पद्मपाणि सम्मान से सम्मानित होंगे इलैयाराजा: अजंता-एलोरा अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव की घोषणा
प्रसिद्ध संगीत निर्देशक इलैयाराजा को भारतीय सिनेमा में उनके अद्वितीय योगदान के लिए 11वें अजंता–एलोरा अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में पद्मपाणि सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान भारतीय और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक मंचों पर संगीत की स्थायी भूमिका को रेखांकित करता है।
एक महान संगीत यात्रा का सम्मान
पद्मपाणि सम्मान हर वर्ष उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने सिनेमा और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
इलैयाराजा की संगीत यात्रा:
- चार दशकों से अधिक की है
- हजारों फिल्मों में संगीत और पार्श्वसंगीत रचना की
- उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत और पाश्चात्य ऑर्केस्ट्रा का अद्भुत सम्मिलन किया
- फिल्म संगीत को कथा-वाचन का संवेदनशील माध्यम बनाया
पुरस्कार विवरण और महोत्सव की रूपरेखा
पद्मपाणि पुरस्कार में शामिल हैं:
- एक स्मृति चिह्न (memento)
- प्रशस्ति पत्र
- ₹2 लाख का नकद पुरस्कार
11वां अजंता-एलोरा फिल्म महोत्सव 28 जनवरी से 1 फरवरी तक महात्मा गांधी मिशन परिसर, छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित किया जाएगा।
इसमें भारत और विदेशों के फिल्मकारों, आलोचकों, शोधकर्ताओं और सिने-प्रेमियों की भागीदारी होगी।
संस्थागत सहयोग और सांस्कृतिक महत्व
यह महोत्सव भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय और महाराष्ट्र सरकार के सांस्कृतिक कार्य विभाग के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
इसके सह-प्रस्तुतकर्ता हैं:
- राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (NFDC)
- महाराष्ट्र फिल्म, रंगमंच और सांस्कृतिक विकास निगम
पद्मपाणि सम्मान इस महोत्सव का सर्वोच्च पुरस्कार है, जो किसी कलाकार के जीवनपर्यंत योगदान और कलात्मक उत्कृष्टता को सम्मानित करता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- पद्मपाणि पुरस्कार अजंता–एलोरा फिल्म महोत्सव का लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान है।
- इलैयाराजा भारतीय शास्त्रीय और पाश्चात्य संगीत के मेल के लिए प्रसिद्ध हैं।
- यह महोत्सव छत्रपति संभाजीनगर (पूर्व में औरंगाबाद) में आयोजित होता है।
- आयोजन में केंद्र और महाराष्ट्र सरकार के सांस्कृतिक विभागों का समर्थन होता है।
भारतीय सिनेमा पर व्यापक प्रभाव
इलैयाराजा को यह सम्मान देकर महोत्सव भारतीय सिनेमा में संगीत की केंद्रीय भूमिका को और सुदृढ़ करता है।
यह पहल भारत की कलात्मक विरासत और रचनात्मक उत्कृष्टता को पहचान देने का माध्यम है, जिससे नई पीढ़ियाँ भी संस्कृति और संगीत के मूल्यों को आत्मसात कर सकें।
इलैयाराजा जैसे कलाकारों का सम्मान न केवल सिनेमा का सम्मान है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक आत्मा का भी उत्सव है।