पालघर के बोइसर एमआईडीसी में ओलियम गैस रिसाव से मची अफरा-तफरी

पालघर के बोइसर एमआईडीसी में ओलियम गैस रिसाव से मची अफरा-तफरी

महाराष्ट्र के पालघर जिले के बोइसर एमआईडीसी औद्योगिक क्षेत्र में एक रासायनिक इकाई से खतरनाक ओलियम गैस के रिसाव की घटना ने आसपास के इलाकों में दहशत पैदा कर दी। यह घटना मुंबई के बाहरी क्षेत्र में स्थित भगेड़िया इंडस्ट्रीज लिमिटेड के एक संयंत्र में हुई, जहां से सफेद धुएं का घना बादल तेज हवाओं के कारण तेजी से फैल गया। गैस का प्रभाव लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में महसूस किया गया, जिसके चलते प्रशासन को तत्काल आपातकालीन कदम उठाने पड़े। संभावित स्वास्थ्य जोखिम को देखते हुए हजारों लोगों को एहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया।

घटना और तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई

यह गैस रिसाव दोपहर लगभग दो बजे संयंत्र के भीतर स्थित 2500 लीटर क्षमता वाले ओलियम डे टैंक से हुआ। ओलियम, जिसे फ्यूमिंग सल्फ्यूरिक एसिड भी कहा जाता है, एक अत्यधिक संक्षारक औद्योगिक रसायन है जिसका उपयोग कई रासायनिक निर्माण प्रक्रियाओं में किया जाता है।

टैंक से अचानक गैस निकलने के कारण घना सफेद धुआं फैल गया, जिसने आसपास के औद्योगिक और आवासीय क्षेत्रों को प्रभावित किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने जिला आपदा प्रबंधन योजना के तहत आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र सक्रिय कर दिया।

बोइसर औद्योगिक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निकासी

गैस रिसाव के कारण प्रशासन ने बड़े पैमाने पर एहतियाती निकासी का आदेश दिया। प्रभावित क्षेत्र के पास स्थित तारापुर विद्यामंदिर स्कूल से लगभग 1600 छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया। इसके अलावा भगेड़िया इंडस्ट्रीज और आसपास के अन्य औद्योगिक प्रतिष्ठानों से करीब 1000 से अधिक श्रमिकों को भी हटाकर सुरक्षित क्षेत्रों में पहुंचाया गया।

अधिकारियों के अनुसार तेज हवाओं के कारण गैस के धुएं का फैलाव तेजी से हो रहा था, जिससे स्वास्थ्य पर संभावित खतरा बढ़ गया था। इसी वजह से व्यापक निकासी का निर्णय लिया गया ताकि किसी गंभीर स्थिति से बचा जा सके।

आपातकालीन दलों द्वारा रिसाव पर नियंत्रण

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र और दमकल विभाग की विशेष टीमें मौके पर भेजी गईं। शुरुआती चरण में घने धुएं के कारण बचाव कार्यों में काफी कठिनाई आई, क्योंकि दृश्यता कम होने से रिसाव के स्रोत तक पहुंचना मुश्किल था।

बाद में विशेष सुरक्षा उपकरण और स्व-निहित श्वसन उपकरणों से लैस टीमों ने मौके पर पहुंचकर रिसाव वाले टैंक के आसपास रेत की बोरियां रखीं। इस उपाय से धुएं के फैलाव को कम किया गया और अंततः रिसाव पर नियंत्रण पा लिया गया।

स्वास्थ्य प्रभाव और प्रशासनिक सलाह

घटना के दौरान तीन लोगों को गैस के संपर्क में आने के कारण आंखों में हल्की जलन की शिकायत हुई, जिन्हें तुरंत चिकित्सीय सहायता प्रदान की गई। पालघर की जिला कलेक्टर इंदु रानी जाखर ने बताया कि प्रशासन कई एजेंसियों के साथ मिलकर स्थिति की लगातार निगरानी कर रहा है।

स्थानीय निवासियों को घरों के भीतर रहने, घबराहट से बचने और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई, ताकि स्थिति पूरी तरह सामान्य होने तक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ओलियम या फ्यूमिंग सल्फ्यूरिक एसिड, सल्फर ट्राइऑक्साइड को सघन सल्फ्यूरिक एसिड में घोलकर बनने वाला रासायनिक घोल है।
  • राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल भारत की विशेष आपदा प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया इकाई है।
  • भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र खतरनाक रासायनिक घटनाओं से निपटने में वैज्ञानिक और तकनीकी सहायता प्रदान करता है।
  • महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम राज्य में औद्योगिक क्षेत्र और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए जिम्मेदार संस्था है।

यह घटना औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों और आपदा प्रबंधन की तैयारी के महत्व को रेखांकित करती है। त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई और विभिन्न एजेंसियों के समन्वय से स्थिति को नियंत्रित किया गया, जिससे बड़े नुकसान को टाला जा सका। ऐसे मामलों में सतर्कता, तकनीकी सहायता और सामूहिक प्रयास सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Originally written on March 5, 2026 and last modified on March 5, 2026.

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