पद्म श्री 2026 में लखनऊ के दो चिकित्सकों को सम्मान: आधुनिक और पारंपरिक चिकित्सा की संयुक्त उपलब्धि

पद्म श्री 2026 में लखनऊ के दो चिकित्सकों को सम्मान: आधुनिक और पारंपरिक चिकित्सा की संयुक्त उपलब्धि

लखनऊ ने एक बार फिर राष्ट्रीय गर्व का केंद्र बनते हुए 2026 में चिकित्सा क्षेत्र के दो प्रमुख व्यक्तित्वों को पद्म श्री सम्मान प्राप्त करते देखा। यह सम्मान आधुनिक फेफड़ों की चिकित्सा और पारंपरिक आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा में दशकों की सेवा और समर्पण को मान्यता देता है, जिससे भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में व्यक्तिगत उत्कृष्टता की भूमिका उजागर होती है।

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद: फेफड़ों की चिकित्सा में अग्रणी

प्रख्यात पल्मोनोलॉजिस्ट और क्षयरोग विशेषज्ञ डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को श्वसन चिकित्सा में उनके आजीवन योगदान के लिए सम्मानित किया गया है। उन्हें किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के संस्थापक के रूप में जाना जाता है। छात्र के रूप में अपनी यात्रा शुरू करने के बाद वे इसी संस्थान में विभागाध्यक्ष बने और असंख्य विशेषज्ञों को प्रशिक्षित किया।

पाँच दशकों से अधिक की चिकित्सा सेवा के दौरान उन्होंने हमेशा रोगी-केंद्रित देखभाल पर जोर दिया। उनका मानना है कि सहानुभूति और सम्मानजनक व्यवहार उपचार की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

व्यक्तिगत जीवन और मूल्य आधारित चिकित्सा

डॉ. प्रसाद अपने दीर्घकालिक करियर के लिए अपने परिवार के समर्थन को श्रेय देते हैं। एक साधारण पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उन्होंने रोगियों के प्रति सौम्यता और शिक्षण के प्रति निष्ठा के बल पर गहरी पहचान बनाई। युवाओं को वह नैतिक चिकित्सा, करुणा और दीर्घकालिक रोगों जैसे क्षयरोग के उपचार में निरंतरता पर विशेष ध्यान देने की सलाह देते हैं।

के. के. ठक्कराल: आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा में श्रेष्ठता

आयुर्वेद के शल्य तंत्र (Shalya Tantra) के प्रतिष्ठित चिकित्सक के. के. ठक्कराल को भी आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा में योगदान के लिए पद्म श्री से नवाजा गया है। 1947 के विभाजन के दौरान भारत आए ठक्कराल ने लखनऊ और बनारस में आयुर्वेद की गहन शिक्षा प्राप्त की। वे बाद में व्याख्याता और प्रोफेसर के रूप में कार्यरत रहे, लेकिन अधिकांश समय उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए समर्पित सेवा की।

उन्होंने हमेशा आयुर्वेद को एक सुलभ और स्वदेशी चिकित्सा प्रणाली के रूप में प्रस्तुत किया है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बढ़ावा मिला है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • पद्म श्री भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है।
  • Shalya Tantra आयुर्वेद की शल्य चिकित्सा शाखा को कहते हैं।
  • KGMU भारत के सबसे पुराने मेडिकल विश्वविद्यालयों में से एक है।
  • AYUSH मंत्रालय आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक प्रणालियों को बढ़ावा देता है।

पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा का संतुलन

डॉ. प्रसाद और प्रो. ठक्कराल को मिला यह सम्मान आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों दोनों के प्रति संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह लखनऊ की चिकित्सा विरासत को न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गौरव प्रदान करता है।

Originally written on January 27, 2026 and last modified on January 27, 2026.

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