पश्चिम एशिया में तनाव के बीच ऑपरेशन संकल्प के तहत भारतीय नौसेना सतर्क

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच ऑपरेशन संकल्प के तहत भारतीय नौसेना सतर्क

पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों में बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच भारत सरकार सुरक्षा स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। संभावित संकट की स्थिति में मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों के लिए भारतीय नौसेना को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। रक्षा अधिकारियों के अनुसार ऑपरेशन संकल्प के तहत तैनात नौसैनिक संसाधनों को सतर्क अवस्था में रखा गया है ताकि आवश्यकता पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। सरकार विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए हुए है और स्थिति से जुड़ी जानकारी नियमित रूप से साझा की जा रही है, जिससे हालात बिगड़ने पर त्वरित निर्णय लिया जा सके।

ऑपरेशन संकल्प के तहत भारतीय नौसेना की तैनाती

ऑपरेशन संकल्प के अंतर्गत भारतीय नौसेना के दो युद्धपोत—एक फ्रिगेट और एक विध्वंसक—वर्तमान में अदन की खाड़ी और ओमान की खाड़ी क्षेत्र में तैनात हैं। इन जहाजों को वर्ष 2019 से इस क्षेत्र में मुख्य रूप से समुद्री डकैती विरोधी अभियानों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैनात किया गया है।

इस तैनाती का उद्देश्य भारतीय ध्वज वाले व्यापारी जहाजों की सुरक्षा करना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर सुरक्षा बनाए रखना है। अधिकारियों ने बताया कि ये युद्धपोत बहुउद्देश्यीय क्षमता रखते हैं और आवश्यकता पड़ने पर इन्हें तुरंत मानवीय सहायता, निकासी अभियान तथा आपदा राहत मिशनों में लगाया जा सकता है।

क्षेत्रीय समुद्री सहयोग में आईएनएस सूरत की भूमिका

ऑपरेशन संकल्प के तहत तैनात जहाजों के अलावा भारतीय नौसेना का युद्धपोत आईएनएस सूरत इस समय बहरीन में तैनात है। यह तैनाती क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा सहयोग के तहत की गई है। पश्चिम एशिया के समुद्री क्षेत्र में भारतीय नौसैनिक उपस्थिति साझेदार देशों के साथ सहयोग को मजबूत करती है और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करती है।

भारत के लिए यह क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के ऊर्जा आयात और व्यापार का बड़ा हिस्सा इन्हीं समुद्री मार्गों से होकर गुजरता है। इसलिए खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता भारत की आर्थिक सुरक्षा के लिए भी आवश्यक मानी जाती है।

कैबिनेट समिति ऑन सिक्योरिटी की बैठक

पश्चिम एशिया में उभरती स्थिति की समीक्षा के लिए 1 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट समिति ऑन सिक्योरिटी की बैठक आयोजित की गई। यह समिति भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा से जुड़े निर्णयों के लिए सर्वोच्च नीति-निर्माण निकाय मानी जाती है।

बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। अधिकारियों ने समिति को क्षेत्रीय घटनाक्रम की जानकारी दी और भारत के रणनीतिक हितों, आर्थिक स्थिरता तथा पश्चिम एशिया में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर संभावित प्रभावों का आकलन किया।

भारत की संकट प्रतिक्रिया क्षमता

भारत का नौसैनिक बल संकट के समय मानवीय सहायता और निकासी अभियानों में व्यापक अनुभव रखता है। भारतीय महासागर क्षेत्र में विभिन्न आपात स्थितियों के दौरान भारतीय नौसेना ने कई सफल राहत और बचाव अभियान संचालित किए हैं। ऐसे अभियानों ने यह साबित किया है कि भारतीय नौसेना संकट की स्थिति में तेज और प्रभावी प्रतिक्रिया देने में सक्षम है।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार यदि पश्चिम एशिया में स्थिति और गंभीर होती है, तो भारत के पास आवश्यक योजनाएं और संसाधन पहले से तैयार हैं। इससे जरूरत पड़ने पर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और राहत कार्यों को तेजी से लागू किया जा सकेगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ऑपरेशन संकल्प वर्ष 2019 में खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया गया था।
  • अदन की खाड़ी भारतीय महासागर को लाल सागर और स्वेज नहर से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।
  • कैबिनेट समिति ऑन सिक्योरिटी भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े निर्णय लेने वाली सर्वोच्च समिति है।
  • भारतीय नौसेना क्षेत्रीय संकटों के दौरान अक्सर मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियान संचालित करती है।

पश्चिम एशिया में मौजूदा तनाव के बीच भारत की यह तैयारी दर्शाती है कि देश अपने रणनीतिक हितों, समुद्री व्यापार मार्गों और विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है। भारतीय नौसेना की सक्रिय तैनाती संकट की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने की क्षमता को भी मजबूत करती है।

Originally written on March 6, 2026 and last modified on March 6, 2026.

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