निमोनिया की रोकथाम में टीकाकरण और स्वच्छ आदतों का महत्व
निमोनिया विश्वभर में एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है, विशेष रूप से पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए। भारत में पर्यावरणीय प्रदूषण, श्वसन संक्रमण और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता इसके जोखिम को और बढ़ा देते हैं। ऐसे में प्रतिदिन अपनाई जाने वाली सरल लेकिन प्रभावी रोकथाम उपाय अत्यंत आवश्यक हो जाते हैं।
टीकाकरण: प्राथमिक सुरक्षा कवच
निमोनिया की रोकथाम में टीकाकरण सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है। भारत के सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम के तहत दी जाने वाली न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन छोटे बच्चों को गंभीर संक्रमणों से बचाती है। वहीं वयस्कों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों के लिए फ्लू वैक्सीन तथा वयस्क न्यूमोकोकल टीकों का विशेष महत्व है। बच्चों के टीकाकरण की पूर्णता सुनिश्चित करने से रोग के गंभीर रूपों की संभावना काफी कम हो जाती है।
प्रदूषित वायु के संपर्क को कम करना
शीत ऋतु में विशेष रूप से वायु प्रदूषण के स्तर में तेज वृद्धि होती है, जिससे श्वसन तंत्र कमजोर होता है और निमोनिया की संभावना बढ़ जाती है। घरों में बायोमास ईंधन के उपयोग से होने वाला धुआँ भी एक प्रमुख जोखिम है। इसलिए परिवारों को साफ ईंधन जैसे एलपीजी का उपयोग करने, घरों में पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखने और उच्च प्रदूषण वाले क्षेत्रों में प्रमाणित एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।
हाथों की स्वच्छता को प्राथमिकता देना
हाथ स्वच्छ करना निमोनिया के लिए जिम्मेदार रोगाणुओं के प्रसार को रोकने का सरल और प्रभावी तरीका है। भोजन से पहले, खाँसने या छींकने के बाद, तथा सामान्य रूप से छुई जाने वाली सतहों के संपर्क में आने के बाद कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोना चाहिए। बच्चों और बुज़ुर्गों के बीच इन आदतों को सुदृढ़ करना संक्रमण फैलने की संभावना को कम करता है।
कमजोर समूहों की सुरक्षा और खतरे के संकेत
65 वर्ष से अधिक आयु के वयस्क और हृदयरोग, मधुमेह या श्वसन समस्याओं से ग्रस्त व्यक्ति निमोनिया के गंभीर रूपों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। विटामिन C, जिंक और विटामिन D से भरपूर पोषण श्वसन स्वास्थ्य का समर्थन करता है। परिवारों को निम्न संकेतों पर तुरंत ध्यान देना चाहिए छोटे बच्चों में तेज साँस लेना या छाती धँसना, लगातार तेज बुखार, अत्यधिक जकड़न, और बुज़ुर्गों में भ्रम की स्थिति या त्वचा का नीला पड़ना। समय पर चिकित्सकीय सहायता लेने से जटिलताओं को रोका जा सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत में पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु के प्रमुख कारणों में निमोनिया शामिल है।
- न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन बच्चों को निमोनिया के गंभीर संक्रमण से बचाती है।
- वयस्कों के लिए वार्षिक फ्लू वैक्सीन और न्यूमोकोकल टीका अत्यंत लाभकारी माने जाते हैं।
- वायु प्रदूषण, इनडोर धुआँ और खराब स्वच्छता निमोनिया के प्रमुख जोखिम कारक हैं।