प्राचीन मिस्र की इंजीनियरिंग पर नया प्रकाश: तांबे का उपकरण निकला संभावित ‘बो ड्रिल’

प्राचीन मिस्र की इंजीनियरिंग पर नया प्रकाश: तांबे का उपकरण निकला संभावित ‘बो ड्रिल’

मिस्र में एक सदी पहले उत्खनन के दौरान मिला एक छोटा तांबे का उपकरण अब प्राचीन मिस्र की तकनीकी क्षमता को लेकर स्थापित धारणाओं को चुनौती दे रहा है। 1920 के दशक में इसे एक साधारण सूआ (ऑल) के रूप में वर्गीकृत किया गया था, लेकिन हालिया सूक्ष्मदर्शी विश्लेषण के बाद इसे संभावित ‘बो ड्रिल’ के रूप में पुनः पहचाना गया है। यदि यह निष्कर्ष प्रमाणित होता है, तो यह खोज प्राचीन मिस्र में उन्नत घूर्णी ड्रिलिंग तकनीक के उपयोग को लगभग दो सहस्राब्दियों पहले तक ले जाएगी। इस अध्ययन का नेतृत्व न्यूकैसल विश्वविद्यालय के डॉ. मार्टिन ओडलर ने किया है।

सूआ से ‘बो ड्रिल’ तक: पुनर्वर्गीकरण की प्रक्रिया

यह वस्तु मूल रूप से पुरातत्वविद गाइ ब्रंटन द्वारा खोजी गई थी और इसे चमड़े में लिपटे एक छोटे तांबे के सूए के रूप में वर्णित किया गया था। दशकों तक इस वर्गीकरण पर कोई प्रश्न नहीं उठाया गया।

हालांकि, हालिया माइक्रोस्कोपिक जांच में उपकरण पर ऐसे घिसाव चिह्न पाए गए जो साधारण हाथ से दबाव डालने के बजाय घूर्णी गति (रोटेशन) के अनुरूप हैं। उपकरण से जुड़े छह नाजुक चमड़े के कुंडल विशेष रूप से महत्वपूर्ण पाए गए। ये संभवतः डोरी तंत्र के रूप में कार्य करते थे, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह उपकरण ‘बो ड्रिल’ की तरह संचालित होता था।

बो ड्रिल में एक डोरी को धुरी के चारों ओर लपेटकर धनुष को आगे-पीछे चलाया जाता है, जिससे निरंतर घूर्णन उत्पन्न होता है और नियंत्रित तथा तीव्र ड्रिलिंग संभव होती है।

मिस्र की तकनीकी समयरेखा पर प्रभाव

अब तक घूर्णी ड्रिलिंग उपकरणों के संरक्षित उदाहरण मुख्यतः New Kingdom काल (लगभग 1550–1070 ईसा पूर्व) से जुड़े माने जाते थे। यदि यह तांबे का उपकरण उनसे लगभग 2,000 वर्ष पुराना सिद्ध होता है, तो यह दर्शाएगा कि मिस्रवासियों ने यांत्रिक ड्रिलिंग तकनीक को बहुत पहले ही विकसित कर लिया था।

घूर्णी ड्रिलिंग लकड़ी के काम, मनके निर्माण और फर्नीचर निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण थी। ये तकनीकें न केवल दैनिक जीवन के लिए आवश्यक थीं, बल्कि भव्य स्थापत्य निर्माण की आधारशिला भी थीं। हालांकि, छोटे उपकरणों और जैविक अवयवों के पुरातात्विक संरक्षण की संभावना कम होती है, जिससे तकनीकी विकास के प्रत्यक्ष प्रमाण सीमित रहते हैं।

पुरातत्व में आधुनिक तकनीकों की भूमिका

यह पुनर्मूल्यांकन दर्शाता है कि संग्रहालयों में संरक्षित पुरानी वस्तुओं की आधुनिक तकनीकों से दोबारा जांच करने पर ऐतिहासिक समझ में बड़ा परिवर्तन आ सकता है। प्राचीन मिस्र की चर्चा अक्सर विशाल पिरामिडों और अलंकरणों तक सीमित रहती है, लेकिन ऐसे दैनिक उपयोग के उपकरण भी उस सभ्यता की तकनीकी दक्षता के साक्ष्य हैं।

तांबा प्रारंभिक मिस्री औजार निर्माण में व्यापक रूप से प्रयुक्त धातु था, विशेषकर लोहे के व्यापक उपयोग से पहले। इस खोज से यह भी संकेत मिलता है कि मिस्र की इंजीनियरिंग क्षमता अचानक उभरने के बजाय क्रमिक विकास की प्रक्रिया से परिपक्व हुई।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • प्राचीन मिस्र का न्यू किंगडम काल लगभग 1550–1070 ईसा पूर्व के बीच माना जाता है।
  • बो ड्रिल में डोरी और धनुष तंत्र के माध्यम से निरंतर घूर्णी गति उत्पन्न की जाती है।
  • लोहे के व्यापक उपयोग से पहले तांबा औजार निर्माण की प्रमुख धातु था।
  • घूर्णी ड्रिलिंग तकनीक लकड़ी, मनकों और फर्नीचर निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी।

समग्र रूप से, यह तांबे का उपकरण प्राचीन मिस्र की तकनीकी प्रगति की समयरेखा को पुनर्परिभाषित कर सकता है। यदि आगे के परीक्षण इस निष्कर्ष की पुष्टि करते हैं, तो यह खोज प्रारंभिक यांत्रिक नवाचारों की समझ को गहराई देगी और यह दर्शाएगी कि सभ्यता की प्रगति अक्सर छोटे, किंतु महत्वपूर्ण तकनीकी सुधारों पर आधारित होती है।

Originally written on February 12, 2026 and last modified on February 12, 2026.

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