पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो मामलों की पुष्टि, राज्य में हाई अलर्ट जारी

पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो मामलों की पुष्टि, राज्य में हाई अलर्ट जारी

पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस संक्रमण के दो मामलों की पुष्टि के बाद राज्य को हाई अलर्ट पर रखा गया है। पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) ने दोनों सैंपलों में निपाह वायरस की पुष्टि की है, जो पहले AIIMS कल्याणी में परीक्षण किए गए थे। दोनों मरीज – बरासत अस्पताल में भर्ती दो नर्सें – गंभीर हालत में वेंटिलेटर पर हैं, जिनमें से एक कोमा में है।

प्रयोगशाला पुष्टि और रोगियों की स्थिति

नर्सों के सैंपल पहले AIIMS कल्याणी में जांचे गए और बाद में पुष्टिकरण के लिए पुणे भेजे गए। NIV ने दोनों मामलों को निपाह संक्रमण के रूप में पुष्टि की। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि एक बर्दवान अस्पताल के डॉक्टर, जो संक्रमित नर्सों के संपर्क में थे, को हल्का बुखार हुआ है और उन्हें निगरानी में रखा गया है।

संपर्क ट्रेसिंग और आइसोलेशन

राज्य स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमित नर्सों के 120 से अधिक करीबी संपर्कों की पहचान की है, जिनमें परिवारजन, डॉक्टर, नर्सें, एंबुलेंस चालकों सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। सभी को होम आइसोलेशन में रखा गया है और संपर्क ट्रेसिंग का कार्य जारी है। कई संपर्कों के सैंपल AIIMS कल्याणी भेजे गए हैं। काटवा और बर्दवान जिलों में भी दर्जनों मेडिकल स्टाफ को एहतियातन निगरानी में रखा गया है।

संक्रमण का संभावित स्रोत

संक्रमण का स्रोत अभी स्पष्ट नहीं है। प्रारंभिक जांच में यह संभावना जताई जा रही है कि नर्सों को यह संक्रमण बरासत अस्पताल में मानव-से-मानव संपर्क से हुआ हो, जहां कुछ सप्ताह पहले एक स्वास्थ्यकर्मी की मृत्यु निपाह जैसे लक्षणों के साथ हुई थी। अन्य संभावनाओं में संक्रमित फल या कच्ची खजूर की रस, जिनके माध्यम से फ्रूट बैट्स (फल चमगादड़) वायरस फैलाते हैं, को भी जांच में शामिल किया गया है। दोनों नर्सों ने हाल ही में पूर्व मिदनापुर और काटवा की यात्रा की थी, लेकिन राज्य से बाहर का कोई बड़ा यात्रा इतिहास नहीं है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • निपाह वायरस एक जूनोटिक रोग है जो पशुओं से मनुष्यों में फैलता है।
  • Pteropus वंश के फल चमगादड़ निपाह वायरस के प्राकृतिक वाहक माने जाते हैं।
  • मानव-से-मानव संक्रमण, विशेषकर हेल्थकेयर सेटिंग्स में, दस्तावेज़ किया गया है।
  • NIV पुणे भारत की प्रमुख प्रयोगशाला है जो वायरल प्रकोपों की पुष्टि करती है।

केंद्र-राज्य समन्वय और निगरानी

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा भेजी गई नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम राज्य स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ मिलकर स्थिति की निगरानी कर रही है। सभी प्रभावित अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल कड़ाई से अपनाए जा रहे हैं और निगरानी व्यवस्था को तेज किया गया है ताकि आगे संक्रमण न फैल सके।

यह स्थिति भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र के लिए एक गंभीर चुनौती है, जिससे सतर्कता, शीघ्र परीक्षण और सामुदायिक स्तर पर जागरूकता के माध्यम से ही निपटा जा सकता है।

Originally written on January 14, 2026 and last modified on January 14, 2026.

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