पुस्तकमने के अंके गौड़ा को पद्मश्री 2026: ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाने की पहल
भारत में ज्ञान के लोकतंत्रीकरण की दिशा में हो रहे जमीनी प्रयासों को नई पहचान मिली है, जब कर्नाटक के अंके गौड़ा को पद्मश्री 2026 से सम्मानित किया गया। एक समय बस कंडक्टर रहे गौड़ा को यह सम्मान ‘पुस्तकमने’ की स्थापना के लिए मिला है, जिसे अब भारत की सबसे बड़ी मुफ्त-पुस्तक पहुँच पहल माना जाता है। यह पहल दूरदराज और वंचित समुदायों तक किताबें पहुँचाने के लिए समर्पित रही है।
सार्वजनिक परिवहन से सार्वजनिक ज्ञान तक का सफर
अंके गौड़ा की यात्रा उनके स्वयं के अनुभव और सामाजिक जागरूकता से प्रेरित रही। कर्नाटक में बस कंडक्टर की नौकरी करते हुए उन्होंने महसूस किया कि किताबों और अध्ययन स्थलों की अनुपलब्धता समाज के एक बड़े वर्ग के विकास को बाधित कर रही है। इसी से प्रेरित होकर उन्होंने ‘पुस्तकमने’ की शुरुआत की, जिसका मूल उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक बाधाओं को समाप्त कर पढ़ाई को सबके लिए सुलभ बनाना था। यह पहल छोटी शुरुआत के साथ शुरू हुई, लेकिन समय के साथ सामुदायिक सहयोग और स्वैच्छिक योगदान से विस्तारित होती गई।
पुस्तकमने का बढ़ता साहित्यिक विस्तार
आज पुस्तकमने दो मिलियन से अधिक पुस्तकों का भंडार बन चुका है। इसमें 20 से अधिक भाषाओं की पुस्तकें, दुर्लभ पांडुलिपियाँ, ऐतिहासिक ग्रंथ और समकालीन रचनाएँ शामिल हैं। इसका विकेन्द्रीकृत मॉडल यह सुनिश्चित करता है कि किताबें सिर्फ एक स्थान तक सीमित न रहें, बल्कि गांवों, कस्बों और वंचित क्षेत्रों तक पहुँचे। इसने न केवल साहित्यिक धरोहर को संरक्षित किया, बल्कि पढ़ने की आदत को भी समाज में बढ़ावा दिया है।
पद्म पुरस्कार 2026 और जमीनी प्रभाव पर केंद्रित दृष्टिकोण
पद्मश्री भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट सेवा के लिए दिया जाता है। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित किए गए पद्म पुरस्कार 2026 में इस बार विशेष रूप से दलित, आदिवासी और पिछड़े समुदायों से जुड़े गुमनाम नायकों को प्राथमिकता दी गई। अंके गौड़ा का चयन इसी दिशा में शिक्षा आधारित सामाजिक सशक्तिकरण और समुदाय-केंद्रित पहल के महत्व को रेखांकित करता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- पद्मश्री भारत का चौथा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है।
- पद्म पुरस्कार हर साल गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित किए जाते हैं।
- ये पुरस्कार शिक्षा, सामाजिक कार्य, संस्कृति आदि क्षेत्रों में योगदान के लिए दिए जाते हैं।
- हालिया चयन में जमीनी स्तर के कार्यों को विशेष मान्यता दी गई है।
साक्षरता: सामाजिक समावेशन का माध्यम
‘पुस्तकमने’ के माध्यम से अंके गौड़ा का कार्य समावेशी शिक्षा का आदर्श बन चुका है। उन्होंने मुफ्त पुस्तक उपलब्ध करवा कर साक्षरता, आत्म-अध्ययन और सांस्कृतिक संरक्षण को बढ़ावा दिया है। यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत प्रयासों की सराहना है, बल्कि यह दर्शाता है कि संस्थागत सीमाओं से बाहर भी सामाजिक परिवर्तन संभव है।
अंके गौड़ा की कहानी इस बात की मिसाल है कि एक व्यक्ति की पहल लाखों ज़िंदगियों को छू सकती है और शिक्षा के माध्यम से सामाजिक समरसता की नींव रख सकती है।