पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष आई. एस. बिंद्रा का निधन: भारतीय क्रिकेट प्रशासन का एक युग समाप्त
भारतीय क्रिकेट प्रशासन के सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में शुमार, पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष इंदरजीत सिंह बिंद्रा का रविवार शाम को नई दिल्ली में निधन हो गया। वे 84 वर्ष के थे। घर पर अचानक अस्वस्थ महसूस करने के बाद उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ गई और लगभग शाम 6:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके अंतिम संस्कार का आयोजन सोमवार को लोधी श्मशान घाट, नई दिल्ली में किया जाएगा।
अंतिम क्षण और शोक संदेश
करीबी सूत्रों के अनुसार, बिंद्रा अपने निवास पर थे जब उन्हें अस्वस्थता महसूस हुई। तत्काल चिकित्सा देखभाल के बावजूद, उनकी स्थिति गंभीर होती गई। उनके पुत्र अमर बिंद्रा और पुत्री उस समय दिल्ली में ही मौजूद थे। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के अध्यक्ष जय शाह ने शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भारतीय क्रिकेट प्रशासन का स्तंभ बताया और कहा कि उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
बीसीसीआई अध्यक्ष के रूप में प्रभावशाली कार्यकाल
आई. एस. बिंद्रा ने 1993 से 1996 तक बीसीसीआई अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। यह कालखंड भारतीय क्रिकेट प्रशासन के ढांचे के विकास के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने निर्णायक सोच और दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ क्रिकेट प्रशासन को मजबूती प्रदान की। सहकर्मी अक्सर उन्हें उन निर्णयों के लिए याद करते हैं जिनमें उन्होंने वैश्विक मंचों पर भारत के हितों की स्पष्ट रूप से रक्षा की।
मोहाली स्टेडियम और पंजाब क्रिकेट का विकास
बिंद्रा का सबसे प्रत्यक्ष योगदान पंजाब क्रिकेट संघ (PCA) स्टेडियम, मोहाली के विकास में रहा। यह स्टेडियम कई विश्व कप मुकाबलों सहित कई अंतरराष्ट्रीय मैचों का आयोजन स्थल बना और उत्तर भारत में शीर्ष स्तरीय क्रिकेट लाने का प्रमुख माध्यम बना। उनके प्रयासों ने पंजाब को राष्ट्रीय क्रिकेट मानचित्र पर विशेष स्थान दिलाया और उभरती प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- बीसीसीआई भारत में क्रिकेट का शासी निकाय है और ICC का प्रमुख सदस्य है।
- आई. एस. बिंद्रा 1993 से 1996 तक बीसीसीआई अध्यक्ष रहे।
- मोहाली स्थित पंजाब क्रिकेट संघ स्टेडियम ने विश्व कप मैचों की मेजबानी की है।
- भारतीय खेल संस्थाएं प्रशासन और अधोसंरचना निर्माण के माध्यम से नीति निर्धारण को प्रभावित करती हैं।
आई. एस. बिंद्रा का करियर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट प्रशासन में कई दशकों तक फैला रहा। वे एक ऐसे प्रशासक के रूप में याद किए जाएंगे जिन्होंने अधिकार और स्पष्टता के साथ काम किया और आलोचकों से भी सम्मान प्राप्त किया। उनके निधन से भारतीय क्रिकेट प्रशासन के एक महत्त्वपूर्ण अध्याय का समापन हुआ है। उनके योगदान ने जिन संस्थागत व्यवस्थाओं और ढांचागत सुविधाओं को जन्म दिया, वे आने वाले समय में भी भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते रहेंगे।