न्यूकैसल रोग का बढ़ता खतरा और पोल्ट्री उद्योग पर प्रभाव

न्यूकैसल रोग का बढ़ता खतरा और पोल्ट्री उद्योग पर प्रभाव

यूरोप में न्यूकैसल रोग के फैलाव की हालिया रिपोर्टों ने पोल्ट्री उद्योग को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। विशेष रूप से यूनाइटेड किंगडम में पोल्ट्री उत्पादकों ने निगरानी और जैव-सुरक्षा उपायों को और सख्त कर दिया है। यह रोग तेजी से फैलने वाला और पक्षियों के लिए अत्यंत घातक है, जिससे खाद्य सुरक्षा और कृषि अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।

न्यूकैसल रोग क्या है?

न्यूकैसल रोग एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो मुख्यतः घरेलू पक्षियों जैसे मुर्गियों को प्रभावित करती है। यह एवियन पैरामिक्सोवायरस सीरोटाइप-1 के कारण होता है और विश्वभर में पाया जाता है। यह रोग न केवल पोल्ट्री उद्योग को आर्थिक नुकसान पहुंचाता है, बल्कि बड़े पैमाने पर पक्षियों की मृत्यु का कारण भी बन सकता है।

रोग के प्रकार और गंभीरता

न्यूकैसल रोग तीन प्रकारों में पाया जाता है, जो इसकी गंभीरता के आधार पर वर्गीकृत होते हैं। लेंटोजेनिक प्रकार हल्का होता है और आमतौर पर कम नुकसान पहुंचाता है। मेसोजेनिक प्रकार मध्यम स्तर का होता है, जिसमें लक्षण अधिक स्पष्ट होते हैं। वहीं वेलोजेनिक प्रकार सबसे खतरनाक होता है, जो अत्यधिक मृत्यु दर का कारण बन सकता है। रोग की गंभीरता वायरस के प्रकार और पक्षियों की प्रतिरक्षा क्षमता पर निर्भर करती है।

संक्रमण और लक्षण

यह वायरस संक्रमित पक्षियों के श्वसन स्राव, सांस के जरिए निकलने वाली हवा और मल के माध्यम से फैलता है। यह गोबर में लगभग दो महीने तक और मृत पक्षियों में करीब एक वर्ष तक जीवित रह सकता है। हालांकि, सूर्य प्रकाश और कीटाणुनाशकों से यह नष्ट हो जाता है। इसके लक्षणों में खांसी, सांस लेने में कठिनाई, कंपकंपी, लकवा, दस्त और अंडों के उत्पादन में कमी शामिल हैं।

रोकथाम और नियंत्रण उपाय

इस रोग का कोई निश्चित उपचार उपलब्ध नहीं है। हालांकि, द्वितीयक संक्रमण को रोकने के लिए एंटीबायोटिक का उपयोग किया जा सकता है। इससे बचाव के लिए टीकाकरण, स्वच्छता और सख्त जैव-सुरक्षा उपाय अत्यंत आवश्यक हैं। साथ ही, समय पर निगरानी और त्वरित कार्रवाई से इसके प्रसार को नियंत्रित किया जा सकता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • न्यूकैसल रोग एवियन पैरामिक्सोवायरस सीरोटाइप-1 के कारण होता है।
  • यह रोग घरेलू और जंगली दोनों प्रकार के पक्षियों को प्रभावित करता है।
  • इसके तीन प्रकार होते हैं—लेंटोजेनिक, मेसोजेनिक और वेलोजेनिक।
  • इस रोग का कोई निश्चित इलाज नहीं है, केवल रोकथाम ही मुख्य उपाय है।

न्यूकैसल रोग का बढ़ता प्रसार यह संकेत देता है कि पशु स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के लिए सतर्कता बेहद जरूरी है। प्रभावी रोकथाम, जागरूकता और वैज्ञानिक प्रबंधन के जरिए ही इस गंभीर बीमारी से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।

Originally written on April 4, 2026 and last modified on April 4, 2026.

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