निरस्त्रीकरण मामलों पर संयुक्त राष्ट्र सलाहकार बोर्ड की अध्यक्षता पहली बार भारतीय राजनयिक को

निरस्त्रीकरण मामलों पर संयुक्त राष्ट्र सलाहकार बोर्ड की अध्यक्षता पहली बार भारतीय राजनयिक को

भारत की कूटनीतिक उपलब्धियों में एक नया अध्याय जुड़ गया है। वरिष्ठ भारतीय राजनयिक डी.बी. वेंकटेश वर्मा को संयुक्त राष्ट्र के निरस्त्रीकरण मामलों पर सलाहकार बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह पहली बार है जब इस प्रमुख वैश्विक निकाय की अध्यक्षता किसी भारतीय को सौंपी गई है, जो भारत की वैश्विक सुरक्षा और बहुपक्षीय कूटनीति में बढ़ती साख को दर्शाता है।

ऐतिहासिक नियुक्ति: संयुक्त राष्ट्र महासचिव का निर्णय

संयुक्त राष्ट्र महासचिव द्वारा 2026–27 कार्यकाल के लिए नियुक्त वर्मा, इस बोर्ड की स्थापना (1978) के बाद इसके पहले भारतीय अध्यक्ष होंगे। इससे पहले कुछ भारतीय राजनयिक सदस्य के रूप में बोर्ड का हिस्सा रहे हैं, परंतु अध्यक्ष पद भारत को पहली बार प्राप्त हुआ है, जो संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थिति को मजबूत करता है।

डी.बी. वेंकटेश वर्मा का प्रोफ़ाइल

1988 बैच के भारतीय विदेश सेवा अधिकारी वर्मा, भारत के प्रमुख निरस्त्रीकरण विशेषज्ञों में गिने जाते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्य करते हुए भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते में प्रमुख भूमिका निभाई थी। वे बाद में रूस में भारत के राजदूत भी रहे और कोविड-19 काल में द्विपक्षीय रणनीतिक समन्वय को सफलतापूर्वक संभाला।

सलाहकार बोर्ड की भूमिका और अधिदेश

यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र महासभा के दसवें विशेष सत्र (1978) की अंतिम रिपोर्ट के तहत स्थापित किया गया था। इसकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल हैं:

  • शस्त्र नियंत्रण और निरस्त्रीकरण पर महासचिव को सलाह देना।
  • संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण शोध संस्थान (UNIDIR) के ट्रस्टी बोर्ड के रूप में कार्य करना।
  • संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण सूचना कार्यक्रम के कार्यान्वयन पर मार्गदर्शन देना।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • UN Advisory Board on Disarmament Matters की स्थापना 1978 में हुई थी।
  • इसमें 15 सदस्य होते हैं, जो विश्व के सभी क्षेत्रों से नामित किए जाते हैं।
  • यह बोर्ड UNIDIR का पर्यवेक्षक निकाय भी है।
  • बोर्ड का उद्देश्य वैश्विक निरस्त्रीकरण और रणनीतिक स्थिरता को बढ़ावा देना है।

भारत की वैश्विक स्थिति में वृद्धि

डी.बी. वर्मा की नियुक्ति भारत के संतुलित, व्यावहारिक और बहुपक्षीय निरस्त्रीकरण दृष्टिकोण को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने का प्रतीक है। भारत लंबे समय से सार्वभौमिक और गैर-भेदभावपूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण की वकालत करता आया है। यह पद भारत को वैश्विक शस्त्र नियंत्रण संवाद में एक प्रभावशाली आवाज प्रदान करेगा, विशेषकर ऐसे समय में जब भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहे हैं।

यह नियुक्ति भारत की वैश्विक कूटनीतिक रणनीति की परिपक्वता और नेतृत्व क्षमता को भी दर्शाती है, और आने वाले वर्षों में भारत की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

Originally written on January 14, 2026 and last modified on January 14, 2026.

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