पद्मश्री हरिहरन के ग़ज़ल गायन के 50 वर्ष, दिल्ली में भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन

पद्मश्री हरिहरन के ग़ज़ल गायन के 50 वर्ष, दिल्ली में भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन

दिल्ली के प्रतिष्ठित मावलांकर ऑडिटोरियम में पद्मश्री गायक हरिहरन के ग़ज़ल गायन के 50 गौरवशाली वर्षों का जश्न एक भव्य सांस्कृतिक संध्या के रूप में मनाया गया। यह आयोजन भारतीय शास्त्रीय ग़ज़ल परंपरा के एक विशिष्ट स्वर को सम्मानित करने के लिए समर्पित था। संगीत, साहित्य और आत्मचिंतन से सजी इस शाम ने पांच दशकों की उस यात्रा को रेखांकित किया, जिसने आधुनिक दौर में ग़ज़ल को नई पीढ़ियों तक पहुंचाया।

‘उस्ताद-ए-ग़ज़ल हरिहरन’ पुस्तक का लोकार्पण

इस अवसर का प्रमुख आकर्षण लेखक और पत्रकार आनंद कक्कड़ द्वारा लिखित पुस्तक ‘उस्ताद-ए-ग़ज़ल हरिहरन’ का विमोचन रहा। यह पुस्तक हरिहरन की पांच दशक लंबी कलात्मक यात्रा और समकालीन भारत में ग़ज़ल परंपरा को संरक्षित एवं पुनर्जीवित करने में उनके योगदान का दस्तावेज है।

विमोचन के साथ आयोजित चर्चा सत्र में प्रख्यात साहित्यकार ममता कालिया, ओम निश्छल और प्रताप सोमवंशी ने भाग लिया। वक्ताओं ने ग़ज़ल की सांस्कृतिक प्रासंगिकता और संगीत के माध्यम से काव्य परंपरा को जीवित रखने में हरिहरन की भूमिका पर विचार साझा किए।

नया एलबम और संगीतमय उपलब्धि

इस समारोह को और विशेष बनाते हुए हरिहरन ने अपना नया ग़ज़ल एलबम भी जारी किया, जो उनके सृजनात्मक सफर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है। कार्यक्रम का संचालन मनमीत सिंह ने किया, जिन्होंने संस्मरणों और संगीतमय झलकियों के माध्यम से श्रोताओं को हरिहरन की यात्रा से जोड़ा।

इस अवसर पर डॉ. हर्षवर्धन, के. सतीश नंबुदिरीपाद, फिल्म निर्माता हरि शंकर राठी और कवि आलोक श्रीवास्तव सहित कला और मीडिया जगत की कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं।

‘सरताज-ए-ग़ज़ल’ रियलिटी शो की घोषणा

समारोह के दौरान दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले ग़ज़ल-आधारित रियलिटी शो ‘सरताज-ए-ग़ज़ल’ की घोषणा भी की गई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य उभरती प्रतिभाओं की खोज और शास्त्रीय ग़ज़ल गायन को राष्ट्रीय मंच प्रदान करना है। डिजिटल युग में पारंपरिक काव्य-संगीत की दृश्यता बढ़ाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ग़ज़ल मूलतः फारसी काव्य परंपरा से विकसित होकर उर्दू साहित्य में फली-फूली।
  • पद्मश्री भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
  • दूरदर्शन प्रसार भारती के अधीन भारत का सार्वजनिक सेवा प्रसारक है।
  • मावलांकर ऑडिटोरियम नई दिल्ली का प्रमुख सांस्कृतिक स्थल है।

यह सांस्कृतिक संध्या हरिहरन की विरासत को समर्पित एक गरिमामय श्रद्धांजलि थी। पांच दशकों में उन्होंने शास्त्रीय परंपरा और समकालीन संवेदनाओं के बीच सेतु का कार्य किया है। यह आयोजन केवल एक वर्षगांठ नहीं, बल्कि सुर, कविता और आत्मीय अभिव्यक्ति को समर्पित जीवन की यात्रा का उत्सव था।

Originally written on February 27, 2026 and last modified on February 27, 2026.

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