पर्यावरणविद माधव गाडगिल का निधन: पश्चिमी घाट संरक्षण के जन-पहचान वैज्ञानिक को अंतिम विदाई

प्रख्यात पारिस्थितिकीविद और पर्यावरण चिंतक माधव गाडगिल का 7 जनवरी 2026 को पुणे में 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे कुछ समय से अस्वस्थ थे। भारत के सबसे प्रभावशाली पर्यावरण वैज्ञानिकों में गिने जाने वाले गाडगिल का कार्य, विशेषकर पश्चिमी घाट के संरक्षण और जन-आधारित पारिस्थितिकीय शासन के पक्ष में, राष्ट्रीय विमर्श को नई दिशा देने वाला रहा है।

जीवन, शिक्षा और वैज्ञानिक यात्रा

1942 में पश्चिमी घाट क्षेत्र में जन्मे माधव गाडगिल का प्रारंभिक जीवन प्रकृति और मानव-पर्यावरण के अंतर्संबंधों से गहराई से प्रभावित रहा। उन्होंने पुणे और मुंबई में उच्च शिक्षा प्राप्त की, और इसके पश्चात हावर्ड विश्वविद्यालय से गणितीय पारिस्थितिकी (Mathematical Ecology) में पीएचडी की।

लगभग छह दशकों के अपने वैज्ञानिक करियर में उन्होंने क्षेत्रीय पारिस्थितिकी (Field Ecology) और मानवशास्त्र (Anthropology) को मिलाकर ‘जन-वैज्ञानिक’ (People’s Scientist) के रूप में अपनी पहचान बनाई।

गाडगिल रिपोर्ट और पश्चिमी घाट संरक्षण

माधव गाडगिल को ‘वेस्टर्न घाट्स इकोलॉजी एक्सपर्ट पैनल’ का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, जिसकी रिपोर्ट को गाडगिल रिपोर्ट के नाम से जाना जाता है। इस रिपोर्ट में पश्चिमी घाट के बड़े हिस्से को पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) घोषित करने की सिफारिश की गई थी।

इसमें चेतावनी दी गई थी कि यदि बिना नियंत्रण के आधारभूत ढांचे और औद्योगिक विस्तार की अनुमति दी गई, तो यह क्षेत्र गंभीर पारिस्थितिकीय संकट में आ सकता है। लगभग 75% हिस्से को ESZ घोषित करने का सुझाव कई राज्य सरकारों के विरोध का कारण बना और यह रिपोर्ट पर्यावरणीय नीति में एक विवादास्पद लेकिन ऐतिहासिक दस्तावेज बनी।

राष्ट्रीय और वैश्विक योगदान

पश्चिमी घाट से आगे बढ़कर, गाडगिल ने भारत के जैव विविधता अधिनियम (Biological Diversity Act) के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे ग्लोबल एनवायरनमेंट फैसिलिटी (GEF) की विज्ञान और प्रौद्योगिकी सलाहकार समिति के अध्यक्ष भी रहे।

2024 में, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा उन्हें ‘Champion of the Earth’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान स्थायी विकास और सहभागी पर्यावरण शासन के प्रति उनके आजीवन समर्पण को मान्यता देता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • गाडगिल रिपोर्ट पश्चिमी घाट के संरक्षण पर केंद्रित थी।
  • पश्चिमी घाट एक यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट है।
  • माधव गाडगिल ने भारत के जैव विविधता अधिनियम के मसौदे में योगदान दिया।
  • 2024 में उन्हें UNEP द्वारा ‘Champion of the Earth’ घोषित किया गया।

लोगों के पक्षधर पर्यावरणविद के रूप में विरासत

माधव गाडगिल का दृष्टिकोण हमेशा विकेन्द्रीकृत निर्णय-निर्माण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर आधारित रहा। उन्होंने यह मान्यता दी कि पर्यावरण की रक्षा केवल नीतियों से नहीं, बल्कि स्थानीय ज्ञान और समुदायों के सक्रिय सहयोग से ही संभव है।

उनकी लेखनी, शिक्षण और नीति परामर्श आज भी भारत और विश्व में पारिस्थितिकी अनुसंधान और सार्वजनिक नीति को प्रभावित करते हैं। उनका निधन भारतीय पर्यावरण आंदोलन और वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

Originally written on January 8, 2026 and last modified on January 8, 2026.

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