पलामू टाइगर रिजर्व की ‘वनजीवी दीदी’ पहल, महिला सशक्तिकरण के साथ वन संरक्षण की नई दिशा
झारखंड स्थित पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) ने वन और वन्यजीव संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए ‘वनजीवी दीदी’ पहल की शुरुआत की है। यह सामुदायिक आधारित कार्यक्रम महिलाओं को सशक्त बनाकर जैव विविधता की रक्षा के उद्देश्य से तैयार किया गया है। पीटीआर के दक्षिणी प्रभाग द्वारा शुरू की गई इस योजना का लक्ष्य जमीनी स्तर पर जागरूकता बढ़ाना और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है।
महिलाएं बनेंगी वन संरक्षण की दूत
इस पहल के अंतर्गत 17 चिन्हित गांवों से प्रत्येक में 18 शिक्षित महिलाओं का चयन ‘वनजीवी दीदी’ के रूप में किया गया है। इनमें अधिकांश महिलाएं स्नातक या उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं, जबकि कुछ सामुदायिक पर्यावरणीय गतिविधियों में अनुभवी हैं। ये महिलाएं अपने गांवों में वन और वन्यजीव संरक्षण की प्रेरक के रूप में कार्य करेंगी।
अधिकारियों का मानना है कि परिवार और समाज में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका उन्हें व्यवहार परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बनाती है। वे शिकार, अवैध कटाई और वन विनाश जैसी गतिविधियों को हतोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
दूरस्थ गांवों पर विशेष ध्यान
इस कार्यक्रम की शुरुआत 17 फरवरी को गरु रेंज में की गई। हेनार, सुरकुमी, हसुआ, अरमु, कोटाम और पांद्रा जैसे कई चयनित गांव पीटीआर के भीतरी और दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित हैं। इन क्षेत्रों की कई महिलाएं स्नातकोत्तर और डिप्लोमा पाठ्यक्रम पूरा कर चुकी हैं, जो इस पहल की क्षमता को दर्शाता है।
वन विभाग के अनुसार, कई बार वन अपराध स्थानीय समुदायों के भीतर से ही शुरू होते हैं। इसलिए महिलाओं के माध्यम से परिवार के सदस्यों को अवैध गतिविधियों से रोकना सामाजिक स्तर पर एक प्रभावी निवारक तंत्र स्थापित कर सकता है।
प्रोत्साहन और विस्तारित दायित्व
प्रत्येक ‘वनजीवी दीदी’ को प्रति माह 3,000 रुपये का प्रोत्साहन दिया जाएगा। प्रारंभिक रूप से यह योजना दो माह के लिए लागू की गई है, जिसके बाद इसके परिणामों की समीक्षा की जाएगी। राज्य वन विभाग से औपचारिक स्वीकृति और वित्तीय सहयोग के लिए प्रस्ताव भी भेजा गया है।
संरक्षण कार्यों के अतिरिक्त, ये महिलाएं गांवों में बुनियादी शैक्षणिक सहायता प्रदान करेंगी, विद्यालय नामांकन को बढ़ावा देंगी तथा सरकारी रोजगार और विकास योजनाओं की जानकारी प्रसारित करेंगी। यह पहल ‘सखी मंडल’ और पैरा-लीगल स्वयंसेवकों की तर्ज पर समुदाय और वन प्रशासन के बीच सेतु का कार्य करेगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
* पलामू टाइगर रिजर्व झारखंड में स्थित है और ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ का हिस्सा है।
* वन्यजीव संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी एक महत्वपूर्ण रणनीति मानी जाती है।
* प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत वर्ष 1973 में बंगाल टाइगर की सुरक्षा के लिए की गई थी।
* इको-डेवलपमेंट कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों की वन संसाधनों पर निर्भरता कम करना है।
‘वनजीवी दीदी’ पहल भारत में समावेशी और समुदाय-आधारित संरक्षण मॉडल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। महिलाओं को वन संरक्षण की प्रक्रिया में शामिल कर पलामू टाइगर रिजर्व स्थानीय समुदायों और वन पारिस्थितिकी तंत्र के बीच संतुलित सह-अस्तित्व को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। यह मॉडल भविष्य में अन्य संरक्षित क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।