पेरू के क्लाउड फॉरेस्ट में नई मेंढक प्रजाति की खोज: विलुप्ति का खतरा बना बड़ी चेतावनी
दक्षिण अमेरिका के ऊँचाई वाले नाज़ुक पारिस्थितिक तंत्र में जैव विविधता संकट की गहराई को रेखांकित करते हुए, वैज्ञानिकों ने उत्तरी पेरू के क्लाउड फॉरेस्ट (मेघ वनों) में मेंढक की एक नई प्रजाति “Oreobates shankusacha” की खोज की है। हालांकि शोधकर्ता चेतावनी दे रहे हैं कि यह प्रजाति खोजे जाने के तुरंत बाद ही विलुप्ति के कगार पर खड़ी हो सकती है।
पेरू के क्लाउड फॉरेस्ट में खोज
यह खोज San Martín क्षेत्र के मेघ वनों में पेरू और फ्रांस के वैज्ञानिकों की एक संयुक्त टीम द्वारा की गई, जिसमें स्थानीय आदिवासी मार्गदर्शकों की अहम भूमिका रही। इस नई प्रजाति का औपचारिक विवरण विज्ञान पत्रिका Salamandra में प्रकाशित हुआ है।
“Oreobates shankusacha” मुख्यतः अमेज़न के जंगल की ज़मीन पर पत्तों, काई और फर्न के बीच निवास करता है, जो इसके प्राकृतिक आवास का हिस्सा है।
विशेषताएँ और सांस्कृतिक जुड़ाव
यह छोटा ज़मीन पर रहने वाला मेंढक लगभग एक इंच लंबा होता है। इसका रंग गहरा भूरा होता है और इसकी स्वर्ण-आंखें इसे पर्यावरण में छिपने में सहायक बनाती हैं।
इस प्रजाति का नाम स्थानीय किचवा-लामिस्टा समुदायों के सम्मान में रखा गया है—जहां “शंकू साचा” का अर्थ है “जंगल का दिल”, जो उस क्षेत्र की सांस्कृतिक और पारिस्थितिक महत्ता को दर्शाता है।
आवासीय क्षेत्र और पारिस्थितिक भूमिका
“Oreobates shankusacha” लगभग 4,430 फीट से अधिक ऊँचाई पर स्थित मेघ वनों में निवास करता है। ये वन आमतौर पर पर्वतीय धारों पर बिखरे होते हैं और पृथक पारिस्थितिक द्वीपों की तरह कार्य करते हैं, जो विशिष्ट और अत्यधिक अनुकूलित प्रजातियों का आश्रय हैं।
यह मेंढक रात्रिचर है और रात में धीरे-धीरे जंगल की ज़मीन पर चलकर कीड़ों की तलाश करता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- क्लाउड फॉरेस्ट ऊँचाई पर स्थित होते हैं और उच्च स्थानिक जैव विविधता (endemic biodiversity) को सहारा देते हैं।
- उभयचर (Amphibians) पर्यावरणीय परिवर्तनों के प्रति संवेदनशील होने के कारण महत्वपूर्ण पारिस्थितिक संकेतक माने जाते हैं।
- अवैध वनों की कटाई और कृषि विस्तार अमेज़न क्षेत्र में जैव विविधता ह्रास के प्रमुख कारण हैं।
- वैज्ञानिक नाम अक्सर स्थानीय भाषाओं और सांस्कृतिक संबंधों से प्रेरित होते हैं।
संरक्षण की चिंता और वनों की कटाई का संकट
वैज्ञानिकों ने सिफारिश की है कि “Oreobates shankusacha” को तुरंत संवेदनशील प्रजातियों की श्रेणी में रखा जाए। शोध में पाया गया कि इस क्षेत्र का लगभग 60% वन आवरण पहले ही कॉफी की खेती, पशु चराई और अवैध लकड़ी कटाई के कारण नष्ट हो चुका है।
इस प्रजाति का आवास क्षेत्र अत्यंत सीमित है और वनों की तेजी से हो रही कटाई के कारण इसकी प्रजाति पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है—खासकर जब यह हाल ही में खोजी गई है।
यह खोज न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि प्राकृतिक आवासों की रक्षा में विलंब और अधोसंरचनात्मक अतिक्रमण जैव विविधता के लिए कितने घातक सिद्ध हो सकते हैं। पेरू के मेघ वनों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में तत्काल संरक्षण उपाय अब समय की मांग हैं।