फ्रांस की संसद ने पास किया ऐतिहासिक विधेयक: 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर सोशल मीडिया प्रतिबंध
फ्रांस ने डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा क़दम उठाते हुए एक ऐसा विधेयक पारित किया है जो 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक पहुँचने से रोकता है। इस विधेयक के माध्यम से सरकार स्क्रीन लत, मानसिक स्वास्थ्य संकट, और एल्गोरिदम आधारित प्रभावों से नाबालिगों को बचाने की कोशिश कर रही है।
फ्रांसीसी नेशनल असेंबली में विधेयक पारित
यह विधेयक फ्रांस की नेशनल असेंबली (निचला सदन) में 130 मतों के समर्थन और 21 के विरोध के साथ पारित हुआ। अब यह सीनेट में अनुमोदन के लिए जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि 2026 के शैक्षणिक सत्र से इस कानून को नए उपयोगकर्ता खातों के लिए लागू किया जाए।
बच्चों की सुरक्षा पर मैक्रों की पहल
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस विधेयक का स्वागत करते हुए इसे बच्चों और किशोरों को स्क्रीन पर अधिक समय बिताने और डिजिटल लत से बचाने की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया। यह कानून हाई स्कूलों में मोबाइल फोन के उपयोग पर भी प्रतिबंध लाएगा, जो कि 2018 में निचली माध्यमिक कक्षाओं में लगाए गए प्रतिबंध का विस्तार होगा।
कार्यान्वयन और यूरोपीय संघ की भूमिका
प्रस्तावित ढांचे के तहत:
- सोशल मीडिया कंपनियों को उपयोगकर्ताओं की आयु सत्यापित करनी होगी,
- और अयोग्य खातों को 2026 के अंत तक निष्क्रिय करना होगा।
यूरोपीय आयोग (EU Commission) ने फ्रांस की मंशा का समर्थन किया है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया है कि उम्मीदित प्रवर्तन EU कानूनों के अनुरूप होना चाहिए। इसलिए आयु सत्यापन प्रणाली संभवतः यूरोपीय स्तर पर समन्वित की जाएगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- फ्रांस का यह विधेयक 15 वर्ष से कम आयु वालों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाता है।
- ऑस्ट्रेलिया पहले ही 16 वर्ष से कम आयु के उपयोगकर्ताओं के लिए ऐसा प्रतिबंध लागू कर चुका है।
- आयु सत्यापन सोशल मीडिया कंपनियों के लिए अनिवार्य होगा।
- EU कानून सदस्य देशों में इस तरह के प्रतिबंधों की प्रवर्तन प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
डिजिटल विनियमन पर बहस
समर्थक पक्ष का तर्क है कि यह प्रतिबंध:
- साइबरबुलिंग को कम करेगा,
- हानिकारक डिजिटल सामग्री से सुरक्षा देगा,
- और किशोर मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाएगा।
फ्रांस की जनस्वास्थ्य निगरानी संस्था ANSES ने भी बच्चों में डिजिटल लत और मानसिक तनाव पर चिंता जताई है।
वहीं, वामपंथी पार्टी “फ्रांस अनबाउड” और कुछ बाल सुरक्षा समूहों ने इस कानून को “डिजिटल संरक्षकवाद” (Digital Paternalism) बताया है और सुझाव दिया है कि सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही बढ़ाना, उपयोगकर्ता प्रतिबंधों से अधिक प्रभावी उपाय होगा।
यह विधेयक इस बात का संकेत है कि डिजिटल सुरक्षा अब केवल तकनीकी या व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय नीति का विषय बन चुकी है।