पद्मश्री से सम्मानित के. विजय कुमार: रणनीतिक पुलिसिंग और आंतरिक सुरक्षा के शिल्पकार
भारत के प्रसिद्ध पुलिस अधिकारी के. विजय कुमार को वर्ष 2026 का पद्मश्री सम्मान प्रदान किया गया है। यह सम्मान उन्हें रणनीतिक पुलिसिंग, उग्रवाद विरोधी अभियानों और नेतृत्व क्षमता के लिए दिया गया है, जो दशकों तक भारत की आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने में योगदान देता रहा। 74 वर्षीय कुमार इस वर्ष के 113 पद्मश्री प्राप्तकर्ताओं में शामिल हैं।
सेवाकाल और करियर की पृष्ठभूमि
के. विजय कुमार 1975 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं, जो तमिलनाडु कैडर से संबंधित रहे। उन्होंने 2012 में सेवा निवृत्ति ली। अपने लंबे करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया—चेन्नई पुलिस आयुक्त, बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के कश्मीर जोन के महानिरीक्षक और हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी के निदेशक जैसे पदों पर। उनकी रणनीतिक सोच और आधुनिक उग्रवाद-निरोधक नीतियाँ आज भी अनुकरणीय मानी जाती हैं।
वीरप्पन ऑपरेशन में निर्णायक भूमिका
कुमार को सर्वाधिक ख्याति 2004 में कुख्यात जंगल डकैत वीरप्पन के खिलाफ चलाए गए “ऑपरेशन ककून” के लिए मिली। उन्होंने तमिलनाडु पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स का नेतृत्व किया, जिसने इस वर्षों पुराने अपराधी के आतंक का अंत किया। यह अभियान तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल के घने जंगलों में विस्तृत था और इसमें विशेष खुफिया तंत्र और जंगल युद्ध तकनीकों का उपयोग किया गया। कुमार ने इस ऑपरेशन पर अपनी पुस्तक “Veerappan: Chasing the Brigand” भी लिखी है, जिसमें उन्होंने इस चुनौतीपूर्ण अभियान की रणनीतियाँ साझा की हैं।
केंद्रीय बलों में नेतृत्व
2010 में, दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़) में हुए माओवादी हमले के बाद उन्हें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) का महानिदेशक नियुक्त किया गया। उनके नेतृत्व में CRPF ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अभियान तेज किए, जिनमें 2011 में माओवादी नेता किशनजी का मारा जाना प्रमुख उपलब्धि रही। बाद में वे गृह मंत्रालय में सुरक्षा सलाहकार और जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के सलाहकार के रूप में भी कार्यरत रहे।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- पद्मश्री भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
- ऑपरेशन “ककून” 2004 में वीरप्पन के मारे जाने वाला पुलिस अभियान था।
- CRPF की CoBRA इकाई जंगल युद्ध और नक्सल विरोधी अभियानों में विशेषज्ञ है।
- 2010 का दंतेवाड़ा हमला भारतीय सुरक्षा बलों पर सबसे घातक हमलों में से एक था।
मान्यता और विरासत
सरकारी प्रशस्ति पत्र में कुमार को नक्सलवाद और संगठित अपराध के विरुद्ध रणनीतिक पुलिसिंग के प्रमुख वास्तुकार के रूप में वर्णित किया गया है। उन्होंने इस सम्मान का श्रेय अपनी टीमों और सहकर्मियों को दिया, जो वर्षों से उनके साथ विभिन्न अभियानों में शामिल रहे। यह पद्मश्री सम्मान न केवल व्यक्तिगत साहस का प्रतीक है, बल्कि संस्थागत नेतृत्व की उस भूमिका को भी मान्यता देता है, जिसने भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को नया आधार प्रदान किया।