पूर्वोत्तर भारत में बांस उद्योग को नया बल: ₹82.5 करोड़ की परियोजनाएं शुरू
गुवाहाटी में केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए दो प्रमुख बांस परियोजनाओं की शुरुआत की है, जिनकी कुल लागत ₹82.5 करोड़ है। केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास एवं संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया द्वारा इन परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया। यह पहल न केवल सतत विकास को बढ़ावा देती है, बल्कि स्थानीय स्तर पर आजीविका सृजन और राष्ट्रीय बाजारों से क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण का माध्यम भी बनेगी।
पूर्वोत्तर में बांस आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
गुवाहाटी में आयोजित उद्घाटन समारोह में मंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर अब केवल एक सीमांत क्षेत्र नहीं, बल्कि भारत के विकास का अग्रणी केंद्र बन चुका है। पिछले 12 वर्षों में क्षेत्र में कनेक्टिविटी, आधारभूत ढांचे और आर्थिक अवसरों में व्यापक सुधार आया है। बांस अब एक रणनीतिक संसाधन के रूप में उभर रहा है जो समावेशी विकास में सहायक है।
इस पहल के तहत बांस शिल्पियों का एक पारंपरिक समूह (artisan cluster) विकसित किया जाएगा, जिसमें 4,400 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे कौशल विकास और जमीनी स्तर पर रोजगार में वृद्धि होगी।
औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और उत्पाद विविधता
परियोजना के अंतर्गत दो इंजीनियर्ड बांस उत्पाद निर्माण इकाइयाँ स्थापित की जाएंगी—एक असम के कार्बी आंगलोंग जिले में और दूसरी नागालैंड के मोकोकचुंग जिले में। इन इकाइयों का उद्देश्य कच्चे बांस की बिक्री पर निर्भरता घटाकर मूल्य-वर्धित उत्पादों को बढ़ावा देना है।
इंजीनियर्ड बांस उत्पाद निर्माण से न केवल निर्माण उद्योग और फर्नीचर क्षेत्र को नया विकल्प मिलेगा, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से टिकाऊ विकल्पों की ओर भी रुझान बढ़ेगा।
बाज़ार संपर्क हेतु सार्वजनिक-निजी भागीदारी
बांस उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों तक पहुँचाने के लिए नॉर्थ ईस्ट केन एंड बैंबू डेवलपमेंट काउंसिल (NECBDC) ने प्रमुख निजी कंपनियों के साथ तीन समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह साझेदारी अमेज़न, फ्लिपकार्ट और ऑल टाइम प्लास्टिक्स जैसी कंपनियों के साथ की गई है।
इन समझौतों से पूर्वोत्तर के बांस उत्पादों को व्यापक बाजार मिलेगा, जिससे शिल्पकारों को उचित मूल्य प्राप्त होगा और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत के कानून के अनुसार, बांस को पेड़ नहीं बल्कि घास की श्रेणी में रखा गया है।
- नॉर्थ ईस्ट केन एंड बैंबू डेवलपमेंट काउंसिल (NECBDC) पूर्वोत्तर में बांस आधारित आजीविका को बढ़ावा देता है।
- इंजीनियर्ड बांस उत्पादों का उपयोग निर्माण और फर्नीचर उद्योग में किया जाता है।
- पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल बाजार पहुंच और उत्पाद की ब्रांडिंग में सहायक होती है।
क्षेत्रीय विकास की नई दिशा
यह परियोजनाएँ न केवल हरित उद्योगों को बढ़ावा देने वाली हैं, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलने वाली भी हैं। पूर्वोत्तर भारत में बांस की भरपूर उपलब्धता और पारंपरिक शिल्प कौशल इस क्षेत्र को बांस-आधारित निर्माण का राष्ट्रीय केंद्र बना सकते हैं। इसके माध्यम से जलवायु-संवेदनशील विकास को बल मिलेगा और स्थानीय समुदायों की आय में भी वृद्धि होगी।
इस प्रकार, यह पहल पर्यावरण संरक्षण, आर्थिक समावेशन और क्षेत्रीय संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो ‘वोकल फॉर लोकल’ को वैश्विक पहचान दिलाने की ओर अग्रसर है।