नॉर्वेजियन फिल्म “सेफ हाउस” को ICFT-यूनेस्को गांधी मेडल से सम्मानित

नॉर्वेजियन फिल्म “सेफ हाउस” को ICFT-यूनेस्को गांधी मेडल से सम्मानित

नॉर्वे की फीचर फिल्म “सेफ हाउस” को मानवीय साहस और नैतिक जिम्मेदारी के संवेदनशील चित्रण के लिए ICFT–यूनेस्को गांधी मेडल से सम्मानित किया गया है। यह फिल्म 2013 में मध्य अफ्रीकी गणराज्य (Central African Republic) के गृहयुद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित है और युद्धग्रस्त परिस्थितियों में इंसानियत की रक्षा की जटिलता को गहराई से प्रस्तुत करती है।

मानवीय नैतिकता पर केंद्रित कथा

फिल्म की कहानी बांगी (Bangui) स्थित “डॉक्टर्स विदआउट बॉर्डर्स” अस्पताल में मात्र 15 घंटे की समयावधि में घटित होती है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे चिकित्सक और सहायता कर्मी जीवन-मृत्यु के निर्णयों के बीच नैतिक दुविधाओं का सामना करते हैं। कहानी संवेदना, जिम्मेदारी और साहस की उन सीमाओं को उजागर करती है जहां कर्तव्य और खतरा एक-दूसरे में घुलमिल जाते हैं। फिल्म की यह गहन मानवीय दृष्टि निर्णायक मंडल के साथ गहराई से जुड़ गई।

कहानी कहने की शैली और अभिनय की सराहना

जूरी ने फिल्म की संयमित लेकिन प्रभावशाली कहानी कहने की शैली की प्रशंसा की। मुख्य भूमिका निभाने वाली क्रिस्टीन कुजाथ थॉर्प (Kristine Kujath Thorp) के सशक्त अभिनय को फिल्म की प्रमुख ताकत बताया गया। उनका प्रदर्शन फिल्म के भावनात्मक और मानवीय पक्ष को और भी प्रामाणिक बनाता है। आलोचकों के अनुसार, “सेफ हाउस” ने सांस्कृतिक सीमाओं से परे जाकर मानवीय करुणा और जिम्मेदारी जैसे सार्वभौमिक मूल्यों को सशक्त रूप में प्रस्तुत किया।

पुरस्कार वितरण और संस्थागत मान्यता

यह सम्मान ICFT–यूनेस्को पेरिस के मानद प्रतिनिधि मनोज कदम ने निर्देशक एरिक स्वेन्सन (Eirik Svensson) की ओर से ग्रहण किया। पुरस्कार NFDC के प्रबंध निदेशक द्वारा प्रदान किया गया। ICFT और यूनेस्को द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित गांधी मेडल उन फिल्मों को दिया जाता है जो अहिंसा, सहिष्णुता, अंतरसंस्कृति संवाद और शांति की संस्कृति को बढ़ावा देती हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ICFT–यूनेस्को गांधी मेडल उन फिल्मों को सम्मानित करता है जो शांति और अहिंसा के संदेश को आगे बढ़ाती हैं।
  • “सेफ हाउस” का प्रीमियर 48वें गोथेनबर्ग फिल्म फेस्टिवल 2025 में हुआ, जहाँ इसे ऑडियंस ड्रैगन अवॉर्ड मिला।
  • निर्देशक एरिक स्वेन्सन “वन नाइट इन ओस्लो” और “हराजुकू” जैसी फिल्मों के लिए प्रसिद्ध हैं।
  • यह फिल्म 56वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) में अपनी अंतरसंस्कृति संवाद क्षमता के लिए सराही गई।

वैश्विक प्रशंसा और सिनेमा में योगदान

“सेफ हाउस” अपने प्रीमियर के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार प्रशंसा बटोर रही है। यह फिल्म मानवीय कार्यकर्ताओं की दृढ़ता, साहस और नैतिक संघर्षों को सशक्त रूप में प्रस्तुत करती है। ICFT–यूनेस्को गांधी मेडल की प्राप्ति ने इसे न केवल समकालीन विश्व सिनेमा में एक उल्लेखनीय स्थान दिया है, बल्कि यह इस बात का प्रतीक भी बनी है कि सिनेमा मानवीय संवेदनाओं और वैश्विक शांति के संदेश को कितनी गहराई से व्यक्त कर सकता है।

Originally written on November 29, 2025 and last modified on November 29, 2025.

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