पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर बढ़ा सैन्य तनाव, क्षेत्रीय स्थिरता पर संकट
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर रूप ले चुका है। सीमा पार झड़पों के बाद इस्लामाबाद द्वारा “खुला युद्ध” घोषित किए जाने से स्थिति और अधिक विस्फोटक हो गई है। हालिया घटनाक्रम में पाकिस्तान ने काबुल, कंधार और पकतिया में हवाई हमले किए, जिसके कुछ घंटों पहले अफगान बलों ने पाकिस्तानी सीमा चौकियों पर हमले शुरू किए थे। दोनों देशों ने भारी हताहतों का दावा किया है, हालांकि आंकड़ों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। इससे क्षेत्रीय स्थिरता और सीमावर्ती नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।
काबुल और कंधार पर हवाई हमले
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में विस्फोटों की खबर सामने आई, जबकि कंधार और पकतिया प्रांतों में भी हमलों की पुष्टि की गई। पाकिस्तान ने इन हवाई हमलों को “ऑपरेशन गज़ब लिल-हक” का हिस्सा बताया और कहा कि यह कार्रवाई सीमा पार से हुई गोलीबारी के जवाब में की गई। इस्लामाबाद के अनुसार, हमलों का लक्ष्य अफगान सैन्य प्रतिष्ठान, ब्रिगेड और कोर मुख्यालय तथा लॉजिस्टिक ठिकाने थे।
वहीं, अफगान अधिकारियों ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। काबुल ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने नागरिक क्षेत्रों के निकट भी कार्रवाई की, जिससे आम लोगों में दहशत फैल गई।
जमीनी कार्रवाई और हताहतों के दावे
अफगानिस्तान ने दावा किया कि उसके बलों ने जवाबी जमीनी हमला कर कई पाकिस्तानी चौकियों पर कब्जा कर लिया और 55 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया। साथ ही, आठ अफगान सैनिकों की मौत और 11 के घायल होने की जानकारी दी गई।
दूसरी ओर, पाकिस्तान ने इन आंकड़ों को खारिज करते हुए कहा कि उसके केवल दो सैनिक मारे गए और तीन घायल हुए। इस्लामाबाद ने दावा किया कि उसकी जवाबी कार्रवाई में 133 अफगान लड़ाके मारे गए और 200 से अधिक घायल हुए। इसके अलावा, कई सैन्य प्रतिष्ठानों को नष्ट करने का भी दावा किया गया। दोनों देशों के बीच रणनीतिक टोरखम सीमा चौकी के पास भी भारी गोलीबारी हुई।
नागरिकों पर प्रभाव और सीमा पर व्यवधान
सीमा पर बढ़ते संघर्ष का सबसे अधिक असर आम नागरिकों पर पड़ा है। अफगान अधिकारियों के अनुसार, टोरखम के निकट एक शरणार्थी शिविर में मोर्टार गिरने से कई लोग घायल हुए, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं। संभावित हमलों के डर से स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है।
पाकिस्तान की ओर भी सीमावर्ती गांवों के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है। व्यापार और आवाजाही पहले से ही बाधित थी, और वर्तमान हालात ने सीमा को लगभग बंद कर दिया है, जिससे आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ड्यूरंड रेखा अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच विवादित सीमा रेखा है।
- टोरखम दोनों देशों के बीच एक प्रमुख व्यापार और पारगमन बिंदु है।
- तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) अफगान तालिबान से अलग संगठन है, हालांकि वैचारिक रूप से समानता रखता है।
- कतर ने अतीत में दोनों देशों के बीच संघर्षविराम वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाई है।
हालिया घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र में कूटनीतिक चिंता बढ़ा दी है। संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। यदि तनाव को शीघ्र कूटनीतिक माध्यमों से नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण बन सकता है। ऐसे में संवाद और विश्वास-निर्माण के उपाय ही दीर्घकालिक शांति की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे।