पिटोन द ला फुर्नेज़ में पुनः ज्वालामुखीय विस्फोट: निगरानी और सतर्कता जारी
हिंद महासागर क्षेत्र के अत्यंत सक्रिय ज्वालामुखियों में शामिल पिटोन द ला फुर्नेज़ में एक बार फिर प्रवाही (इफ्यूसिव) विस्फोट शुरू हो गया है। ला रीयूनियन द्वीप पर स्थित इस ज्वालामुखी में 13 फरवरी को स्थानीय समयानुसार सुबह 10:06 बजे भूकंपीय हलचल के बाद नया विस्फोट आरंभ हुआ। ताजा भूकंपीय संकट के संकेत मिलने के तुरंत बाद लावा दक्षिण-दक्षिण-पूर्वी ढलान की दरारों से निकलकर एंक्लो फूके काल्डेरा के भीतर बहने लगा। प्रशासन ने एहतियातन चेतावनी स्तर सक्रिय करते हुए काल्डेरा क्षेत्र में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है।
दरारों से लावा प्रवाह और प्रशासनिक कदम
विस्फोट के कुछ घंटों के भीतर लावा लगभग 1,500 मीटर की ऊँचाई तक नीचे उतर आया। देर शाम तक लावा प्रवाह राष्ट्रीय राजमार्ग-2 के समीप पहुँचने की सूचना दी गई, हालांकि मार्ग को बंद नहीं किया गया। सुरक्षा कारणों से चालकों को रास्ते में न रुकने की हिदायत दी गई ताकि यातायात अवरोध और दुर्घटनाओं से बचा जा सके।
एंक्लो फूके के सभी प्रवेश द्वार, जिनमें प्रमुख दर्शनीय स्थल भी शामिल हैं, बंद कर दिए गए। क्षेत्र में मौजूद पर्यटकों और ट्रेकर्स को सुरक्षा बलों द्वारा सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया। चूँकि लावा प्रवाह निर्जन क्षेत्र के भीतर सीमित है और राख उत्सर्जन नगण्य है, इसलिए आबादी वाले इलाकों के लिए फिलहाल कोई सीधा खतरा नहीं है।
भूकंपीय संकेत और भू-आकृतिक परिवर्तन
निगरानी तंत्र ने 13 फरवरी को शिखर क्षेत्र के नीचे 551 ज्वालामुखी-टेक्टोनिक भूकंप दर्ज किए, साथ ही दो गहरे भूकंपीय घटनाएँ भी रिकॉर्ड की गईं। उपग्रह आधारित भू-स्थानिक मापन प्रणालियों ने शिखर क्षेत्र में भूमि के फूलने (इन्फ्लेशन) के संकेत दिए, जो उथले मैग्मा भंडार में दबाव बढ़ने का सूचक है।
दूरस्थ स्टेशनों पर भी भूमि-विस्तार दर्ज किया गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि गहराई में स्थित मैग्मा स्रोत भी सक्रिय है। इससे पहले फरवरी की शुरुआत में 343 सूक्ष्म भूकंपों का झुंड दर्ज किया गया था, जो मैग्मा के ऊपर की ओर प्रवाह का संकेत था। वैज्ञानिकों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि मैग्मा तंत्र में दबाव बना हुआ है और पुनः सतही गतिविधि संभव है।
जनवरी विस्फोट और पुनः सक्रियता
इस वर्ष ज्वालामुखीय गतिविधि की शुरुआत 18 जनवरी को हुई थी, जब भूकंपीय संकट के बाद काल्डेरा के उत्तरी भाग में चार दरारें खुलीं। उस दौरान लावा फव्वारे लगभग 20 मीटर ऊँचाई तक उठे और प्रवाह लगभग 0.6 किलोमीटर तक बढ़ा। 20 जनवरी तक लावा उत्सर्जन थम गया, केवल गैस उत्सर्जन और ठंडी होती लावा की चमक शेष रही।
जनवरी के अंतिम सप्ताह में प्रतिदिन औसतन 20 उथले भूकंप दर्ज किए गए, जिससे स्पष्ट हुआ कि मैग्मा भंडार पुनः दबाव ग्रहण कर रहा है। वर्तमान विस्फोट उसी दबाव का परिणाम माना जा रहा है।
यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण बिंदु
पिटोन द ला फुर्नेज़ हिंद महासागर क्षेत्र के सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है।
ला रीयूनियन फ्रांस का एक विदेशी विभाग है, जो मेडागास्कर के पूर्व में स्थित है।
प्रवाही विस्फोटों में लावा का शांत प्रवाह होता है और राख का उत्सर्जन सीमित रहता है।
जीएनएसएस तकनीक से भूमि-विकृति का पता लगाया जाता है, जो मैग्मा की गतिविधि दर्शाती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
ला रीयूनियन द्वीप ज्वालामुखीय उत्पत्ति का है और इसका भू-आकृतिक स्वरूप अत्यंत विविध है।
पिटोन द ला फुर्नेज़ विश्व के सर्वाधिक अध्ययन किए जाने वाले ज्वालामुखियों में शामिल है।
काल्डेरा ज्वालामुखी के धंसने से निर्मित विशाल गड्ढेनुमा संरचना होती है।
ज्वालामुखीय गतिविधि के पूर्व भूकंपीय झटके अक्सर चेतावनी संकेत के रूप में कार्य करते हैं।
वर्तमान परिस्थितियों में प्रशासन और वैज्ञानिक संस्थान सतत निगरानी बनाए हुए हैं। चूँकि लावा प्रवाह सीमित और नियंत्रित क्षेत्र में है, इसलिए तत्काल कोई व्यापक खतरा नहीं है। फिर भी भूगर्भीय गतिविधियों की अनिश्चित प्रकृति को देखते हुए सतर्कता और वैज्ञानिक विश्लेषण अत्यंत आवश्यक है।