पैक्स सिलिका गठबंधन में भारत की औपचारिक एंट्री से तकनीकी सहयोग को नई दिशा

पैक्स सिलिका गठबंधन में भारत की औपचारिक एंट्री से तकनीकी सहयोग को नई दिशा

भारत ने अमेरिका के नेतृत्व वाले रणनीतिक गठबंधन ‘पैक्स सिलिका’ में औपचारिक रूप से प्रवेश कर वैश्विक तकनीकी और आर्थिक सहयोग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और अमेरिका के आर्थिक मामलों के अवर सचिव जैकब हेलबर्ग की उपस्थिति में पैक्स सिलिका घोषणा पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल को 21वीं सदी की आर्थिक और तकनीकी व्यवस्था को आकार देने वाली साझेदारी के रूप में देखा जा रहा है।

एआई और सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र पर फोकस

दिसंबर 2025 में आरंभ किए गए इस गठबंधन का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित और सुदृढ़ बनाना है। इसका लक्ष्य कच्चे खनिजों से लेकर उन्नत तकनीकी अवसंरचना तक एक नवाचार-आधारित और विश्वसनीय तंत्र विकसित करना है।

भारत की भागीदारी इस गठबंधन को मजबूत बनाती है, क्योंकि देश के पास विशाल इंजीनियरिंग प्रतिभा और तेजी से विकसित हो रही सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षमता है। भारत में लगभग दस सेमीकंडक्टर संयंत्र विभिन्न चरणों में विकसित हो रहे हैं और शीघ्र ही पहले वाणिज्यिक उत्पादन की संभावना है।

रणनीतिक और आर्थिक महत्व

अधिकारियों के अनुसार भारत 2-नैनोमीटर चिप प्रौद्योगिकी सहित उन्नत चिप डिजाइन में प्रगति कर रहा है। अनुमान है कि वैश्विक सेमीकंडक्टर क्षेत्र में लगभग दस लाख अतिरिक्त कुशल पेशेवरों की आवश्यकता होगी, जिसमें भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

घोषणा में यह भी रेखांकित किया गया है कि एआई दीर्घकालिक समृद्धि और आर्थिक सुरक्षा के लिए परिवर्तनकारी शक्ति है। विश्वसनीय और सुरक्षित प्रणालियों के माध्यम से आर्थिक तथा सामरिक हितों की रक्षा इस गठबंधन की प्राथमिकताओं में शामिल है।

सदस्य देश और वैश्विक दृष्टि

पैक्स सिलिका के सदस्य देशों में ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, इज़राइल, जापान, कतर, दक्षिण कोरिया गणराज्य, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। दिसंबर 2025 में वाशिंगटन में आयोजित शिखर सम्मेलन में आर्थिक और तकनीकी सहयोग के साझा ढांचे को स्वीकृति दी गई थी।

यह गठबंधन गैर-संरेखित देशों पर निर्भरता कम करने और वैश्विक आपूर्ति शृंखला को अधिक लचीला बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। आपूर्ति शृंखला की मजबूती को आज आर्थिक सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण तत्व माना जाता है।

भारत की तकनीकी नेतृत्व भूमिका

भारत की इस साझेदारी से देश वैश्विक एआई और सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला में एक केंद्रीय भागीदार के रूप में उभर रहा है। इससे घरेलू विनिर्माण को गति मिलेगी, रणनीतिक स्वायत्तता मजबूत होगी और नई तकनीकी व्यवस्था को परिभाषित करने में भारत की भूमिका सुदृढ़ होगी।

आलोचकों का मानना है कि यह कदम भारत को वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में आगे ले जाएगा और रोजगार सृजन, निवेश आकर्षण तथा नवाचार को बढ़ावा देगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, एआई प्रणालियों और रक्षा तकनीकों के लिए अनिवार्य घटक हैं।
  • लिथियम और रेयर अर्थ तत्व जैसे महत्वपूर्ण खनिज चिप निर्माण में उपयोगी होते हैं।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता उन्नत संगणनात्मक हार्डवेयर और डेटा अवसंरचना पर निर्भर करती है।
  • आपूर्ति शृंखला की लचीलापन आज वैश्विक आर्थिक सुरक्षा नीति का प्रमुख आधार है।

पैक्स सिलिका गठबंधन में भारत की औपचारिक भागीदारी देश की तकनीकी महत्वाकांक्षाओं को नई दिशा देती है। यह न केवल वैश्विक साझेदारी को सुदृढ़ करती है, बल्कि भारत को उभरती तकनीकी व्यवस्था में निर्णायक भूमिका निभाने का अवसर भी प्रदान करती है।

Originally written on February 20, 2026 and last modified on February 20, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *