पद्म श्री से सम्मानित हुए भारत के पर्यावरण योद्धा: जमीनी स्तर पर हरित क्रांति के नायक
इस वर्ष के पद्म पुरस्कारों में जमीनी स्तर पर पर्यावरण संरक्षण में लगे नायकों को विशेष मान्यता दी गई है। इनमें से कई ऐसे चेहरे हैं जिन्होंने दशकों तक बिना किसी प्रचार-प्रसार के, समुदायों के साथ मिलकर प्रकृति को पुनर्जीवित करने में अभूतपूर्व योगदान दिया। विशेष रूप से 92 वर्षीय केरल निवासी देवकी अम्मा को उनके वनरोपण कार्यों के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया है।
केरल में देवकी अम्मा का हरित संकल्प
अलाप्पुझा जिले की कोल्लक्कायल देवकी अम्मा ने समुद्रतटीय बंजर बालू भूमि को हरियाली से भर देने वाला कार्य किया है। 92 वर्ष की आयु में भी सक्रिय देवकी अम्मा ने अपने जीवन का अधिकांश भाग 3,000 से अधिक देशज और औषधीय पौधों की प्रजातियों को विकसित करने में लगाया। उनका वन आज स्थानीय जैव विविधता, मृदा की स्थिरता और सूक्ष्म जलवायु में संतुलन का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है।
पूर्वोत्तर और पूर्व भारत के हरित रक्षक
पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग निवासी शिक्षाविद एवं सामाजिक कार्यकर्ता गम्भीर सिंह योंजोन को भी पद्म श्री से सम्मानित किया गया है। उन्होंने हिमालय विज्ञान संघ की स्थापना कर पूर्वी हिमालय में पर्यावरण शिक्षा और संरक्षण को बढ़ावा दिया। उनके प्रयासों से सिंगालीला और निओरा वैली जैसे राष्ट्रीय उद्यान अस्तित्व में आए, जो जैव विविधता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
मेघालय के चेरापूंजी से सामाजिक कार्यकर्ता हाली वार को जीवित जड़ पुलों के संरक्षण के लिए सम्मान मिला है। ये पुल रबर के पेड़ों की जड़ों से बनाए जाते हैं और पारंपरिक ज्ञान तथा पारिस्थितिकी स्थिरता का अनोखा संगम हैं। हाली वार ने न केवल इन जैव-इंजीनियर्ड संरचनाओं को सशक्त किया, बल्कि स्थानीय परिवारों को भी इन तकनीकों में प्रशिक्षित किया।
मध्य भारत में जल और वन संरक्षण की पहल
मध्य प्रदेश के मोहन नगर ने ‘ताप्ती उपवन’ और जल संरचनाओं के निर्माण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में अद्वितीय कार्य किया है। उन्होंने 75 पहाड़ियों पर 75,000 जल संरक्षण संरचनाएं और हजारों देशज पौधों का रोपण कर भूजल स्तर सुधारने और स्थायी भूमि उपयोग को बढ़ावा देने का कार्य किया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य:
- पद्म पुरस्कार गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर प्रतिवर्ष घोषित किए जाते हैं।
- पद्म श्री भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
- पर्यावरण, सामाजिक कार्य और सार्वजनिक सेवा जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वालों को सम्मानित किया जाता है।
- सामुदायिक-आधारित संरक्षण हालिया पद्म पुरस्कारों की प्रमुख थीम रही है।
इन जमीनी स्तर के पर्यावरण कार्यकर्ताओं को सम्मानित कर सरकार ने यह संदेश दिया है कि दीर्घकालिक और समुदाय-निर्देशित प्रयास ही स्थायी पर्यावरणीय बदलाव ला सकते हैं। ये पुरस्कार न केवल व्यक्तिगत योगदानों की मान्यता हैं, बल्कि देशभर में पर्यावरण संरक्षण की संस्कृति को प्रेरित करने का भी माध्यम हैं।