पूसा कृषि विज्ञान मेले में ‘विकसित कृषि–आत्मनिर्भर भारत’ का रोडमैप प्रस्तुत
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली स्थित आईसीएआर–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) परिसर में आयोजित तीन दिवसीय पूसा कृषि विज्ञान मेले का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने ‘विकसित कृषि–आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने हेतु व्यापक सुधार एजेंडा प्रस्तुत किया। वैज्ञानिकों, किसानों और नीति-निर्माताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कृषि योजनाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया। यह वार्षिक मेला प्रयोगशाला अनुसंधान और खेत स्तर पर उसके अनुप्रयोग के बीच सेतु का कार्य करता है।
भुगतान में देरी पर सख्ती
मंत्री ने किसानों के भुगतान में देरी को लेकर सख्त चेतावनी दी। यदि कोई एजेंसी या राज्य किसानों का बकाया रोकेगा, तो उसे लंबित राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज देना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार अपनी हिस्सेदारी समय पर जारी करेगी और यदि राज्य स्तर पर भुगतान में देरी होती है तो सीधे किसानों के खातों में राशि स्थानांतरित करने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ योजनाओं, विशेषकर यंत्रीकरण से संबंधित अनुदानों में क्रियान्वयन की खामियां सामने आई हैं, जिससे निगरानी तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता है।
कृषि विज्ञान केंद्र और ऋण सुविधा पर बल
कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) को जिला स्तर पर सुधार केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। ये केंद्र नई फसल किस्मों, एकीकृत कृषि मॉडल और उन्नत तकनीकों का प्रसार गांवों तक करेंगे।
ऋण सुविधा के संदर्भ में मंत्री ने दोहराया कि किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण पर प्रभावी ब्याज दर 4 प्रतिशत है। उन्होंने बैंकों से अनावश्यक कागजी कार्रवाई और देरी समाप्त करने का आग्रह किया, ताकि किसान अनौपचारिक साहूकारों पर निर्भर न रहें।
एमएसपी, उर्वरक सब्सिडी और लाइसेंस सुधार
चौहान ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) खरीद अवधि को तीन महीने से घटाकर एक महीने करने का सुझाव दिया, ताकि किसानों को शीघ्र भुगतान सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने लगभग 2 लाख करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से सीधे किसानों के खातों में देने की संभावना पर भी विचार व्यक्त किया, जिससे उन्हें खरीद में अधिक लचीलापन मिल सके।
कीटनाशक लाइसेंसिंग प्रणाली को सरल बनाने, प्रक्रियात्मक स्तरों को कम करने और निश्चित समय-सीमा तय करने का भी प्रस्ताव रखा गया, ताकि निम्न-स्तरीय उत्पादों पर अंकुश लगाया जा सके।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए घोषित किया जाता है।
- किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) रियायती दर पर कृषि ऋण प्रदान करता है।
- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के खातों में दी जाती है।
- कृषि विज्ञान केंद्र जिला स्तर पर कृषि विस्तार सेवाएं प्रदान करते हैं।
मंत्री ने घोषणा की कि ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ अप्रैल से खरीफ सत्र से पहले पुनः प्रारंभ होगा, जिसके तहत वैज्ञानिक गांवों में जाकर कीट नियंत्रण, निर्यात-योग्य फसलें और उन्नत तकनीकों पर मार्गदर्शन देंगे। पूसा कृषि विज्ञान मेला आधुनिक, आत्मनिर्भर और नवाचार-आधारित कृषि प्रणाली के निर्माण की दिशा में एक राष्ट्रीय मंच के रूप में उभर रहा है, जिसे भविष्य में और व्यापक रूप देने की योजना है।