिवार भारतीय सशस्त्र बलों से गहरे रूप से जुड़ा है। उनके पिता स्वयं भारतीय वायुसेना में सेवा दे चुके हैं, जिससे उन्हें बचपन से ही देशसेवा की प्रेरणा मिली। अनुशासित वातावरण में पली-बढ़ी अक्षिता ने कम उम्र में ही देशभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा को जीवन का हिस्सा बना लिया था।

शिक्षा और एनसीसी की भूमिका

अक्षिता ने दिल्ली के श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की, जहां उन्होंने नेशनल कैडेट कोर (NCC) की सदस्यता ली। नेतृत्व क्षमता के चलते वे कैडेट सार्जेंट मेजर के पद तक पहुंचीं, जो अनुशासन और संगठनात्मक कौशल का प्रतीक होता है। एनसीसी में उनके अनुभव ने उन्हें सैन्य जीवन के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार किया।

वायुसेना में कमीशन और करियर

भारतीय वायुसेना में शामिल होने की ठानी तो उन्होंने एयर फोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट (AFCAT) पास किया और एएफएसबी मैसूरु से चयनित हुईं। जून 2023 में उन्हें प्रशासनिक शाखा में फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में कमीशन प्राप्त हुआ। केवल तीन वर्षों के भीतर वे फ्लाइट लेफ्टिनेंट के पद तक पहुंच गईं, जो उनकी क्षमता, समर्पण और कार्यकुशलता को दर्शाता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य:

  • गणतंत्र दिवस प्रतिवर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है।
  • भारत के राष्ट्रपति भारतीय सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर होते हैं।
  • एनसीसी युवाओं को रक्षा सेवाओं के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • भारतीय वायुसेना में AFCAT और चयन बोर्ड के माध्यम से अधिकारियों की भर्ती होती है।

फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता ढांकर का गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लेना न केवल उनके व्यक्तिगत सफर का सम्मान है, बल्कि यह भारत की सशस्त्र सेनाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व की दिशा में बढ़ते विश्वास का भी प्रतीक है। हरियाणा के एक छोटे से गांव से लेकर राष्ट्रीय मंच तक का उनका यह सफर नई पीढ़ी की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।

Originally written on January 26, 2026 and last modified on January 26, 2026.

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