पृथ्वी पर गिरते अंतरिक्ष मलबे की निगरानी में भूकंपीय तकनीक का नया प्रयोग
जैसे-जैसे पृथ्वी की कक्षा में उपग्रहों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, अंतरिक्ष मलबे से जुड़े खतरों में भी वृद्धि हो रही है। इस संदर्भ में वैज्ञानिक अब भूकंपीय निगरानी प्रणालियों (seismic monitoring systems) को अवांछित अंतरिक्ष वस्तुओं की पुनः प्रवेश (reentry) की ट्रैकिंग के लिए एक नया उपकरण मान रहे हैं। हाल के अध्ययन में यह पाया गया है कि ये प्रणालियाँ सुपरसोनिक वेग से गिरने वाली वस्तुओं द्वारा उत्पन्न ध्वनि तरंगों (sonic booms) को दर्ज कर सकती हैं, जिससे उनकी पुनः प्रवेश की दिशा और समय का पता लगाया जा सकता है।
ध्वनि तरंगों से पुनः प्रवेश पथ की पहचान
2024 में चीन के शेन्झो-15 क्रू कैप्सूल के एक परित्यक्त मॉड्यूल की दक्षिणी कैलिफोर्निया पर पुनः प्रविष्टि के दौरान, वैज्ञानिकों ने 120 से अधिक सीस्मोमीटर द्वारा दर्ज की गई ध्वनि तरंगों का विश्लेषण किया। इस डेटा से वस्तु की वास्तविक पुनः प्रवेश दिशा का निर्धारण किया गया, जो पूर्वानुमानित पथ से लगभग 30 किलोमीटर दक्षिण में था।
इस अध्ययन ने यह स्पष्ट किया कि जब वस्तु वायुमंडल में टूटने लगती है, तब रेडार आधारित ऑर्बिटल ट्रैकिंग की सटीकता सीमित हो जाती है।
पारंपरिक अंतरिक्ष निगरानी की सीमाएं
पृथ्वी की कक्षा में वस्तुओं की निगरानी बहुत सटीकता से होती है, परंतु जब वे वायुमंडल में तेज़ी से गिरने लगती हैं और टूटने लगती हैं, तब उनकी ट्रैकिंग अत्यंत कठिन हो जाती है। जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के प्रमुख शोधकर्ता बेंजामिन फर्नांडो के अनुसार, यह अंतर जोखिम आकलन और मलबे की पुनर्प्राप्ति के लिए एक बड़ी चुनौती है, खासकर जब मलबा खतरनाक पदार्थों से युक्त हो।
भूकंपीय नेटवर्क इस अंतिम चरण की ट्रैकिंग में एक जमीन-आधारित समाधान प्रदान कर सकते हैं।
बढ़ता जोखिम: उपग्रहों की भीड़
पिछले एक दशक में लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में उपग्रहों की संख्या में जबरदस्त वृद्धि हुई है। स्पेसX की स्टारलिंक जैसी बड़ी उपग्रह श्रृंखलाओं ने अंतरिक्ष यातायात को कई गुना बढ़ा दिया है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि पुनः प्रवेश पर “पूरा जल जाने” की जो गारंटी दी जाती है, वह अक्सर कंपनी के दावों पर आधारित होती है, जबकि हवाई जहाज या आबादी वाले क्षेत्रों पर मलबा गिरने की आशंका को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- अनियंत्रित अंतरिक्ष मलबा वायुमंडल में प्रवेश के दौरान सोनिक बूम उत्पन्न करता है।
- सीस्मोमीटर सुपरसोनिक वस्तुओं द्वारा उत्पन्न दबाव तरंगों का पता लगा सकते हैं।
- लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में उपग्रहों की संख्या पिछले दशक में तेज़ी से बढ़ी है।
- पुनः प्रवेश पथ की ट्रैकिंग विमानन सुरक्षा और मलबे की पुनर्प्राप्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भविष्य की दिशा और वैश्विक निगरानी तंत्र
चीनी मॉड्यूल के अलावा, वैज्ञानिकों ने इस तकनीक का उपयोग स्पेसX के असफल स्टारशिप परीक्षणों के मलबे की निगरानी में भी किया है। दूरदराज़ क्षेत्रों जैसे दक्षिण प्रशांत महासागर में मौजूद परमाणु परीक्षण निगरानी केंद्र भी इस कार्य में मददगार साबित हो सकते हैं।
जैसे-जैसे अंतरिक्ष मलबा पृथ्वी पर गिरने की घटनाएं बढ़ रही हैं, वैज्ञानिक अब तेज़ गणना, वैश्विक डेटा कैटलॉग और मिनटों में प्रतिक्रिया की दिशा में काम कर रहे हैं। यह तकनीक आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) जैसी संरचनाओं के नियंत्रित डी-ऑर्बिट में भी उपयोगी हो सकती है।
इस नवाचार से यह स्पष्ट है कि पारंपरिक भूकंपीय विज्ञान अब केवल भूकंप तक सीमित नहीं, बल्कि अंतरिक्ष सुरक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा के क्षेत्र में भी एक अहम भूमिका निभा सकता है।