पूर्व केंद्रीय मंत्री के. पी. उन्नीकृष्णन का निधन

पूर्व केंद्रीय मंत्री के. पी. उन्नीकृष्णन का निधन

केरल के कोझिकोड में पूर्व केंद्रीय मंत्री और वडकरा से छह बार लोकसभा सांसद रहे के. पी. उन्नीकृष्णन का मंगलवार तड़के निधन हो गया। वे 89 वर्ष के थे और उम्र से जुड़ी बीमारियों के कारण एक निजी अस्पताल में उपचाराधीन थे। उन्नीकृष्णन 1980 और 1990 के दशक में राष्ट्रीय राजनीति के प्रमुख नेताओं में गिने जाते थे और अपने लंबे संसदीय अनुभव तथा केंद्र सरकार में निभाई गई प्रशासनिक भूमिकाओं के लिए जाने जाते थे।

वडकरा से लगातार छह बार सांसद

के. पी. उन्नीकृष्णन पहली बार 1971 में वडकरा लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित हुए थे। इसके बाद उन्होंने लगातार छह बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया—1971, 1977, 1980, 1984, 1989 और 1991 में। उत्तरी केरल में उनकी लगातार चुनावी सफलता उनके मजबूत जनाधार को दर्शाती है।

वर्ष 1980 से 1982 के बीच वे संसद की लोक लेखा समिति के सदस्य रहे। इस समिति के माध्यम से उन्होंने सरकारी खर्चों की संसदीय निगरानी में योगदान दिया। इसके अलावा 1981 से 1984 तक वे संसद में कांग्रेस (सेक्युलर) के नेता भी रहे।

वी. पी. सिंह सरकार में मंत्री पद

वर्ष 1989 में के. पी. उन्नीकृष्णन प्रधानमंत्री वी. पी. सिंह की सरकार में केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा बने। उन्होंने 1989–90 के दौरान सतही परिवहन और संचार मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली।

उनके कार्यकाल के दौरान खाड़ी युद्ध का संकट उत्पन्न हुआ। इस समय उन्होंने युद्धग्रस्त क्षेत्र में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए बड़े स्तर पर निकासी अभियान का संचालन किया। यह अभियान उस समय भारत द्वारा किए गए सबसे बड़े नागरिक निकासी अभियानों में से एक माना जाता है और भारत की कूटनीतिक तथा प्रशासनिक क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण रहा।

राजनीतिक जीवन और वैचारिक यात्रा

के. पी. उन्नीकृष्णन का जन्म 20 सितंबर 1936 को हुआ था। उन्होंने चेन्नई के मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की और वहीं से कानून की पढ़ाई भी पूरी की। अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत उन्होंने पत्रकार के रूप में की थी।

छात्र जीवन में वे सोशलिस्ट पार्टी और बाद में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से जुड़े रहे। 1960 के दशक में उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में प्रवेश किया और 1962 में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के सदस्य बने। वे वी. के. कृष्ण मेनन के करीबी सहयोगी रहे और एक समय इंदिरा गांधी के भी विश्वासपात्र माने जाते थे।

बाद में राजनीतिक मतभेदों के कारण उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और कांग्रेस (यू) तथा कांग्रेस (एस) जैसी पार्टियों में सक्रिय रहे। वर्ष 1995 में उन्होंने पुनः कांग्रेस में वापसी की।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • के. पी. उन्नीकृष्णन 1989–90 के दौरान सतही परिवहन और संचार के केंद्रीय मंत्री रहे थे।
  • उन्होंने केरल के वडकरा लोकसभा क्षेत्र से लगातार छह बार संसद का प्रतिनिधित्व किया।
  • 1990–91 का खाड़ी युद्ध भारत द्वारा अपने नागरिकों के सबसे बड़े निकासी अभियानों में से एक का कारण बना।
  • लोक लेखा समिति संसद की एक महत्वपूर्ण समिति है जो सरकारी खर्चों की जांच करती है।

के. पी. उन्नीकृष्णन का राजनीतिक जीवन पत्रकारिता, समाजवादी विचारधारा और मुख्यधारा की कांग्रेस राजनीति का मिश्रण रहा। उनका लंबा संसदीय अनुभव और राजनीतिक संक्रमण के दौर में निभाई गई मंत्री की भूमिका उन्हें एक अनुभवी और प्रभावशाली जनप्रतिनिधि के रूप में स्थापित करती है। उन्होंने केरल और राष्ट्रीय राजनीति में सार्वजनिक सेवा की एक महत्वपूर्ण विरासत छोड़ी।

Originally written on March 4, 2026 and last modified on March 4, 2026.

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