‘फॉरएवर केमिकल्स’ को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम: राइस यूनिवर्सिटी का नया फिल्ट्रेशन मटेरियल
राइस यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक नया निस्पंदन (फिल्ट्रेशन) पदार्थ विकसित किया है, जो जल प्रदूषण को नियंत्रित करने में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है। यह नया मटेरियल खास तौर पर PFAS (Per- and Polyfluoroalkyl Substances) यानी “फॉरएवर केमिकल्स” को पारंपरिक तरीकों की तुलना में 100 गुना तेज़ी से अवशोषित कर सकता है।
PFAS: एक सतत और गंभीर खतरा
PFAS रसायनों का उपयोग उन उत्पादों में होता है जो जल, दाग और गर्मी प्रतिरोधी होते हैं, जैसे नॉन-स्टिक कुकवेयर, वाटरप्रूफ कपड़े, फायरफाइटिंग फोम आदि। ये रसायन कार्बन-फ्लोरीन बंधों से बने होते हैं, जो अत्यंत मजबूत और अपघटनीय होते हैं। यही कारण है कि ये रसायन दशकों तक मिट्टी और जल में टिके रहते हैं।
PFAS के संपर्क को कैंसर, गुर्दा और यकृत रोग, इम्यून सिस्टम डिसऑर्डर और विकासात्मक दोषों से जोड़ा गया है, जिससे इनकी मौजूदगी पर वैश्विक चिंता बढ़ी है।
मौजूदा निस्पंदन विधियों की सीमाएं
वर्तमान में ग्रेनुलर एक्टिवेटेड कार्बन (GAC), रिवर्स ऑस्मोसिस और आयन एक्सचेंज जैसी तकनीकों का उपयोग PFAS को जल से अलग करने में किया जाता है, लेकिन ये रसायनों को नष्ट नहीं कर पातीं। पकड़े गए PFAS या तो खतरनाक अपशिष्ट के रूप में संग्रहीत किए जाते हैं या उच्च तापमान वाली विधियों से नष्ट करने की कोशिश की जाती है।
हालांकि ये विधियाँ ऊर्जा-गहन हैं और कई बार विषैले उपोत्पाद पैदा करती हैं या PFAS को छोटे लेकिन समान रूप से खतरनाक अणुओं में तोड़ देती हैं। आज भी कोई ऐसी औद्योगिक तकनीक व्यापक रूप से स्वीकृत नहीं है जो PFAS को पूरी तरह नष्ट कर सके।
नया LDH मटेरियल कैसे काम करता है?
राइस यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने लेयर्ड डबल हाइड्रॉक्साइड (LDH) नामक एक सामग्री विकसित की है, जो कॉपर और एल्युमिनियम से बनी है। यह सामग्री सकारात्मक आवेशित (positively charged) होती है, जो नकारात्मक आवेशित, लंबी श्रृंखला वाले PFAS को तेजी से अपनी ओर आकर्षित करती है।
टीम ने कुछ एल्युमिनियम परमाणुओं को कॉपर से बदलकर अवशोषण की गति में बड़ा सुधार किया। राइस वाटर इंस्टीट्यूट के निदेशक माइकल वोंग के अनुसार, यह मटेरियल PFAS को इतने प्रभावी ढंग से एकत्र करता है कि इन्हें 400–500°C जैसी अपेक्षाकृत कम तापमान पर नॉन-थर्मल विधियों से नष्ट किया जा सकता है। इससे बना कचरा कैल्शियम-फ्लोराइड के रूप में सुरक्षित रूप से लैंडफिल में डाला जा सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- PFAS को “फॉरएवर केमिकल्स” कहा जाता है क्योंकि इनमें कार्बन-फ्लोरीन बंध अत्यंत मजबूत होते हैं।
- पारंपरिक निस्पंदन तकनीकें PFAS को पकड़ती हैं, परंतु नष्ट नहीं करतीं।
- लेयर्ड डबल हाइड्रॉक्साइड (LDH) सकारात्मक आवेशित अवशोषक सामग्री है।
- नॉन-थर्मल PFAS विनाश अब एक उभरता हुआ विकल्प है जो कम तापमान पर भी प्रभावी हो सकता है।
भविष्य की चुनौतियाँ और नीति-प्रासंगिकता
यह तकनीक आशाजनक है, परंतु औद्योगिक स्तर पर अपनाने के लिए अभी कई चुनौतियाँ शेष हैं—जैसे वास्तविक अपशिष्ट जल की स्थिति, कार्यस्थल सुरक्षा, और नियामकीय स्वीकृति। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मटेरियल मौजूदा फिल्ट्रेशन संरचनाओं के साथ अच्छी तरह काम कर सकता है, जिससे लागत और विस्तार की बाधाएँ कम हो सकती हैं।
जैसे-जैसे PFAS का प्रदूषण वैश्विक रूप से फैलता जा रहा है, ऐसे अनुकूलनशील और वैज्ञानिक समाधान नीति निर्माण और पीने के पानी की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनते जा रहे हैं।
यह खोज न केवल जल शुद्धि के क्षेत्र में एक बड़ा कदम है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और मानव स्वास्थ्य के लिए भी एक उम्मीद की किरण है।