फिलीपीनी ईगल: संकटग्रस्त राष्ट्रीय पक्षी का अस्तित्व संघर्ष
फिलीपीनी ईगल, जिसका वैज्ञानिक नाम पिथेकोफागा जेफरी है, विश्व के सबसे बड़े और शक्तिशाली शिकारी पक्षियों में से एक माना जाता है। इसे प्रायः “मंकी-ईटिंग बर्ड” के नाम से भी जाना जाता है। यह पक्षी केवल फिलीपींस में पाया जाता है और देश का राष्ट्रीय प्रतीक है। दुर्भाग्यवश, वर्तमान में यह प्रजाति गंभीर रूप से संकटग्रस्त श्रेणी में सूचीबद्ध है और अनुमानतः जंगली अवस्था में इसके 500 से भी कम परिपक्व सदस्य शेष बचे हैं।
‘मंकी-ईटिंग’ नाम की उत्पत्ति
फिलीपीनी ईगल को यह उपनाम प्रारंभिक रिपोर्टों के आधार पर मिला, जिनमें इसे जंगलों की ऊँची छतरी में बंदरों का शिकार करते हुए देखा गया था। हालांकि बंदर इसके आहार का हिस्सा हैं, यह उड़ने वाली गिलहरियों, सिवेट, चमगादड़ों, सांपों और अन्य छोटे कशेरुकी जीवों का भी शिकार करता है।
यह दिन में सक्रिय रहने वाला शिकारी है और अपने पारिस्थितिकी तंत्र में शीर्ष शिकारी की भूमिका निभाता है। इस कारण यह उष्णकटिबंधीय वनों में जैविक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
विशाल आकार और विशिष्ट शारीरिक बनावट
फिलीपीनी ईगल को शरीर की लंबाई के आधार पर विश्व के सबसे बड़े ईगल्स में गिना जाता है। वयस्क पक्षी की लंबाई लगभग 76 से 102 सेंटीमीटर तक होती है, जबकि इसके पंखों का फैलाव औसतन 1.9 मीटर तक पहुंच सकता है। इसका वजन 4.5 से 8 किलोग्राम के बीच होता है, जिसमें मादा सामान्यतः नर से अधिक बड़ी और भारी होती है।
इसकी मजबूत, मुड़ी हुई चोंच और लगभग 7.6 सेंटीमीटर तक लंबे नुकीले पंजे इसे घने जंगलों में शिकार पकड़ने में सक्षम बनाते हैं। अन्य खुले क्षेत्रों में रहने वाले शिकारी पक्षियों के विपरीत, यह घने वृक्षों के बीच तेजी से उड़ान भरने और दिशा बदलने के लिए अनुकूलित है।
आवास ह्रास और सीमित विस्तार
यह प्रजाति केवल फिलीपींस के कुछ द्वीपों—लूजोन, समर, लेयते और मिंडानाओ—तक सीमित है। यह मुख्यतः डिप्टेरोकार्प वनों पर निर्भर करती है, जो दक्षिण-पूर्व एशिया के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं। प्रत्येक प्रजनन जोड़े को लगभग 100 वर्ग किलोमीटर या उससे अधिक क्षेत्र की आवश्यकता होती है।
वनों की कटाई, कृषि विस्तार, खनन और बुनियादी ढांचे के विकास के कारण इसके प्राकृतिक आवास में भारी कमी आई है। निचले इलाकों के वन नष्ट होने के बाद यह ऊंचे और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों की ओर धकेला गया है, जहां इसका अस्तित्व और अधिक अस्थिर हो गया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- पिथेकोफागा जेफरी केवल फिलीपींस में पाई जाने वाली स्थानिक प्रजाति है।
- अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) ने इसे ‘गंभीर रूप से संकटग्रस्त’ श्रेणी में रखा है।
- डिप्टेरोकार्प वन दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रमुख उष्णकटिबंधीय वन प्रकार हैं।
- बड़े शिकारी पक्षियों को विस्तृत क्षेत्र की आवश्यकता होती है, जिससे वे आवास विखंडन के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
धीमी प्रजनन दर और संरक्षण प्रयास
फिलीपीनी ईगल लंबे समय तक एक ही जोड़े में रहता है और सामान्यतः हर दो वर्ष में केवल एक अंडा देता है। दोनों माता-पिता लगभग दो महीने तक अंडे को सेते हैं और चूजे की कई महीनों तक देखभाल करते हैं। यह लगभग सात वर्ष की आयु में प्रजनन के योग्य होता है, जिससे इसकी जनसंख्या वृद्धि दर अत्यंत धीमी रहती है।
1970 के दशक से संरक्षण कार्यक्रमों के तहत आवास संरक्षण, कानून प्रवर्तन और बंदी प्रजनन जैसी पहलें की जा रही हैं। फिर भी, इसका भविष्य फिलीपींस के शेष प्राथमिक वनों के संरक्षण पर निर्भर करता है। यदि वनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है, तो इस गौरवशाली राष्ट्रीय पक्षी के अस्तित्व को बचाया जा सकता है।