पोलैंड ने भारत के रूसी तेल आयात में कटौती को बताया सकारात्मक कदम, वाइमार त्रिकोण वार्ता में हुई पहली सहभागिता
रूस से तेल खरीद को लेकर भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच, पोलैंड ने भारत को कूटनीतिक समर्थन दिया है। वारसॉ ने कहा है कि उसे भारत द्वारा हाल ही में रूसी तेल आयात में की गई कटौती से “संतोष” है, जबकि अमेरिका इस मुद्दे पर आयात शुल्क बढ़ाने की चेतावनी दे रहा है।
वाइमार त्रिकोण वार्ता में भारत की पहली भागीदारी
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पेरिस में आयोजित वाइमार त्रिकोण प्रारूप की बैठक में भाग लिया, जो भारत की इस समूह में पहली सहभागिता थी। बैठक में फ्रांस, जर्मनी और पोलैंड के विदेश मंत्रियों ने भाग लिया। इस चर्चा को यूरोपीय शक्तियों के साथ भारत की भूराजनीतिक और सुरक्षा संबंधी साझेदारी को गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
रूस से तेल खरीद पर पोलैंड का रुख
बैठक के बाद पोलैंड के विदेश मंत्री राडोस्लॉ सिकोर्स्की ने कहा कि पोलैंड भारत द्वारा रूसी तेल आयात में की गई कटौती का स्वागत करता है। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे आयात अप्रत्यक्ष रूप से मास्को के युद्ध प्रयासों को समर्थन देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर वार्ता उनके आगामी भारत दौरे में आगे बढ़ेगी।
वाइमार त्रिकोण समूह की जानकारी
- स्थापना वर्ष: 1991
- सदस्य देश: फ्रांस, जर्मनी, पोलैंड
- उद्देश्य: यूरोपीय एकीकरण को बढ़ावा देना, रूस-यूक्रेन से संबंधित सुरक्षा सहयोग, और सांस्कृतिक एवं आर्थिक संबंधों को मजबूत करना।
- भारत की इस समूह में सहभागिता यह दर्शाती है कि यूरोप भारत को वैश्विक रणनीतिक सहयोगी के रूप में देख रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- वाइमार त्रिकोण 1991 में फ्रांस, जर्मनी और पोलैंड द्वारा गठित किया गया था।
- भारत ने पहली बार पेरिस में इस प्रारूप में भाग लिया।
- पोलैंड ने भारत द्वारा रूसी तेल आयात में कटौती की सराहना की।
- वाइमार त्रिकोण का फोकस यूरोपीय समन्वय और सुरक्षा सहयोग पर है।
भारत–अमेरिका व्यापारिक तनाव की पृष्ठभूमि
भारत और अमेरिका के संबंध रूसी तेल खरीद को लेकर फिर से तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर उच्च आयात शुल्क लगाने की चेतावनी दी है। ट्रंप पहले भी भारतीय उत्पादों पर भारी शुल्क लगा चुके हैं, और एक प्रस्तावित कानून में ऐसे देशों पर 500% तक शुल्क लगाने की बात की गई है जो रूस से तेल या यूरेनियम खरीदते हैं। इससे पहले कुछ भारतीय वस्तुओं पर शुल्क 50% तक पहुंच चुके हैं।
भारत द्वारा यूरोप के साथ कूटनीतिक संवाद को आगे बढ़ाना इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली अपनी ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक रणनीतिक स्थिति को संतुलित रूप से साध रही है, विशेषकर ऐसे समय में जब अमेरिका की नीतियाँ व्यापार और कूटनीति दोनों स्तरों पर अनिश्चितता पैदा कर रही हैं।