पूर्वी हिमालय में लाइकेन मॉथ की दो नई प्रजातियों की खोज

पूर्वी हिमालय में लाइकेन मॉथ की दो नई प्रजातियों की खोज

भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) के वैज्ञानिकों ने पूर्वी हिमालयी क्षेत्र में लाइकेन मॉथ की दो नई प्रजातियों की खोज की है। इन नई प्रजातियों का नाम “काउलोसेरा होलोवेई” और “असुरा बक्सा” रखा गया है। भारतीय शोधकर्ताओं द्वारा की गई इस खोज का विवरण 2 मार्च 2026 को अंतरराष्ट्रीय टैक्सोनॉमिक जर्नल “जूटैक्सा” में प्रकाशित किया गया। यह खोज भारत की कीट विविधता, विशेष रूप से लेपिडोप्टेरा समूह से संबंधित प्रजातियों के वैज्ञानिक अध्ययन को और विस्तारित करती है।

सिक्किम और पश्चिम बंगाल में मिली नई प्रजातियां

इन दोनों नई प्रजातियों की पहचान पूर्वी हिमालय क्षेत्र से एकत्र किए गए नमूनों के अध्ययन के दौरान की गई। “काउलोसेरा होलोवेई” प्रजाति सिक्किम के गोलितार क्षेत्र के पास एकत्र नमूनों से पहचानी गई, जबकि “असुरा बक्सा” पश्चिम बंगाल के पनिजोरा क्षेत्र से प्राप्त नमूनों से पहचानी गई। इस शोध कार्य को भारतीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने अंजाम दिया, जिसमें कोलकाता स्थित जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के नवनीत सिंह, जबलपुर के केंद्रीय क्षेत्रीय केंद्र के संतोष सिंह और वरिष्ठ शोध फेलो सृष्टि भट्टाचार्य शामिल थे। इन प्रजातियों का औपचारिक नामकरण उन्हें वैज्ञानिक रूप से मान्यता प्रदान करता है और वैश्विक वर्गीकरण में शामिल करता है।

टैक्सोनॉमिक पहचान का महत्व

टैक्सोनॉमी यानी जीवों का वैज्ञानिक वर्गीकरण जैव विविधता के अध्ययन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। किसी प्रजाति का सही नामकरण और वर्गीकरण वैज्ञानिकों को उसकी पहचान, विकास संबंधी संबंधों और संरक्षण की आवश्यकताओं को समझने में मदद करता है। इस शोध में दो नई प्रजातियों के अलावा लाइकेन मॉथ की सात अन्य प्रजातियों का भी भारत में पहली बार रिकॉर्ड दर्ज किया गया, जिससे देश में मॉथ की प्रजातियों की सूची और समृद्ध हुई है।

विशिष्ट शारीरिक और संरचनात्मक विशेषताएं

वैज्ञानिकों ने इन नई प्रजातियों की पहचान उनके शारीरिक और सूक्ष्म संरचनात्मक गुणों के आधार पर की। पंखों के रंग और पैटर्न, धारियों के निशान और शरीर की संरचना में अंतर महत्वपूर्ण संकेतक साबित हुए। इसके अलावा कीट वर्गीकरण में उपयोग होने वाली विशेष प्रजनन संरचनाओं का भी अध्ययन किया गया। वैज्ञानिकों ने शरीर की सूक्ष्म स्केल संरचना और ब्रिसल्स की व्यवस्था, जिसे चैटोटैक्सी कहा जाता है, का विश्लेषण कर यह पुष्टि की कि ये नमूने विज्ञान के लिए पूरी तरह नई प्रजातियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

पारिस्थितिकी में लाइकेन मॉथ की भूमिका

लाइकेन मॉथ पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं क्योंकि इनके लार्वा लाइकेन पर भोजन करते हैं। लाइकेन ऐसे जीव होते हैं जो वायु प्रदूषण के प्रति अत्यंत संवेदनशील होते हैं। इसलिए लाइकेन मॉथ की उपस्थिति या अनुपस्थिति पर्यावरण की गुणवत्ता का संकेतक मानी जाती है। इन कीटों की निगरानी से वैज्ञानिक विशेष रूप से हिमालय जैसे संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता और पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिति का आकलन कर सकते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत एक प्रमुख वैज्ञानिक संगठन है।
  • लाइकेन मॉथ लेपिडोप्टेरा गण से संबंधित होते हैं, जिसमें तितलियां और अन्य मॉथ प्रजातियां भी शामिल हैं।
  • पूर्वी हिमालय विश्व के प्रमुख जैव विविधता हॉटस्पॉट में से एक माना जाता है।
  • “जूटैक्सा” एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक जर्नल है जो पशु जैव विविधता और टैक्सोनॉमी से संबंधित शोध प्रकाशित करता है।

पूर्वी हिमालय में लाइकेन मॉथ की इन नई प्रजातियों की खोज इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को रेखांकित करती है। साथ ही यह शोध यह भी दर्शाता है कि हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र अभी भी वैज्ञानिक खोजों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है और इसके संरक्षण की आवश्यकता और अधिक बढ़ जाती है।

Originally written on March 13, 2026 and last modified on March 13, 2026.

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