पुर्तगाल में मिला 15 करोड़ वर्ष पुराना डायनासोर का दुर्लभ घोंसला
पुर्तगाल के टोरेस वेद्रास क्षेत्र के सैंटा क्रूज़ बीच की चट्टानों में वैज्ञानिकों को लगभग 15 करोड़ वर्ष पुराने डायनासोर के अंडों का एक दुर्लभ घोंसला मिला है। इस घोंसले में कुल दस अंडे सुरक्षित अवस्था में पाए गए हैं। यह खोज ऊपरी जुरासिक काल के जीव-जंतुओं और उनके प्रजनन व्यवहार को समझने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस खोज की पहचान शोधकर्ता कार्लोस नतारियो ने की, जो टोरेस वेद्रास नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के अंतर्गत कार्यरत अनुसंधान केंद्र सीआई2पैलियो से जुड़े हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज उस समय के प्राचीन पारिस्थितिकी तंत्र और डायनासोर के जीवन के बारे में नई जानकारी प्रदान करेगी।
सैंटा क्रूज़ बीच की चट्टानों में मिला दुर्लभ घोंसला
यह जीवाश्म घोंसला लिस्बन जिले के सैंटा क्रूज़ बीच की बलुआ पत्थर वाली चट्टानों के भीतर पाया गया। वैज्ञानिकों ने पाया कि दसों अंडे एक साथ उसी स्थान पर सुरक्षित हैं जहाँ उन्हें मूल रूप से रखा गया था। आमतौर पर ऐसे जीवाश्म खोजों में अंडे बाढ़ या भूवैज्ञानिक गतिविधियों के कारण बिखर जाते हैं, लेकिन इस मामले में अंडे अपनी मूल स्थिति में ही सुरक्षित मिले। इससे यह संकेत मिलता है कि अंडे रेतीले नदी तट के वातावरण में रखे गए थे, जहाँ प्राकृतिक तलछट ने उन्हें जल्दी ढककर संरक्षित कर दिया।
डायनासोर के प्रजनन व्यवहार के संकेत
घोंसले की संरचना से यह संकेत मिलता है कि डायनासोर ने जानबूझकर नदी किनारे के क्षेत्र को अंडे देने के लिए चुना था। आसपास पाए गए दानेदार बलुआ पत्थर से पता चलता है कि उस समय यह स्थान नरम और रेतीला था। ऐसी सतह पर अंडे रखने के बाद वे जल्द ही तलछट से ढक गए होंगे, जिससे वे सुरक्षित रह सके। पानी के बहाव के कारण अंडों के टूटने या बहने के कोई संकेत नहीं मिले, जिससे वैज्ञानिकों को डायनासोर के घोंसला बनाने के तरीकों को समझने में मदद मिल रही है।
सीटी स्कैन तकनीक से किया जा रहा अध्ययन
घोंसले को सावधानीपूर्वक निकालकर टोरेस वेद्रास नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी की प्रयोगशाला में ले जाया गया है। यहां वैज्ञानिक उन्नत सीटी स्कैन तकनीक का उपयोग करके अंडों का अध्ययन कर रहे हैं। इस प्रक्रिया को “वर्चुअल उत्खनन” कहा जाता है। इसके माध्यम से अंडों के अंदर की संरचना का त्रि-आयामी चित्र तैयार किया जा सकता है, बिना जीवाश्म को नुकसान पहुँचाए। वैज्ञानिक उम्मीद कर रहे हैं कि इस तकनीक से भ्रूण की हड्डियों के निशान और अंडों के खोल की संरचना के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकेगी।
डायनासोर की प्रजाति के बारे में सुराग
वैज्ञानिक अभी भी इन अंडों का विश्लेषण कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन्हें किस प्रकार के डायनासोर ने दिया था। प्रारंभिक जांच से संकेत मिलता है कि ये अंडे संभवतः मांसाहारी थेरोपोड डायनासोर के थे। इन अंडों का आकार लगभग पाँच सेंटीमीटर व्यास का है। अंडों की तीन-आयामी व्यवस्था भी मांसाहारी डायनासोरों के घोंसले के पैटर्न से मिलती-जुलती है, जिससे उनके प्रजनन व्यवहार के बारे में महत्वपूर्ण संकेत मिलते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ऊपरी जुरासिक काल लगभग 16.3 करोड़ वर्ष से 14.5 करोड़ वर्ष पहले के बीच का समय माना जाता है।
- थेरोपोड डायनासोर दो पैरों पर चलने वाले मांसाहारी जीव थे, जो जुरासिक और क्रेटेशियस काल में पाए जाते थे।
- जीवाश्मों का अध्ययन करने में सीटी स्कैन तकनीक का उपयोग बिना नुकसान पहुँचाए आंतरिक संरचना देखने के लिए किया जाता है।
- पुर्तगाल जुरासिक काल के कई महत्वपूर्ण डायनासोर जीवाश्मों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।
यह खोज वैज्ञानिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे न केवल डायनासोर के प्रजनन व्यवहार के बारे में जानकारी मिलती है, बल्कि उस समय के प्राकृतिक वातावरण और पारिस्थितिकी तंत्र को समझने में भी मदद मिलती है। आने वाले समय में इन अंडों के विस्तृत अध्ययन से प्रागैतिहासिक जीवों के जीवन के बारे में और भी नई जानकारियाँ सामने आ सकती हैं।