नेले फाउंडेशन को मिला 2025 का मूलत्व वर्ल्ड अवार्ड
बेंगलुरु स्थित नेले फाउंडेशन को 2025 के मूलत्व वर्ल्ड अवार्ड से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान संगठन द्वारा वंचित और अनाथ बच्चों के उत्थान के क्षेत्र में किए जा रहे दीर्घकालिक कार्यों की सराहना में प्रदान किया जा रहा है। इस पुरस्कार के माध्यम से संस्था की समाज के कमजोर वर्गों को सुरक्षा, देखभाल और समग्र विकास के अवसर उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को मान्यता मिली है।
संगठन की पृष्ठभूमि
नेले फाउंडेशन की स्थापना वर्ष 2000 में हिंदू सेवा प्रतिष्ठान की एक परियोजना के रूप में हुई थी। वर्ष 2014 से यह स्वतंत्र संस्था के रूप में कार्य कर रही है। संगठन का मुख्य उद्देश्य उन बच्चों को सुरक्षित, संस्कारयुक्त और सहयोगपूर्ण वातावरण प्रदान करना है जो सामाजिक या आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे हैं। वर्षों के दौरान, नेले फाउंडेशन एक विस्तृत बाल-कल्याण नेटवर्क के रूप में विकसित हुआ है।
सेवाओं का दायरा और सामाजिक प्रभाव
नेले फाउंडेशन अपने 12 केंद्रों के माध्यम से बच्चों को भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करता है। वर्तमान में संस्था के विभिन्न केंद्रों में 415 बालक और बालिकाएँ रह रहे हैं, जबकि स्थापना के बाद से 2,000 से अधिक बच्चों का पुनर्वास किया जा चुका है। यह संगठन न केवल आश्रय प्रदान करता है, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा, जीवन कौशल और आत्मविश्वास निर्माण पर भी ध्यान केंद्रित करता है।
पुरस्कार और सम्मान समारोह
मूलत्व फाउंडेशन चैरिटेबल ट्रस्ट ने नेले फाउंडेशन को बाल कल्याण के क्षेत्र में निरंतर योगदान के लिए चयनित किया है। इस पुरस्कार के साथ ₹1,00,001 की नकद राशि भी दी जाएगी। पुरस्कार समारोह 16 नवम्बर को मंगलुरु के शारदा विद्यालय ऑडिटोरियम में आयोजित किया जाएगा, जिसमें कई प्रमुख अतिथि उपस्थित रहेंगे।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- नेले फाउंडेशन को 2025 का मूलत्व वर्ल्ड अवार्ड प्राप्त होगा।
- संस्था 12 केंद्रों में 415 बच्चों को आश्रय और सुविधा प्रदान कर रही है।
- स्थापना के बाद से 2,000 से अधिक बच्चों का पुनर्वास किया गया है।
- पुरस्कार में ₹1,00,001 की नकद राशि शामिल है।
बाल कल्याण के प्रति सतत प्रतिबद्धता
नेले फाउंडेशन बच्चों के लिए सुरक्षित जीवन, शिक्षा और भावनात्मक सहयोग सुनिश्चित करने की दिशा में निरंतर कार्यरत है। इसका लक्ष्य ऐसे बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना है ताकि वे समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें। संस्था की यह पहल न केवल बाल संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण है, बल्कि भारत में सामाजिक सेवा की भावना को भी नई दिशा प्रदान करती है।